सुशीला बिड़ला गर्ल्स स्कूल में कई कार्यशालाओं ने मार्च को बनाया ‘मैजिकल’

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कोलकाता । सुशीला बिड़ला गर्ल्स स्कूल में छठी से ग्यारहवीं कक्षा की छात्राओं और अभिभावकों के लिए गत 11 मार्च से  25 मार्च तक मैजिकल मार्च नामक कार्यक्रम वर्चुअल प्रणाली से आयोजित किया गया। विभिन्न क्षेत्रों में अपनी पहचान बना चुके लोगों के सहयोग से यह कार्यक्रम हुआ । इनमें नीलांजना दे, वैशाली चटर्जी दत्त, रेशमी बोस, वैशाली शाह, जॉली चंदा, सायंतनी मुखर्जी, त्रिदीबेश दास, अरबिंद प्रधान, इफरा अहमद, शर्मी चक्रवर्ती, पिंटू दास, दीपांशु पॉल जैसी हस्तियां शामिल थीं। कथकली चटर्जी, ऋषभ चटर्जी और क्योशी पारस कुमार मिश्रा भी आयोजन का हिस्सा बने। दरिचा फाउंडेशन जैसे गैर-लाभकारी संगठनों ने भी कार्यशाला संचालित की।

नीलांजना दे ने ब्लैक इज बैक नामक चारकोल कार्यशाला आयोजित की गयी थी। सत्र की शुरुआत कला के माध्यम के रूप में चारकोल पर एक संक्षिप्त जानकारी के साथ हुई। छात्राओं को स्केचिंग के विभिन्न स्वरों और तकनीकों के बारे में बताया गया। वैशाली चटर्जी ने कविता से संबंधित कार्यशाला संचालित की। कविता की विभिन्न बारीकियों के बारे में बात की गई और छात्रों को यूट्यूब पर कई कविताओं को सुनाया गया और रिसोर्स पर्सन ने सिल्विया प्लाथ की कविताओं को पढ़ा।

बेसिक फन एक्टिंग स्किल यानी अभिनय को लेकर एक कार्यशाला रेशमी बोस द्वारा ली गयी। कार्यशाला ने छात्रों को कुछ शारीरिक गति प्रदान की और नाटक के 6 मुख्य तत्वों को प्रदर्शित किया और छात्राओं को अभिनय दिखाने का मौका मिला। वैशाली शाह ने शेफ विशाल कश्यप के साथ पाककला से सम्बन्धित जानकारी दी। यहाँ उन्होंने माता-पिता के साथ पांच पोषक तत्वों से भरपूर भोजन तैयार किया। इसमें पनीर सॉस के साथ इतालवी पास्ता सलाद, मल्टीग्रेन चिकपी सैंडविच और कई अन्य खाना पकाने और खाना सहेजकर रखने से जुड़े टिप्स दिये। जॉली चंदा द्वारा आयोजित कार्यशाला में मेकअप, त्वचा और बालों की देखभाल से संबंधित टिप्स और ट्रिक्स दिए गये । उन्होंने न केवल मेकअप एवं आहार का ध्यान रखने के लिए सभी को प्रोत्साहित किया।
त्रिदीबेश दास, अरबिंद प्रधान और दरिचा फाउंडेशन द्वारा आयोजित एक सत्र भी आयोजन का हिस्सा था। यह पश्चिम बंगाल के विभिन्न लोक कला रूपों को समर्पित था। सत्र की शुरुआत बेनी पुतुल नाच के प्रदर्शन और कठपुतली बनाने और कठपुतली बनाने की कला पर चर्चा हुई। इसके बाद उत्तर बंगाल की लोक कलाओं पर बात की गयी। त्रिदीबेश दास ने भारत भर में विभिन्न लोक कला रूपों और गीतों के साथ प्रयोग किए जाने वाले विभिन्न वाद्ययंत्रों की जानकारी दी । अरबिंद प्रधान ने गीतों के साथ लयबद्ध संगत के रूप में उपयोग किए जाने वाले विभिन्न ताल वाद्यों का प्रदर्शन किया।
इफरा अहमद ने खेल से जुड़े पोषण और पौष्टिक आहार पर बात की। बढ़ते बच्चों के लिए स्पोर्ट्स न्यूट्रीशन यानी खेल पोषण नामक एक कार्यशाला का आयोजन किया। सत्र में बच्चों को स्वस्थ विकास, आवश्यक सही पोषण एवं व्यायाम के महत्व से अवगत करवाया गया। शर्मी चक्रवर्ती ने सिंग अलॉन्ग का आयोजन किया जिसमें दुनिया भर के विभिन्न संगीत वाद्ययंत्रों और विभिन्न संगीत शैलियों पर चर्चा की गई। संगीत की पूर्वी और पश्चिमी विधाओं में विभिन्न स्वरों और पैमानों का प्रदर्शन किया गया। छात्रों को राग और पैमाने परिवर्तन के साथ गाने के लिए कहा गया।
एनिमल फ्लो का संचालन पिंटू दास द्वारा किया गया था जहां एनिमल फ्लो और पश्चिमी समकालीन नृत्य के संयोजन पर सत्र आयोजित किया गया था। दीपांशु पॉल ने डांस थ्रू लाइफ नामक एक कार्यशाला का आयोजन किया जहां उन्होंने दैनिक जीवन में अभिव्यक्ति के बारे में ज्ञान साझा किया और छात्रों को नौ भाव प्रदर्शित किए।
क्योशी पाराश कुमार मिश्रा ने आत्मरक्षा कार्यशाला का संचालन किया जो हाइब्रिड मोड में छात्रों को कुछ अप्रत्याशित परिस्थितियों के लिए तैयार करने के लिए आयोजित किया गया था जहां वे अपना बचाव कर सकते थे। लड़कियों को आत्मरक्षा के गुर सिखाए गए और स्कूल बैग, किताबें, कलम, दुपट्टा आदि का इस्तेमाल करते हुए कराटे की चालें सिखाई गईं।
डिजी स्मार्ट का संचालन कथकली चटर्जी और ऋषभ चटर्जी ने किया। मुख्य हार्डकोर विषयों का अध्ययन करने से लेकर डिजिटल मार्केटिंग पर काम करना, बताया गया। उन्होंने विभिन्न संस्थानों के नाम भी साझा किए जो छात्रों को विज्ञापन और मार्केटिंग करने में मदद कर सकते हैं।
सुशीला बिड़ला गर्ल्स स्कूल की शिक्षिकाओं जैसे सायंतनी मुखर्जी, लिपिका मलिक, जयती भट्टाचार्य और रूमा चक्रवर्ती ने ज़ुम्बा, रिसाइकल्ड आर्ट, ओरिगेमी पर कार्यशालाएँ आयोजित कीं। यह कार्यशाला अभिभावकों और छात्रों के लिए बेहद समृद्ध साबित हुई।

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