राजमहल की पहाड़ियों में छुपा है जुरासिक काल का इतिहास

साहेबगंज । दुनिया के सबसे प्राचीनतम जीवाश्म (फॉसिल्स) झारखंड में साहेबगंज जिले के राजमहल पहाड़ियों में मौजूद हैं। जिले के मंडरो प्रखंड के तारा पहाड़ में आज भी पादप जीवाश्म के कई जीवंत उदाहरण मौजूद हैं। यहां हजारों वर्ष पहले बड़-बड़े हरे-भरे पेड़ हुआ करते थे, जो आज पत्थर के बन गए हैं। इसे देखने और शोध करने वाले भूगर्भशास्त्र के स्टूडेंट हर वर्ष यहां आते रहते हैं। राज्य सरकार की ओर से फॉसिल्स को सुरक्षित और संरक्षित करने के साथ ही शोध को बढ़ावा देने की भी कोशिश की जा रही है। करोड़ साल पुराने जीवाश्म पूरे संताल परगना में फैला हुआ है, लेकिन मंडरो तारा पहाड़ी, गुरमी, बसकोबेड़ो, राजमहल, तालझारी, सकरिगली, ललमटिया, अमरापाड़ा, मिर्जाचौकी, काठीकुंड बरसलोई नदी के किनारे अब भी फॉसिल्स मिलते हैं। जानकारों का मानना है कि राजमहल पहाड़ी श्रृंखला में अवशेषों के भंडार पड़े हुए है। यहां मंडरों के तारा पहाड़ पर कई पादप जीवाश्म अब भी जीवंत उदाहरण है। इसे देखते हुए सरकार की ओर से फॉसिल्स पार्क बनाया गया है, ताकि इन जीवाश्मों के विषय में दुनिया को जानकारी मिल सके। जानकार बताते है कि राजमहल पहाड़ी क्षेत्र में में जीवाश्म के अलावा कई औषधि भी मौजूद हैं। दवाईयां बनाने के लिए इन पहाड़ियों से जड़ी-बुटी लेने लोग पहले काफी संख्या में आते थे।
हिमालय से पुरानी फॉसिल्स की उम्र 68 से 280 मिलियन वर्ष
हिमालय से भी 500 करोड़ पुरानी राजमहल पहाड़ियों में जुरासिक काल के अनगिनत जीवाश्म मौजूद हैं। भूगर्भ शास्त्रियों और पुरा-वनस्पति विज्ञानियों ने इन फॉसिल्स की उम्र 68 से 280 मिलियन वर्ष आंकी है। कई रिसर्च में यह बात सामने आई है कि यह एक बड़ा समुद्रीय प्रक्षेत्र था। बाद में ज्वालामुखी विस्फोट की कई घटनाओं ने यहां के जियोलॉजिकल स्ट्रक्चर और इकोलॉजी को बदल डाला। राजमहल की पहाड़ियों का निर्माण इसी भू-गर्भीय उथल-पुथल से हुआ। भूगर्भशास्त्रियों का मानना है कि अगर पूरे इलाके में वैज्ञानिक तरीके से खुदाई की जाए, तो डायनासोरों के अस्तित्व से जुड़े कई रहस्यों को डिकोड किया जा सकता है।
वैज्ञानिक और विशेषज्ञों का कहना है कि साहेबगंज जिले में प्लांट्स फॉसिल्स अध्ययन से पर्यावरण के फ्यूचर प्लानिंग में बड़ी मदद मिलेगी। रिसर्च से क्षेत्र में मौजूद प्राकृतिक संपदा और संसाधन के बारे में भी जानकारी मिल पाएगी।

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