75 लाख कामगारों में हैं अधिकांश महिलाएं, सर्वे के बाद वेतन, पीएफ और छुट्टी पर निर्णय

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नयी दिल्ली : केंद्र सरकार घरेलू सहायकों के आंकड़े जुटाने के लिए पहली बार पूरे देश में सर्वे करा रही है। श्रम मंत्रालय सर्वे के जरिए घरेलू सहायकों की स्थिति, वेतन के तरीकों से लेकर उनके रहन-सहन आदि का पता करेगा। ई-श्रम पोर्टल के मुताबिक, 8.56 करोड़ रजिस्टर्ड असंगठित श्रमिकों में 8.8 फीसदी (75.33 लाख) घरेलू सहायक हैं, जिनमें से अधिकांश महिलाएं हैं। 22 नवंबर से शुरू हुए सर्वे में सभी तरह की घरेलू सेवाओं जैसे रसोइया, ड्राइवर, घर की देखभाल, ट्यूशन शिक्षक (बच्चों के लिए) और चौकीदार आदि को शामिल किया जाएगा। यह सर्वे देश के सभी राज्यों के 700 से ज्यादा जिलों में किया जाएगा। सर्वे के तहत राज्यों और केंद्र के स्तर पर घरेलू सहायकों की संख्या का पता लगाना है। इसके अलावा जिन घरों में वह काम करते हैं, वहां रहते हैं या बाहर रहते हैं। काम करने वालों में कितने संगठित रोजगार के तहत आते हैं, कितने असंगठित क्षेत्र में रोजगार कर रहे हैं।

मिल सकता है पीएफ, काम के घंटे-छुट्टी होगी तय!
सर्वे के बाद घरेलू सहायकों की स्थिति का पता लगने के बाद उनके लिए कई अहम योजनाएं बन सकती हैं। इसके तहत लेबर कोड के आधार पर श्रमिकों के काम के घंटे, न्यूनतम वेतन, साप्ताहिक छुट्टी, पीएफ खाते जैसे कई अहम सुविधाएं शुरू हो सकती हैं। फिलहाल मेट्रो सिटी और कस्बों में घरेलू सहायकों के लिए न्यूनतम मजदूरी का प्रावाधान नहीं है।

दक्षिण भारत के राज्यों में मिलती हैं कई सुविधाएं
सेल्फ एम्प्लॉइड वुमन एसोसिएशन के एक सर्वे के अनुसार पिछले एक दशक में भारत में घरेलू सहायकों की संख्या में लगातार वृद्धि हो रही है। इसके मुताबिक देश भर में लगभग 26 लाख महिला घरेलू सहायिकाएँ हैं। इतनी बड़ी कामगार आबादी को कई तरह की चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। घरेलू सहायकों के लिए कोई भी सरकारी योजना नहीं है। हालांकि महाराष्ट्र और तमिलनाडु जैसे राज्यों में इनके लिए कई बड़े एसोसिएशन हैं जो इनके अधिकारों के लिए काम करते हैं। दिल्ली में घरेलू सहायकों के लिए कोई न्यूनतम मजदूरी तय नहीं है, जैसा कि केरल, कर्नाटक और तमिलनाडु में है। सर्वे में यह भी पता लगाना है कि कामगारों में कितने प्रवासी हैं और कितने गैर-प्रवासी हैं। इसके अलावा उनका वेतन क्या है। उन्हें वेतन किस तरह मिलता है। उनकी सामाजिक और आर्थिक स्थिति क्या है, उसके आंकड़े एकत्र करने हैं।

कई तरह के भेदभाव की शिकार होती हैं घरेलू सहायिकाएँ
नेशनल डोमेस्टिक वर्कर्स मूवमेंट की को-ऑर्डिनेटर सुनीता विश्वास बताती हैं कि घरेलू सहायिकाओं के साथ गाली-गलौज, मानसिक, शारीरिक एवं यौन शोषण, चोरी का आरोप, घर के अंदर शौचालय आदि का प्रयोग न करने, इनके साथ छुआछूत करना, खाने-पीने के लिए अलग बर्तन देने जैसी चीजें सामने आती हैं। हमारे देश में घरेलू सहायकों ​​​​​​​ को आमतौर पर नौकर और नौकरानी कहा जाता है।

केंद्र ने कानून तय किए, राज्यों ने नहीं किए लागू
पटियाला हाउस कोर्ट के वकील महमूद आलम का कहना है कि डोमेस्टिक वर्कर्स एक्ट, 2008, यह कानून पहले से देश में लागू है लेकिन कुछ व्यवहारिक दिक्कतों के चलते इसमें बाधाएं आती हैं। यह कानून पूरी तरह से राज्यों पर निर्भर है और इस पर केंद्र की अधिसूचना अभी तक लटकी है। इस कानून के तहत सेंट्रल एडवाइजरी कमेटी, स्टेट एडवाइजरी कमेटी और डिस्ट्रिक्टर बोर्ड को नियम लागू करने का अधिकार दिया गया है। इस कानून के मुताबिक, 18 साल से 60 साल तक के घरेलू सहायक को 12 महीने में 90 दिन तक लगातार काम कर लेने पर उसका रजिस्ट्रेशन किया जा सकता है। इस कानून में वेतन सहित अवकाश, रजिस्टर्ड नौकर के लिए पेंशन, मैटरनिटी लीव जैसी सुविधाओं का प्रावधान है। साथ ही, साल में 15 दिन की छुट्टी भी देने का नियम है। कामगारों का शोषण या उत्पीड़न होने पर जुर्माना सहित कारावास की सजा का नियम है। नियम को लागू कराने के लिए डिस्ट्रिक्ट बोर्ड बनाने का नियम है जो कानून को लागू कराएगा और घरेलू कामगारों से जुड़ी शिकायतों का निपटारा करेगा।

सरकार ने बनाए हैं पेंशन के नियम
प्रधानमंत्री श्रम योगी मानधन योजना के तहत सरकार ने असंगठित क्षेत्र में काम कर रहे लोगों के लिए हर महीने 3000 रुपये की पेंशन देने का प्रावधान किया है। इस पेंशन योजना में कामगार को 100 रुपये प्रति माह का योगदान करना होगा वहीं इतना योगदान केन्द्र सरकार करेगी। इस योजना का लाभ उन लोगों को मिलेगा जिनका वेतन 15000 रुपये से कम है। इस योजना के तहत ड्राइवर, प्लंबर, इलेक्ट्रीशियन और घरेलू नौकरानी आदि को भी पेंशन मिल सकेगी। असंगठित क्षेत्र में काम कर रहे व्यक्ति को 60 साल के बाद इस योजना के तहत पेंशन मिलेगी। इसके तहत असंगठित क्षेत्र के 10 करोड़ कामगारों को रिटायरमेंट के बाद एक न्यूनतम पेंशन की गारंटी दी जाएगी। सरकार इस योजना को लागू करने के लिए काम कर रही है। इस योजना को बैंक से लिंक किया जाएगा, जिसमें इंश्योरेंस प्रीमियम की तरह एक सुनिश्चित समय पर हर साल अपने पेंशन के पैसे जमा करने होंगे जिसका फायदा घरेलू सहायकों को सेवानिवृत्ति के बाद मिलेगा।

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