जिजिविषा का अद्भुत उदाहरण हैं राजकोट के मारू

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पाठ्यक्रम में शामिल होगी उनकी संघर्ष गाथा

राजकोट : गुजरात के जिला राजकोट में रहने वाले 20 वर्षीय उत्तम मारू से जिन्‍होंने कभी न हारने वाली अपनी भावना से अंधापन, कमजोर फेफड़े, चलने में कठिनाई जैसी तमाम चुनौतियों को दरकिनार कर दिया और जीवन में आगे बढ़ रहे हैं। मारू संगीतकार हैं और वे सौराष्ट्र विश्वविद्यालय (एसयू) की स्नातक परीक्षा दे रहे हैं। कुछ भी हो, ऐसा तप निश्चित रूप से पाठ्यपुस्तक सामग्री है। उनके साहस को देखते हुए एसयू ने मारू के जीवन की कहानी को अपने कला संकाय के पाठ्यक्रम में शामिल करने का फैसला किया है। जसनी कॉलेज में बीए सेमेस्टर-5 की परीक्षा दे रहे मारू ने पूरे उपनिषद के अलावा गीता के 700 श्लोकों को कंठस्थ कर लिया है। मारू पंडित की तरह श्लोकों का पाठ कर सकते हैं। संगीत के प्रति अपने जुनून को बनाए रखने के लिए गायन में विशारद की डिग्री प्राप्त ली है और वे तबला भी बजाते हैं।
जीवनी मनोविज्ञान और समाजशास्त्र के पाठ्क्रम में शामिल
कॉलेज का दौरा करने वाले एसयू के प्रो-वाइस चांसलर विजय देसानी ने कहा, “हम अपने पाठ्यक्रमों में इतने सारे लोगों की जीवनी पढ़ाते हैं। मारू के साहस और अपने जीवन में चुनौतियों से पार पाने का दृढ़ संकल्प लाखों किशोरों के लिए प्रेरणा है। हमने उनकी कहानी को मनोविज्ञान और समाजशास्त्र विभागों के सर्वश्रेष्ठ व्यक्तित्व अध्यायों में शामिल करने का फैसला किया है।”
परिवार ने भी नहीं मानी हार
मारू की शारीरिक अक्षमता जन्मजात है। उनके परिवार के अनुसार राजकोट में कई डॉक्टरों ने उम्मीद छोड़ दी थी कि मारू जन्म के बाद भी जीवित रहेगा। टाइम्‍स ऑफ इंडिया से बात करते हुए मारू के दादा कुंवरजीभाई ने कहा: “डॉक्टरों ने हार मान ली थी, लेकिन हमने नहीं। हमने स्थिति को स्वीकार किया और जो कुछ भी हम कर सकते थे वह करने का फैसला किया। हमने उन्हें प्रशिक्षण देना शुरू कर दिया। मैं श्लोकों का पाठ तब से कर रहा हूं जब वह बहुत छोटा था। मारू ने सब कुछ सुनकर सीखा। वह व्याख्यान रिकॉर्ड करता है और सीखता है।”
(साभार – नवभारत टाइम्स)

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