अब डॉलर नहीं बल्कि रुपये में होगा आयात-निर्यात : आरबीआई

नयी दिल्ली । भारतीय रिजर्व बैंक ने एक ऐसा फैसला किया है, जिससे भारत को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनने में सबसे बड़ी मदद मिलेगी। भारतीय रिजर्व बैंक ने बैंकों को निर्देश दिया है कि वह भारतीय मुद्रा यानी रुपये में आयात-निर्यात के निपटारे का इंतजाम करें। केंद्रीय बैंक ने यह कदम वैश्विक कारोबारी समुदाय की बढ़ती दिलचस्पी को देखते हुए उठाया है। भारतीय रिजर्व बैंक के इस कदम के बाद अब लोग यह सोच रहे हैं कि इससे भारत को क्या फायदा होगा? सवाल ये भी है कि क्या इससे आम आदमी को कोई फायदा होगा? आइए जानते हैं।
डॉलर पर घटेगी भारत की निर्भरता
अभी तक आयात-निर्यात के लिए भारत समेत अधिकतर देश डॉलर पर निर्भर हैं। यानी अगर उन्हें किसी दूसरे देश से कुछ खरीदना है या बेचना है तो उन्हें डॉलर में भुगतान करना होता है। अमेरिकी डॉलर दुनिया की सबसे ताकतवर करेंसी है। कुल वैश्विक व्यापार में इसकी हिस्सेदारी करीब 80 फीसदी है। इसका मतलब है कि वैश्विक कारोबार का 80 फीसदी से ज्यादा ट्रांजेक्शन डॉलर में होता है। इसीलिए इसे दुनिया की सबसे ताकतवर करेंसी माना जाता है। जब रुपये में अंतरराष्ट्रीय ट्रेड होने लगेगा तो इससे डॉलर पर हमारी निर्भरता घटेगी।
अमेरिका के दबाव में नहीं रहेगा भारत!
जब भारत की डॉलर पर निर्भरता घटेगी तो अमेरिका से किसी तनाव की स्थिति में भी भारत को अधिक डरने की जरूरत नहीं होगी। जब रूस ने यूक्रेन पर हमला किया तो सबसे पहले अमेरिका ने उस पर डॉलर में ट्रेड करने पर प्रतिबंध लगा दिया। इसकी वजह से रूस को अंतराष्ट्रीय ट्रांजेक्शन करने में थोड़ी दिक्कत हुई, लेकिन वह पहले से ही अपनी करंसी रूबल में कई अंतरराष्ट्रीय ट्रांजेक्शन करने लगा था, इसलिए उस पर अमेरिका का ज्यादा दबाव नहीं बना। भारत की भी अपनी करंसी अंतरराष्ट्रीय ट्रेड के लिए इस्तेमाल होगी तो भारत को अमेरिका से तनाव की किसी स्थिति में दिक्कतों का सामना नहीं करना पड़ेगा।
आम आदमी को कैसे होगा फायदा?
रुपया अंतरराष्ट्रीय ट्रेडिंग में इस्तेमाल होने से आम आदमी को कई तरह से फायदा होगा। सबसे बड़ा फायदा तो यही होगा कि कई प्रोडक्ट सस्ते हो सकते हैं। जैसे कुछ ही महीनों पहले रूस ने भारत को सस्ता कच्चा तेल ऑफर किया था। यानी पेट्रोल-डीजल के दाम कम हो सकते थे। हालांकि, भारत की निजी कंपनियों ने इसे अपने फायदे के लिए इस्तेमाल किया और निर्यात पर ज्यादा जोर दिया। ये तो सिर्फ एक उदाहरण था। भारत और अन्य देशों के बीच सिर्फ कच्चे तेल ही नहीं, बल्कि खाने के तेल, ड्राई फ्रूट्स, गैस, कोयला, दवाएं समेत कई चीजों का व्यापार होता है। कई बार तो प्याज भी आयात किया जाता है। रूपये में ट्रेड होने से एक्सचेंज रेट का रिस्क नहीं रहेगा और कारोबारी बेहतर बार्गेनिंग करते हुए सस्ते में डील फाइनल कर सकते हैं, जिससे आम आदमी तक वह सामान सस्ते में पहुंच सकेगा।
अपनी करंसी में अंतरराष्ट्रीय ट्रेड के फायदे
इसका एक फायदा तो ये है कि अगर किसी देश की करंसी में अंतरराष्ट्रीय ट्रेड होता है तो इससे निर्यातकों को बड़ा फायदा होता है। उन्हें एक्सचेंज रेट रिस्क कम करने में मदद मिलती है। इसका सबसे बड़ा फायदा उन प्रोडक्ट्स में होता है, जिनका भुगतान सामान का ऑर्डर मिलने के काफी समय बाद होता है। इतने दिनों में डॉलर से एक्सचेंज रेट घटने-बढ़ने का निर्यातकों पर बड़ा असर होता है। वहीं दूसरा फायदा ये है कि रुपये में अंतरराष्ट्रीय ट्रेडिंग से एक्सचेंज रेट के रिस्क के बिना ही भारतीय फर्म और वित्तीय संस्थान अंतरराष्ट्रीय वित्तीय बाजारों तक पहुंच बना सकेंगे। साथ ही उन्हें सस्ती दरों पर और बड़े पैमाने पर उधार लेने की इजाजत मिलेगी।

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