अपनी चाल पे

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निष्ठा बिंद्रा

लोग कहते है……
और कहते ही रहते है।
कभी गलतियां
कभी गलतफहमियां…..
कभी अफवाहें…..
कभी बिन माँगी सलाह।
काम है उनका कहना
पर अपनी धुन में चलना
कर्म है अपना…..
सुनती सबकी हूँ मैं
पर मानती अपनी हूँ मैं
हर ज़िम्मेमदारी याद है….
पर आपने हक से भी मुझे प्यार है.. .
जब तक न रुकूंगी….
किसी के रोके….
तब तक जीयूँगी…..
बिना किसी धोखे के…..
तो रहने दो मुझे अपने हाल पे…
खुश हूँ मैं जनाब अपनी चाल पे….

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