बंगाल की दुर्गा पूजा को यूनेस्को ने दिया ‘सांस्कृतिक विरासत’ का दर्जा

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कोलकाता : एक ओर जहां भारतीय प्रतिभाएं पूरी दुनिया में अपना परचम लहरा रही हैं, वहीं भारतीय पर्वों को भी अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर ऐतिहासिक और सांस्कृतिक मान्यता मिल रही है। बंगाल में मनाई जाने वाली दुर्गा पूजा को वैश्विक पटल पर एक नई पहचान मिली है। दरअसल, संयुक्त राष्ट्र संघ की कल्चर यूनिट (यूेनेस्को) ने बुधवार को बंगाल की दुर्गा पूजा को मानवता की अमूर्त सांस्कृतिक विरासत की प्रतिनिधि सूची में शामिल करने की घोषणा की। यूेनेस्को ने इस बाबत ट्वीट किया है। वहीं प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने रीट्वीट कर कहा कि यह हर भारतीय के लिए गर्व और खुशी की बात है। दुर्गा पूजा हमारी सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विशेषताओं के सर्वोत्तम पहलुओं पर प्रकाश डालती है। और सभी को कोलकाता में दुर्गा पूजा का अनुभव होना चाहिए।

बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने भी रीट्वीट कर कहा कि यह बंगाल के लिए गर्व का क्षण है। दुनिया भर में हर बंगाली के लिए दुर्गा पूजा एक त्यौहार से कहीं अधिक है। यह एक भावना है जो सभी को एकजुट करती है।और अब दुर्गा पूजा को मानवता की अमूर्त सांस्कृतिक विरासत की प्रतिनिधि सूची में जोड़ा गया है। हम सबके लिए यह खुशी का क्षण है। बता दें कि बंगाल सरकार ने ही यूनेस्को से दुर्गा पूजा को विरासत की सूची में शामिल करने का आवेदन किया था। अब यूनेस्को ने इस आवेदन को स्वीकार कर लिया है। इससे बंगाल की दुर्गा पूजा को विश्व स्तर पर मान्यता मिल गई है।

जानकारी के मुताबिक, अंतर सरकारी समिति के 16वें सत्र में दुर्गा पूजा को यूनेस्को ने इस लिस्ट में शामिल करने की घोषणा की। बता दें कि यूनेस्को ने दुनियाभर की कुछ खास अमूर्त सांस्कृतिक विरासतों की बेहतर सुरक्षा और उनके महत्व के बारे में दुनिया को जागरुक करने के लिए 2008 में अमूर्त सांस्कृतिक विरासत की सूची बनाई थी। दुनिया भर से आए प्रपोजल्स को लेकर यूनेस्को की समिति उनके प्रोजेक्ट्स और प्रोग्राम्स की समीक्षा के बाद इस लिस्ट में शामिल करने पर फैसला करती है। कोलकाता की दुर्गा पूजा को इस बार भारत की ओर से इस लिस्ट के लिए नामांकित किया गया था।

यूनेस्को ने अपनी साइट पर कोलकाता की दुर्गा पूजा को लेकर लिखा, ‘दुर्गा पूजा को धर्म और कला के पब्लिक परफॉर्मेंस के सबसे अच्छे उदाहरण के साथ-साथ सहयोगी कलाकारों और डिजाइनरों के लिए एक बड़े मौके के रूप में देखा जाता है। इसके आगे यूनेस्को की ओर से लिखा गया है, ‘दुर्गा पूजा के दौरान, वर्ग, धर्म और जातीयता का विभाजन टूट जाता है।’ आपको बता दें कि इस सूची में साल 2016 में नवरोज और योग को भी शामिल किया गया था। इसके अलावा 2008 में रामलीला और 2017 में कुंभ मेले को भी इस सूची में महत्वपूर्ण जगह मिली थी।

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