अर्चना संस्था के सदस्यों ने किया हिंदी का वंदन 

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कोलकाता : अर्चना संस्था की ओर से सदस्यों ने विभिन्न भावों की कविताओं, गीतों और दोहों की स्वरचित रचनाओं को सुनाया। साथ ही हिन्दी दिवस के अवसर पर हिंदी पर बहुत सी रचनाओं का पाठ ऑन-लाइन जूम पर किया। कहीं प्रेम के तराने,कहीं जीवन के अफसाने, हिन्दी भाषा का गुणगान, भारतीयता का अभिमान, गरीबी के शोले, आतंकी गोले, आत्ममंथन और विकृत जीवन के विभिन्न पहलुओं, प्रश्नों की चुभन ,कहीं हिंदी की सौतन, कहीं बुजुर्गों की दास्तां, कहीं प्रगति का रास्ता,रंग बिरंगे शब्दों से भरपूर सदस्यों ने रचनाओं की प्रस्तुति दी। डॉ वसुंधरा मिश्र – तुम्हारा सुंदर चेहरा उभर उठता है, मेरे मित्र मैं सुखी हूँ, हिम्मत चोरड़़िया ने दोहे –
माता अपनी जानकर, नमन करो सौ बार। हिंदी से ही हिंद है, कर लो ये स्वीकार।।, मीना दूगड़ – हिंन्दु है हम हिंदुस्तान हमारा, हिंदी भाषा का है जबरदस्त उजियारा। हिंदी का शब्दकोश शब्द, अर्थ और उसके मायने है जबरदस्त मानो छुपे कई कुबेर के खजाने।, विद्या भंडारी – ऋषियों-मुनियों का भारत एवं किताबों की दुनिया से जब गृहिणी में तब्दील होती जब।मेरे लिए इस घर का मृदुला कोठारी का गीत- एक कोना सुरक्षित कर दो उसे मेरे ही भीतर समाए रंगों से गहरा गहरा रंग दो, नव रतन भंडारी ने हिंदी भाषा के प्रति जागरूक होने से संबंधित कविता सुनाई, भारती मेहता अहमदाबाद से बुजुर्गों पर कविता- सड़क के किनारे धीमे- धीमे सहमा सा चलता हूँ एवं जिस राह से चलती हूँ..और जिन्दगी छलकाए चलती हूँ, उषा श्राफ ने यह जीवन एक प्रश्नावली कविता, सुशीला चनानी ने हिन्दी लगाकर बडी सी बिन्दी इतरा रही हैअंग्रेजी अपनी बांकी अदाओं से गृहस्वामी के ओ लुभा रही है।(हिन्दी पखवाड़े पर), नयनों में नीर हृदय में पीर जमुना के तीर बैठी है एकाकी राधा, राधा अष्टमी पर)गीत कविता , इंदु चांडक ने गीत और कविता कभी प्रश्न कभी उत्तर जीवन/फिर क्यों उलझा रहता है मन, मारो मरो मरो और मारो यह कैसा जीवन मंत्र है, प्रसन्न चोपड़ा ने मैं गरीब का बेटा,सोच रहा हूं लेटा, किस्मत का मारा सब कहते हैं बेचारा आदि सभी सदस्यों की बेहतरीन प्रस्तुतियां रही। मीना दूगड़ ने अपनी रचनात्मक रिपोर्ट दी जो सभी ने सराही। चांडक ने कार्यक्रम का संचालन – संयोजन किया और तकनीकी सहयोग दिया।

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