कर्मयोगी ‘दीपक’ तुमको न भुला पाएंगे

0
267

– अंजू सेठिया

‘दीपक’ की आलोकित लौ हमेशा “जय हो” का उदघोष करती रहेगी l प्रणाम अंजू दी…………. की कोमल आवाज मेरे कानों में, हृदय के तारों में सदा प्रवाहित होती रहेगी।

याद है मुझे उसके साथ बिताए एक एक पल l बात उन दिनों से शुरू हुई करीब सन् 1996 में वह एक छात्र के रूप में मेरे संपर्क आया थाl बिरला हाई स्कूल से भारतीय भाषा परिषद तक। भारतीय भाषा परिषद मे हम दोनो युवा मंच से जुडे थे। वहां काफी कार्यक्रम सफलता पूर्वक आयोजित किये गये । मै आवाक रह जाती यह छोटा बच्चा और इतने गुण। भगवान का उपहार था। सबके काम आना ,निस्वार्थ काम करना आदि आदि क्या लिखूं क्या छोडूँ, किताबे भर जाएगी

उसने बाल्यकाल से ही ‘होनहार विरवान के होत चिकने पात’ को चरितार्थ कियाl अपने स्कूल -जीवन से ही सामाजिक – सांस्कृतिक गतिविधियों में उसकी गहन रुचि रही l भारत विकास परिषद की कोलकाता शाखा के संयोजन में पश्चिम बंगाल प्रांत में सन् 2000 में भारतीय भाषा परिषद में पहली राष्ट्रीय समूह गान प्रतियोगिता के आयोजन को अल्पायु में प्रिय दीपक ने सफल नेतृत्व और निर्देशन प्रदान किया था l करीब 11-12 विद्यालयों ने हिस्सा लिया था l दीपक में किसी भी सामाजिक – सांस्कृतिक – शैक्षणिक कार्यक्रम को सफलतापूर्वक आयोजन और संचालन करने की अद्भुत बहुमुखी प्रतिभा थी l अग्र युवा संगठन के कर्मठ सदस्य थे l कोलकाता के अग्रवाल सेवा समाज ने उसे अग्र गौरव से सम्मानित करके स्वयम् को सम्मानित महसूस किया था l

अपने लघु जीवन काल में आईसीएसआई में विभिन्न दायित्वों को बखूबी संभाला और आईसीएसआई के परचम को और ऊँचा लहराने में कोई कसर नहीं छोड़ी l मेरा मानना है कि हमारे आईसीएसआई ने इस विवेकानंद समान महान विभूति को खोया है l अन्तिम समय तक आईसीएसआई को उन्होंने अपनी मातृ का दर्जा दिया l कहता था कि ये भी मेरी माँ है, जिसके कारण ही मै आज इस योग्य हुआ हैl

जितना लिखा जाए, जितना कहा जाए, कम ही लगेगा l लोग शायद ठीक कहते हैं कि ईश्वर के घर भी ऐसे व्यक्तिव के धनी की सदा कमी रहती है और इसी कारण जल्दी वापस बुला लेते हैंl समय भला कब रुकता है l विधि का विधान अपनी गति से चलता ही रहता है l रंगमंच के कलाकारों की तरह इस नश्वर संसार में हर व्यक्ति को अपना किरदार निभाकर वापस जाना ही पड़ता है परंतु मेरे प्यारे दीपु को अपने जीवन काल में मात्र 43 बसंत ही देखकर इस मकर संक्रांति, 15 जनवरी, 2022 को संसार त्यागना पड़ेगा, ये तो कभी सोचा न था l

होनहार छात्र से लेकर एक कुशल अध्यापक, मार्गदर्शक, सबों के प्रेरणादायक, कर्तव्यनिष्ठ, धार्मिक आस्थावान, परोपकारी, कर्मठ सामाजिक कार्यकर्ता, सुहृदय, मृदुभाषी आदि बहुमुखी प्रतिभा से ओत प्रोत अपने छोटे भाई सीएस दीपक कुमार खेतान के लिए उपर वाले से प्रार्थना करती हूँ कि उसकी पावन आत्मा को अपने श्री चरणों में स्थान दें 🙏💐🙏

Previous articleडार्क एनर्जी टेलीस्कोप ने बनाया ब्रह्मांड का सबसे बड़ा थ्री डी नक्शा
Next articleरिश्तों का बीमा नहीं मिलता
शुभजिता की कोशिश समस्याओं के साथ ही उत्कृष्ट सकारात्मक व सृजनात्मक खबरों को साभार संग्रहित कर आगे ले जाना है। अब आप भी शुभजिता में लिख सकते हैं, बस नियमों का ध्यान रखें। चयनित खबरें, आलेख व सृजनात्मक सामग्री इस वेबपत्रिका पर प्रकाशित की जाएगी। अगर आप भी कुछ सकारात्मक कर रहे हैं तो कमेन्ट्स बॉक्स में बताएँ या हमें ई मेल करें। इसके साथ ही प्रकाशित आलेखों के आधार पर किसी भी प्रकार की औषधि, नुस्खे उपयोग में लाने से पूर्व अपने चिकित्सक, सौंदर्य विशेषज्ञ या किसी भी विशेषज्ञ की सलाह अवश्य लें। इसके अतिरिक्त खबरों या ऑफर के आधार पर खरीददारी से पूर्व आप खुद पड़ताल अवश्य करें। इसके साथ ही कमेन्ट्स बॉक्स में टिप्पणी करते समय मर्यादित, संतुलित टिप्पणी ही करें।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

4 × 5 =