कोलकाता का पेन हॉस्पिटल, जहाँ होता है पुरानी कलम का इलाज

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तस्वीर - जनसत्ता से साभार

77 साल पुरानी दुकान 1945 में स्थापित हुई
कभी सुना है कलम के अस्पताल के बारे में..? नहीं ना..? तो जान लीजिए ऐसा अस्पताल है और वो भी अपने ही देश में। कोलकाता की गलियों में एक ऐसा पेन हॉस्पिटल है, जहां पुरानी से पुरानी बिगड़े हुए कलमों को ठीक किया जाता है। यह दुकान 77 साल पुरानी है।
 इतिहास- पेन के लगातार इस्तेमाल या ऐसे भी वो रखे-रखे खराब हो जाते हैं। जिस आम लोग कूड़े में डाल देते हैं, लेकिन कोलकाता में एक समय था, जब लोग अपनी कलम को सही करवाने के लिए ‘पेन अस्पताल’ ले जाते थे। यह सुनने में भले ही अविश्वसनीय लगे लेकिन उस वक्त पेन अस्पताल वास्तव में शहर में काफी संख्या में मौजूद थे। हालांकि अब ऐसे अस्पताल समय के साथ खत्म गए हैं, लेकिन कोलकाता के बीचों-बीच अभी भी एक अस्पताल चल रहा है।
कहां है ये दुकान- जैसे ही आप धर्मतला मेट्रो स्टेशन के गेट नंबर 4 से बाहर निकलते हैं, आपको फुटपाथ के बाईं ओर एक ‘पेन हॉस्पिटल’ बोर्ड लटका हुआ दिखाई देगा। संकरी गली के एक तरफ, डॉ मोहम्मद इम्तियाज एक छोटी सी दुकान में बैठे रहते हैं। यहां वो पुराने और टूटी हुई कलमों का ‘इलाज’ करते हैं। इम्तियाज के दादा समसुद्दीन ने 1945 में इस दुकान को शुरू किया था। आज इसकी हालात भले ही खराब हो गई हो लेकिन इस अव्यवस्थित दुकान में आज भी कई बेशकीमती कलम रखे हुए हैं। इम्तियाज बताते हैं कि जब ‘पेन अस्पताल’ की शुरूआत हुई थी, तब वाटरमैन, शेफर्ड, पियरे कार्डा और विल्सन जैसे बेशकीमती पेन विदेशों से लाए जाते थे, लेकिन इसके खराब होने के बाद इसे ठीक करने वाला कोई नहीं था। जिसके बाद पेन अस्पताल शुरू हुआ”।
दुकान की कमाई पर निर्भर परिवार- इम्तियाज और उनके भाई मोहम्मद रियाज ने अपने पिता मोहम्मद सुल्तान के साथ रहकर काम सीखा था। अपने छोटे भाई की मृत्यु के बाद इम्तियाज ने अस्पताल को संभाला। आज भी उनका परिवार इसी ‘अस्पताल’ की कमाई पर निर्भर है। इम्तियाज कहते हैं- “आजकल, स्याही और कलम से लिखना खत्म हो गया है। ज्यादातर लोग एक बार पेन का इस्तेमाल करते हैं और उसे फेंक देते हैं। अब कंप्यूटर का जमाना है। अभी भी कुछ लोग हैं जो स्याही से लिखते हैं। वे टूटे हुए पेन को ठीक करने आते हैं। कुछ लोग शौक के लिए भी पुराना पेन खरीदते हैं।”

ऐसे ही एक ‘पेन ऑपरेशन’ के दौरान पेन हॉस्पिटल के डॉक्टर ने कहा- “विदेशी पेन बहुत महंगे होते हैं। लोग अभी भी मरम्मत के लिए 10,000-12,000 रुपये के पेन लाते हैं। पेन में स्याही भरने का तरीका अलग-अलग होता है। सभी पेन पार्ट्स हमेशा आसानी से उपलब्ध नहीं होते हैं। ऐसे में पुरानी कलम को ठीक करते ही उसे एक नया जीवन मिल जाता है।”
इम्तियाज आगे बताते हैं कि उनके पास कलेक्शन में 20 रुपये से लेकर 20,000 रुपये तक के पेन हैं। कई प्रसिद्ध प्रोफेसर, लेखक और पत्रकार इस पेन अस्पताल में अपनी पसंदीदा कलम की बीमारी का इलाज कराने आ चुके हैं।
(साभार – जनसत्ता)

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