अब कोलकाता में बच्चों के लिए फन ऐंड लर्न क्लब

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कोलकाता में बच्चों के लिए अपनी तरह का पहला एकीकृत केंद्र है

प्रबीर कानूनगो सेंटर मुंबई के न्यूरोजन ब्रेन ऐंड स्पाइन इंस्टीट्यूट के साथ पश्चिम बंगाल के मरीजों के लिए न्यूरो पुनर्वास थेरेपी करेगा

कोलकाता : महानगर में प्रबीर कानूनगो सेंटर फॉर चिल्ड्रेन सोशलिजेशन (प्रबीर कानूनगो बाल समाजीकरण केंद्र) बंगाल सर्विस सोसायटी, न्यूरोजेन ब्रेन ऐंड स्पाइन इंस्टीट्यूट (मुंबई) और ब्लूमिंग डेल एकेडमी (हाई स्कूल) की एक नयी पहल है। मुख्य रूप से बच्चों के सामाजिक कौशल को विकसित करने पर जोर देनेवाले प्रबीर कानूनगो सेंटर फॉर चिल्ड्रेन सोशलिजेशन (पीकेसी) का उद्घाटन मुम्बई के न्यूरोजेन ब्रेन ऐंड स्पाइन सेंटर के निदेशक व न्यूरोसर्जन डॉ. आलोक शर्मा ने किया। इसके अलावा, इस समारोह में मशहूर अभिनेत्री पापिया अधिकारी, विधायक सुजन चक्रवर्ती, मेयर परिषद सदस्य मेयर देवव्रत मजूमदार, कॉपोर्रेट पब्लिक रिलेशन विशेषज्ञ रीता भिमानी उपस्थित थीं। पीकेसी हमारे देश में अपनी तरह का पहला केंद्र है, जिसका उद्देश्य एक आनंदपूर्ण वातावरण में स्वस्थ संवाद और सामाजिक आदतों का पोषण करना है।

प्रबीर कानूनगो के पुत्र और अध्यक्ष, बंगाल सर्विस सोसाइटी कृष्णेंदु कानूनगो, ने कहा, ‘‘जब हम तेजी से आगे बढ़ रही दुनिया के साथ तालमेल बनाए रखने के लिए भागते हैं, तो हमारे बच्चे अकेलेपन के वातावरण में बड़े हो रहे होते हैं, जहाँ उन्हें केवल सोशल मीडिया और स्मार्ट फोन का साथ मिलता है, इसलिए हम बच्चों में पहले से कहीं अधिक उत्परिवर्तन, अवसाद और आक्रामकता के बारे में सुनते हैं। उन्हें किसी से संवाद करने की आवश्यकता है। अभिभावक बनना कठिन है। ऐसे बच्चे का अभिभावक होना और भी कठिन है, जो अपनी रोजमर्रा की गतिविधियों को सीखने के लिए संघर्ष कर रहा हो या किसी खोल में सिमट गया हो क्योंकि बच्चे के पास संवाद करने के लिए कोई नहीं है। घटनाओं, गतिविधियों, खेलों और वार्तालापों में भागीदारी के साथ-साथ सक्षम चिकित्सक और सामाजिक कार्यकर्ताओं का विश्वास, सहायता और समर्थन, इन बच्चों को एक स्वस्थ बचपन में लाने के लिए आवश्यक है। यह ठीक वही है जो हम पीकेसी में कर रहे हैं।’’

पीकेसी 4 -14 वर्ष के आयु वर्ग के बच्चों को सेवा प्रदान करेगा। केंद्र के दो विंग में गतिविधियों और न्यूरो पुनर्वास उपचारों के माध्यम से सामाजीकरण होंगे। केंद्र के सोशलाइजेशन (समाजीकरण) विंग में पीकेसी द्वारा पेश की जाने वाली गतिविधियों में समूह गेम, फोटोग्राफी, स्टोरी बुक रीडिंग, स्टोरी राइटिंग सेशन, बोर्ड गेम, नेचर वॉक, प्रदर्शन के लिए खुला मंच, हर महीने प्रख्यात व्यक्तियों के साथ बातचीत, बागवानी, पुस्तकालय फिल्म शो, प्रश्नोत्तरी, रचनात्मक पेंटिंग और शिल्प और बहुत कुछ शामिल हैं। सोशलिजेशन विंग की गतिविधियां किसी भी अन्य केंद्र से बहुत अलग और बहुत मामूली शुल्क पर उपलब्ध हैं।

पीकेसी की दूसरी विंग, जो न्यूरोजेन ब्रेन ऐंड स्पाइन इंस्टीट्यूट, मुंबई के विशेषज्ञ मार्गदर्शन में स्थापित की जा रही है, मरीजों के लिए न्यूरो पुनर्वास कार्यक्रम मुहैया करवायेगी, इसके तहत स्पीच थेरेपी, ऑक्यूपेशनल थेरेपी, प्ले थेरेपी, फिजियोथेरेपी, नृत्य और संगीत थेरेपी की पेशकश की जाएगी। पुनर्वास चिकित्सा जो रोगियों के लिए ऑपरेशन के बाद की जानेवाली देखभाल का हिस्सा है, पुनर्योजी चिकित्सा में बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। उपचार को सफल व प्रभावी बनाने में संपोषणऔर पुनर्वास का तालमेल बेहद अहम होता है।

यह परियोजना इस मायने में भी विशिष्ट है कि यह अन्तर्राष्ट्रीय ख्यातिप्राप्त चित्रकार धीरज चौधरी के आवास पर स्थित है। मुम्बई के सायन स्थित एलटीएमजी अस्पताल और एलटीएम मेडिकल कॉलेज के प्रोफेसर और न्यूरोसर्जरी विभाग के प्रमुख और न्यूरोजेन ब्रेन ऐंड स्पाइन इंस्टीट्यूट के निदेशक डॉ. आलोक शर्मा ने कहा, ‘‘ आज तक, ऐसा कोई केंद्र नहीं है, जहां सामाजीकरण को उपचारों के साथ जोड़ा जाता है। इसके अलावा कोलकाता में केवल कुछ ही केंद्र हैं जहां सभी उपचार एक ही छत के नीचे उपलब्ध हैं। बच्चों में ऑटिज्म, सेरेब्रल पाल्सी, मस्कुलर डिस्ट्रॉफी आदि जैसे न्यूरोलॉजिकल विकार बढ़ रहे हैं। अब तक हमने पश्चिम बंगाल के विभिन्न हिस्सों के विभिन्न विकारों से पीड़ित लगभग 350 रोगियों का इलाज किया है। आज बच्चों के लिए एकमात्र साथी स्मार्ट फोन और आईपैड है क्योंकि अधिकांश बच्चों के माता-पिता कामकाजी हैं। यह केंद्र सभी बच्चों को स्वस्थ संवाद और उनके अकेलेपन पर काबू पाने का अवसर देगा। इसके अलावा यह गठजोड़ यहां आने वाले बच्चों के लिए चिकित्सा हस्तक्षेप भी सुनिश्चित करेगा। वहीं इस स्थल पर नियमित अंतराल पर न्यूरोजेन की ओर से मेडिकल ओपीडी भी होगा। पूर्वी भारत में बच्चों और रोगियों के लिए ऐसा एकीकृत केंद्र एक वरदान होगा। हमने जो छोटा-सा सर्वेक्षण किया, उससे हमारे ध्यान में यह बात आई कि न केवल पूर्वी भारत में बल्कि नेपाल, बांग्लादेश और भूटान में भी ऐसे केंद्रों का अभाव है। ’’

बंगाल सर्विस सोसायटी के सचिव प्रदीप्त कानूनगो ने कहा, ‘‘सभी उपचार और गतिविधियां सामाजिक कौशल और व्यक्तित्व विकास के लिए निर्देशित हैं। पीकेसी में हम जो करते हैं उसका केंद्र खेल है। हमारी भूमिका एक उपयुक्त आनंदपूर्ण, देखभालपूर्ण, गर्मजोशी और स्वागत करने वाला वातावरण प्रदान कर बच्चों में मित्रता, कौशल-विकास, रचनात्मकता और खेल के माध्यम से खुलने का अवसर प्रदान करना है। हम एक ऐसा माहौल बनाना चाहते हैं, जिसमें हमारे बच्चे सहज महसूस करें और उनमें आत्मविश्वास, आत्म-सम्मान, सहकारी कौशल और स्वतंत्रता विकसित हो सके। यह हमारे लिए भी बहुत महत्वपूर्ण है कि हमारे बच्चों के परिवार क्लब में सहज महसूस करें, इसलिए हम माता-पिता, देखभाल करने वालों और परिवार के अन्य सदस्यों के साथ अच्छे संबंधों को विकसित करने और बनाए रखने का प्रयास करते हैं।’’

एक अभिभावक के तौर पर हम अपने बच्चों की सीखने की क्षमता को लेकर चिंतित रहते हैं। सीखना एक ऐसी प्रक्रिया है जो बच्चे की वृद्धि और विकास के अनुरूप होती है। इसलिए जब सीखने की क्षमता प्रभावित होती है, तो स्वाभाविक है कि माता-पिता चिंतित होने लगते हैं। यह कोई बीमारी नहीं है और न ही विकलांगता। यह एक न्यूरोलॉजिकल रूप से आधारित वृद्धिगत समस्या है जो पढ़ना, लिखना और अंकगणितीय गणनाओं जैसे बुनियादी शिक्षण कौशल में हस्तक्षेप करती है। उन्हें खुद को व्यवस्थित करने, समय प्रबंधन, अमूर्त सोच और स्मृति में कठिनाई हो सकती है। इस तरह की कठिनाई न केवल शिक्षा में, बल्कि उनके व्यक्तिगत और सामाजिक जीवन में भी समस्याएं पैदा करती हैं, जिससे अलगाव और अकेलापन की समस्या गहराती है। यहां, हम इन बच्चों को न्यूरोजेन ब्रेन ऐंड स्पाइन इंस्टीट्यूट मुंबई के विशेषज्ञ मार्गदर्शन के तहत चिकित्सा का अतिरिक्त समर्थन देते हैं, जिन्होंने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इस क्षेत्र में काम किया है।

न्यूरोजेन ब्रेन ऐंड स्पाइन इंस्टीट्यूट की उप निदेशक डॉ. नंदिनी गोकुलचंद्रन ने कहा, ‘‘ऑटिज्म स्पेक्ट्रम डिस ऑर्डर (एएसडी) बचपन के विकास संबंधी विकारों का एक समूह है,  जिसका वर्णन सामाजिक संपर्क और संचार में समस्याओं के आधार पर किया जाता है, जिसके प्रभाव से व्यवहार में कठोरता और दोहराव की समस्या देखने को मिलती है। ऑटिज्म से पीड़ित बच्चों में मस्तिष्क के कुछ क्षेत्रों की कार्यप्रणाली प्रभावित होती है। इससे समझने, सोचने की क्षमता, भाषण, बातचीत और संचार, खेलने, सीखने और दूसरों से संबंध मजबूत करने में समस्याएं आती हैं। सामान्य शारीरिक उपस्थिति के बावजूद, बच्चे के दैनिक कामकाज प्रभावित होते हैं। माता-पिता या देखभाल करने वाले के रूप में, सभी को अपने बच्चों के लिए उपचार के सभी संभावित विकल्पों की तलाश होती है। ऑटिज्म प्रबंधन के लिए एक बहु-अनुशासनात्मक उपचार दृष्टिकोण की आवश्यकता होती है, जिसमें व्यवहार संबंधी कुछ मुद्दों को नियंत्रित करने के लिए दवाइयों के प्रयोग के साथ-साथ मनोवैज्ञानिक हस्तक्षेप सह व्यावसायिक चिकित्सा, विशेष शिक्षा, भाषण चिकित्सा और फिजियोथेरेपी जैसे नियोजित चिकित्सा कार्यक्रम शामिल होते हैं। न्यूरोजेन प्रत्येक बच्चों के अनुरूप व्यक्तिगत उपचार के साथ ऑटिस्टिक बच्चों की सफलतापूर्वक मदद करने में सक्षम है। इसी तरह, न्यूरोजेन सेरेब्रल पाल्सी, मस्क्युलर डिस्ट्राफी, इंटेलेक्चुअल डिसबिलिटी रीढ़ की हड्डी की चोट जैसे कई अन्य विकारों का इलाज करने में सक्षम है।

सामाजिक विकास बच्चे के समग्र विकास के कई अन्य हिस्सों से जुड़ा हुआ है, यही कारण है कि कम उम्र में अन्य बच्चों के साथ सामाजीकरण शुरू करना महत्वपूर्ण है। सामाजिक मेलजोल युवा बच्चों को स्वयं की समझ विकसित करने में मदद करता है,और यह भी सीखना शुरू कर देता है कि दूसरे उनसे क्या उम्मीद करते हैं।

अन्य बच्चों के साथ खेलकर, वे ऐसे कौशल सीखते हैं जो उनके पूरे जीवन काम आता है। साझा करना, सीमाएं निर्धारित करना, और समस्याओं को हल करने का गुण सामाजीकरण और बातचीत से आता है। बच्चे अन्य लोगों के लिए सहानुभूति रखना सीखते हैं; यह पहचानने लगते हैं कि कब उनके दोस्त उदास, हताश या खुश हैं! बच्चे अंतत: अपने माता-पिता, भाई-बहन, या यहां तक कि पालतू जानवरों के मामले में भी इन कौशलों का उपयोग करने लगेंगे।

 

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