कोरोना और हम

0
68
प्रो. दिलीप शाह

हवा शुद्ध है
लेकिन मास्क आवश्यक है
सड़कें खाली हैं
लेकिन लंबे सफर पर कोई नहीं है
लोगों ने हाथ साफ किए हैं
लेकिन कोई हाथ मिल नहीं रहे हैं
मित्रों के पास बैठने का समय ही समय है
लेकिन एक साथ नहीं मिल- बैठ सकते
खाना बन रहा है भीतर
लेकिन किसी को खाने पर नहीं बुलाया जा सकता
जिनके पास पैसे हैं
लेकिन खर्च करने का कोई रास्ता नहीं
जिनके पास पैसे नहीं है
उनके पास कमाई का कोई जरिया नहीं है
आज हाथों में बहुत समय है
लेकिन अपने सपनों को पूरा करने का कोई रास्ता नहीं है
संसार अपनी संपूर्णता में कुछ भी नहीं है
अपराधी हमारे चारों ओर है
लेकिन उसे देख नहीं पाते
है भी और नहीं भी
प्रश्न बस यही है
– – – या क्या इसका यही उत्तर है
सकारात्मक रहें लेकिन रिपोर्ट नकारात्मक रहें

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

nine − five =