6 दशक में नगालैंड की दूसरी महिला सांसद बनीं फांगनोन कोन्याक

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 छात्र राजनीति से बढ़ीं आगे
कोहिमा । आजादी के 75 सालों में संसद के दोनों सदनों में महिलाओं की तादाद बढ़ी है, लेकिन पिछले दिनों राज्यसभा में देश के सुदूर नगालैंड से आने वाली महिला ने जब सदन की सदस्यता ली, तो वह अपने आप में इतिहास बन गया। दरअसल, लगभग छह दशक के नगालैंड के इतिहास में एस फांगनोन कोन्याक राज्य की दूसरी ऐसी महिला बनीं, जिन्होंने देश के लोकतंत्र की सबसे बड़ी पंचायत संसद में अपनी मौजूदगी दर्ज कराई।
इससे लगभग साढ़े चार दशक पहले 1977 में रानो एम शाजा लोकसभा के लिए चुनी गई थीं। नगालैंड में महिलाओं के लिए यह छलांग कितनी अहम है, यह बात इसी से समझ में आती है कि वहां अभी तक कोई महिला विधायक तक नहीं बन पाई है। कोन्याक को भाजपा ने राज्यसभा तक पहुंचने का मौका दिया। कोन्याक नगालैंड की भाजपा महिला मोर्चा की अध्यक्ष हैं।

पारंपरिक वेशभूषा में शपथ लेने पहुंची
कोन्याक एक तरह से निर्विरोध ही राज्यसभा पहुंचीं। उनके सामने किसी ने पर्चा ही नहीं भरा था। कोन्याक हाल ही में संपन्न बजट सत्र के आखिरी हफ्ते में अपनी परंपरागत वेशभूषा में सदस्यता की शपथ लेने राज्यसभा पहुंची थीं। मीडिया से बातचीत में उन्होंने कहा था कि उनकी पारंपरिक वेशभूषा और संस्कृति उन्हें संसद के भीतर अपने लोगों की आवाज उठाने की हिम्मत और प्रेरणा देगी।

छात्र राजनीति से शुरुआत
कोन्याक ने सक्रिय राजनीतिक जीवन की शुरुआत छात्र राजनीति से की। राजनीति के अलावा, वह सामाजिक क्षेत्र में भी सक्रिय हैं। 2017 में वह भाजपा से जुड़ीं और कई भूमिकाओं में संगठन के लिए काम किया। 2020 में उन्हें राज्य में महिला मोर्चा को जमीनी तौर पर मजबूत करने की जिम्मेदारी सौंपी गयी।

मोन जिले से आती हैं कोन्याक
44 वर्षीय कोन्याक नगालैंड के मोन जिले से आती हैं। उन्होंने दिल्ली यूनिवर्सिटी से 2002 में इंग्लिश लिटरेचर में एमए किया था। इससे पहले उन्होंने दीमापुर के होली क्रॉस हायर सेकेंडरी स्कूल से स्कूलिंग की थी। गौरतलब है कि कोन्याक मोन जिले के उसी गांव ओटिंग से आती हैं, जहां बीते दिसंबर में हुए एक हादसे में स्थानीय आदिवासी मारे गए थे। कोन्याक भी उसी आदिवासी समुदाय से आती हैं। कोन्याक का कहना है कि उनकी प्राथमिकता में अगले साल नगालैंड में होने वाले चुनाव हैं, जहां उनकी पूरी कोशिश रहेगी कि वह अपने प्रदेश की महिलाओं को जीत दिलवा कर उनमें असेंबली पहुंचने का हौसला भर सकें।

 

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