अपने सारे सपने पूरे कर रही हैं आज की बुजुर्ग महिलाएं

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रेखा श्रीवास्तव

आधुनिकता और मोबाइल युग में हमारे समाज की बुजुर्ग महिलाओं ने भी स्वयं को बहुत बदल लिया है। अब वह बुढ़ापे को बहुत ही अच्छे से बिता रही हैं। पूरे उत्साह और आनंद से अपना समय गुजार रही हैं। चाहे गृहिणी हो या रिटार्यड, अब वह बुढ़ापे का रोना नहीं रोती, बल्कि अपने सपने को पूरा करने का अच्छा समय समझ रही हैं। अच्छी जिंदगी जी रही हैं। इसमें इनको बच्चों का भी पूरा सहयोग मिल रहा है। कोलकाता के सॉल्टलेक, न्यूटाउन इलाके में आपको ऐसी बहुत बुजुर्ग महिलाएं दिख जायेंगी जो बहुत खुशी-खुशी अकेले रह रही हैं और अपनी जिंदगी के इस पड़ाव का आनंद ले रही है। उनके बच्चे अलग रहते हुए भी अपनी माँ का पूरा ख्याल रखते हैं। इनके बारे में सुनने और दूर से देखने पर बहुत अजीब सा लगता है। लेकिन जब आप इन महिलाओं से बातचीत करेंगे और उनके इस व्यवस्था में उनको खुश देखेंगे तो आपको यह व्यवस्था अच्छी लगेगी। इस बाबत मैंने बहुत सी बुजुर्ग महिलाओं से बातचीत कीं। उनकी खुशी देख मुझे भी बहुत खुशी हुई। जब मैं न्यूटाऊन में रह रही रीता सामंत से बातचीत की, तो वह बोली मैं खुद को अपनी स्थिति के अनुसार बदल लेती हूँ। एक समय था जब परिवार में बहुत सदस्य थे, घर की जिम्मेदारी थी। मैं पूरी तरह से उसमें रम गई थी। बेटी को पढ़ाने के लिए भी बहुत मेहनत की। लेकिन अब जब हमारे पति शिशिर सामंत नहीं रहे, और हमारी बेटी विदेश में अपनी जिंदगी जी रही है। तो मैं कोलकाता के फ्लैट में खुशी-खुशी रह रही हूँ। मुझे बचपन से पढ़ने, गाना गाने का बहुत शौक था, लेकिन परिवार की जिम्मेदारी के कारण मैं नहीं कर पा रही थी।

अब मेरे पास बहुत समय है, इसलिए मैं अपने सारे शौक को पूरा कर पा रही हूँ। बेटी विदेश में रहते हुए भी, मेरे लिए सारी व्यवस्था की हुई है। मैं अकेलेपन को बोझ नहीं समझती, बल्कि अपने समय का सदुपयोग कर रही हूँ। उन्होंने बताया कि वह अकेले सफर कर लेती हैं, और अभी कुछ दिन पहले ही वियतनाम में रह रही बेटी के यहाँ से लौटी हैं। वहीं बीएसएनएल से रिटार्यड हुई सीमा जी ने बताया कि उनका बेटा-बहू साल्टलेक में रहते हैं। पति अब इस दुनिया में नहीं है। वह कोलकाता के न्यूटाउन इलाके में एक छोटा सा फ्लैट खरीदकर अपने मनमुताबिक जिंदगी जी रही है। वह कभी-कभार बेटे के यहाँ चली जाती हैं और वो लोग भी माँ के पास आते रहते हैं। उन्होंने कहा कि हम चाहते तो साथ में भी रह सकते थे, लेकिन आपस में रहकर मनमुटाव हो सकता था, इसलिए हमलोगों ने मिलकर यह फैसला लिया और हमलोग अपने फैसले पर बहुत खुश है। वहीं 90 वर्षीय मासी माँ (सभी इसी नाम से पुकारते हैं) अपने पाँच-पाँच बच्चों को पढ़ा-लिखा कर अच्छी जिंदगी जीने के लायक बनाईं। सभी अच्छे पद पर कार्यरत हैं। मासी माँ और उनका छोटा बेटा एक कॉम्लेक्स में रहते हैं। बेटा-बहू एक फ्लैट में और मासी माँ अपने पति के साथ दूसरे फ्लैट में रहती हैं। कई साल पहले उनके पति का देहांत हो गया। अब वह अकेले ही रह रही है। बहू दोनों समय का खाना बना कर दे देती हैं। बेटा घर की व्यवस्था कर देता हैं। घर में काम करने के लिए और मासी माँ की देखभाल के लिए एक आया की भी व्यवस्था की गई है। मासी माँ दिन में अखबार-किताबें पढ़कर समय बिताती है। वह साहित्य, राजनीति में घंटों चर्चा कर सकती हैं, पर पिछले कई महीनों से उनका स्वास्थ्य बहुत अच्छा नहीं रह रहा है, लेकिन फिर भी अपनी दिनचर्या में बहुत व्यस्त रहती है और अपनी जिंदगी से पूरी तक संतुष्ट है। वहीं मुज्जफरपुर की रहने वाली ऋतु अग्रवाल जिसकी कोलकाता में शादी हुई है। वह अकेली संतान है। इसलिए वह अपनी माँ को कोलकाता ले आई है और उनके लिए यहाँ अपने पास ही एक अलग फ्लैट की व्यवस्था कर दी है। बेटी ऋतु अपने ससुराल, नौकरी के साथ-साथ माँ की भी देखभाल कर पा रही है और इस व्यवस्था से माँ-बेटी दोनों बहुत खुश हैं।

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