कोरोना महामारी और वैश्वीकरण के बीच हम

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प्रीति साव

कोरोना वायरस जैसी महामारी की शुरुआत दिसम्बर से चीन के वुहान शहर से शुरू हुई लेकिन अब इसका प्रभाव पूरे देश भर में फैल चुका है पूरे विश्व में एक बहुत ही भयावह  परिदृश्य बन गया है ।अब इस संकट की स्थिति में पूरे विश्व को गाँव बना देने की अवधारणा और वैश्वीकरण पर बात होनी लाजिमी है ।इस महामारी ने हमारे वैश्वीकरण को मजबूत किया है या कमजोर कर दिया ,इस पर विचार-विमर्श करना हम सबके लिए जरूरी हैं ।

 

व्यवसाय –  कोरोना महामारी से वैश्वीकरण पर इतना नकारात्मक प्रभाव पड़ा है, जिनके कारण कमजोर होने की तरफ अपने वैश्वीकरण को देख रहे है और इसके साथ ही हम एक विषय पर भी गौर कर सकते है कि भारतीय अर्थव्यवस्था पर इसका असर पड़ा  है। लाॅकडाउन के कारण कितनी कम्पनियाँ बंद कर दी गयी ,कितने लोग बेरोजगार हो गये ।  कोरोना काल में अर्थव्यवस्था में हुई इस हानि का आकलन तो यह समय बीत जाने के बाद ही होगा।

 महिलाएँ – महिलाओं के लिए तो कोरोना उनकी मुसीबतें बढ़ाने वाला ही साबित हुआ है।  इस महामारी से घरेलू हिंसा में भी वृद्धि हुई। जब से यह कोरोना फैला है तब से अब तक इतिहास गवाह रहा है कि युद्ध हो या महामारी हो सबसे ज्यादा महिलाओं को प्रभावित कर रही है, लेकिन यहाँ यह महामारी महिलाओं एवं पुरुषों सभी को प्रभावित कर रहा है । यह कोरोना के कहर में आधी से ज्यादा आबादी संघर्ष कर रही है ।कोरोना के कहर के कारण जहाँ एक ओर इस वायरस को फैलने से रोकने के लिए सोशल डिस्टेसिंग की सलाह दी जा रही है, तो वही दूरी ओर लाॅकडाउन के चलते करोडों लोग अपने घरों में कैद है जिसके चलते घरेलू हिंसा बढ़ती जा रही है ।

अर्थव्यवस्था –  वहीं कोरोना वायरस के दौरान हम आत्मनिर्भर बन रहे हैं ।” प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी ने खुद ऐसे संकेत दिए हैं कि बदलाव आने वाला हैं। हाल ही में उन्होंने देश के सरपंचों से हुई वीडियों कॉन्फ्रेंसिंग को सम्बोधित करते हुए कहा कि कोरोना संकट ने एक नया भारत ऐसा महान देश कई सदियों से यह विचार बना रहा था कि हम आत्मनिर्भर बनें।लेकिन आज यह वायरस के दौरान अर्थव्यवस्था को खड़ा करने के लिए हमें आत्मनिर्भर बनने के लिए प्रेरित  किया हैं। हमारा भारत अब एक नयी दिशा की ओर बढ़ने के लिए तैयार हो रहा हैं।आज जैसे कि चीन की परिस्थिति है, उस आधार पर हम कह सकते हैं कि इस तरह से हमारा भारत नई-नई चीजों का आविष्कार करेंगा और हमारा भारत आगे बढ़ेगा साथ ही साथ आत्मनिर्भर भी बनेंगा ।

श्रमिक –    इस महामारी के आने से प्रवासी श्रमिकों को बहुत कठिन समय का सामना करना पड़ा है। एक जगह से वह दूसरे जगह पलायन कर रहें हैं ,बहुत ही कठिनाइयों के साथ इनका इस समय जीवन व्यतीत हो रहा हैं। जो निवासी ग्रामीण व्यक्ति है, उनको शहरों में इस महामारी के कारण भी कोई साधन या माध्यम उपलब्ध नहीं हो पा रहा है। जिनके कारण उन सभी श्रमिकों को अपने गाँव जाना पड़ा। वह मजदूर जो शहरों से गाँव आ रहे थे। वे अपनी कुछ वस्तुओं को सिर एक बोझ की तरह रख कर कड़कती धूप में नंगे पाँव अपने-अपने गाँव जाने के लिए निकल पड़े।। इन सभी मजदूरों को शहर में लाॅकडाउन होने के कारण उन्हें विभिन्न कठिन परिस्थितियों से जूझना पड़ा।

शिक्षा –  हम सब इस विषय पर भी ध्यान देंगे कि इस महामारी के कारण ऑनलाइन कक्षाएँ शुरू हुईं। एक तरफ हम देखते हैं कि बच्चों के लिए यह खुशी की बात है कि स्कूल बंद है ,स्कूल बंद होने पर भी पढ़ाई चल रही है लेकिन दूसरी तरफ नजर डालें तब यह दिखता है कि बच्चों के लिए कम उम्र से ही चार-पांच घण्टे फोन में लगे रहना बहुत ही घातक साबित हो सकता है आगे चल कर उन सबके मानसिकता पर प्रभाव बुरा पड़ सकता हैं।  इस समय यह वायरस का बहुत अधिक फैल जाने के कारण जो ऑनलाइन कक्षाएँ शुरू हुई है ,वहाँ पाठ्यक्रम से सम्बन्धित सामग्री उपलब्ध नहीं हो पा रही है लेकिन बात यह भी हैं कि स्कूल, काॅलेज बंद है, लेकिन फिर भी बच्चों को इस ऑलाइन माध्यमों से एक लय में रखने के लिए मदद मिल रही हैं । शिक्षकों को घर बैठे पाठ्यक्रम ऑनलाइन माध्यमों से व्यवस्थित करने में दिशानिर्देश दिए जा रहें है। बच्चों को व्हाट्सअप और स्काइप के जरिए वर्कशीट भेजकर बच्चों को होमवर्क दिया जा रहा है। शिक्षक छोटे-छोटे वीडियो बना कर भेज रहे हैं । यह सब जो रहा है, लेकिन इसका भी एक माध्यम है, जो वह है स्मार्टफोन । यह स्मार्टफोन के माध्यम से ही सब सम्भव है,लेकिन एक बात और उन सब बच्चों को सोचिए जिनके पास ऐसा कोई माध्यम उपलब्ध नहीं है, वो सभी अपनी इन कमियों को कैसे पूरा करेंगे । महामारी ने हमारी चुनौतियाँ बढ़ा दी हैं।कुछ माध्यम हैं भी तो वह सबके पास उपलब्ध नहीं हैं ।

वैश्विक सम्बन्ध –   हमारे वैश्वीकरण की संरचना पर ही पूरी दुनिया यानी गरीब से अमीर तक सभी वर्ग निर्भर है। हम कह सकते हैं कि वायरस के कारण वैश्विक स्तर पर  माँग और आपूर्ति पर असर पड़ना स्वाभाविक है । वैश्वीकरण के कई वर्षो बाद तमाम अर्थव्यवस्थाओं के बीच विनिर्माण, व्यापार और पर्यटनके सम्बन्ध मजबूत हुए है। इसका मतलब यह है कि एक हिस्से में उपजा संकट आसानी से हज़ारो मील दूर तक फैल सकता हैं।  अगर इसी तरह इस वायरस से संक्रमित लोगों कि संख्या बढ़ती गई तब हमारे देश के लिए इस महामारी से भी खतरनाक हमारा वैश्वीकरण होगा। “हमारे देश के राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने स्वीकार किया है कि कोरोना के सर्वव्यापक असर के कारण पूरा विश्व समुदाय इस निष्कर्ष पर पहुंच गया हैं कि यदि दुनिया के किसी भी भाग में लोगों के स्वास्थ पर संकट आता हैं, तो उसकी चपेट में पूरा विश्व आ सकता हैं। श्री रामनाथ कोविंद का यह वक्तव्य महत्वपूर्ण है कि स्वास्थ वैश्वीकरण की दिशा में अग्रसर होंगे।” वैश्वीकरण जैसा कि हम कह सकते हैं कि इसका प्रभाव सकारात्मक और नकारात्मक दोनों है। एक व्यक्तिगत स्तर पर और दूसरा मानव के जीवन और जीवन की गुणवत्ता दोनों को प्रभावित करती हैं लेकिन यह कोरोना महामारी वैश्वीकरण के दोनों प्रभावों को कमजोर कर रही है ।

पर्यावरण –  कोरोना काल के  वायरस के पहले जैसी स्थिति थी हमारा पर्यावरण सब कुछ तहस-नहस हो जाता। कोविड-19 के पहले हमारा पर्यावरण बहुत ही प्रदूषित था। चारों तरफ प्रदूषण ही प्रदूषण, वाहनों से निकले धुएं,चिमनियों से अन्य कई चीजों से फैला प्रदूषण हम सब मनुष्यों के लिए बहुत ही घातक साबित होता। कोविड-19 के पहले हम सबको साँस लेने में समस्या होती थी स्वच्छ हवा नहीं मिल पाती थी, यह हम मनुष्यों के स्वास्थ के लिए बहुत ही हानिकारक होता । नदी, झील,तालाब यह सब कोविड-19 के पहले बहुत गंदे और प्रदूषित थे । पशु -पक्षी सब लुप्त हो रहे थे। कोरोना काल का लॉकडाउन न हुआ होता तो हमारी सृष्टि के लिए बहुत ही घातक और भयावह जैसी स्थिति आने वाली होती।

नकारात्मक स्थितियों में   कोविड-19 के आने के बाद जो सकारात्मक प्रभाव पड़ा है ,वह हमारे पर्यावरण के लिए बहुत ही लाभान्वित हैं ।यह कोरोना महामारी दुनिया के लिए विकट परिस्थितियाँ है ही, लेकिन अभी हमारा पर्यावरण जैसा हुआ है ऐसा हो जाना कभी भी अनुमान नहीं लगाया जा सकता था ।इस वक्त इस महामारी के समय हमारा पर्यावरण शुद्ध, स्वच्छ और निखर गया है। लाॅकडाउन होने से हमारा पर्यावरण का स्वच्छ हो जाना,हम सबके लिए खुशी की बात है।जो पक्षियां कुछ समय पहले लुप्त हो चुकी थी, अब उनकी झलक देखने को भी मिल रही है नदी , झील, तालाब का पानी सब इतना स्वच्छ हो गया है कि इनके पानी पीने के योग्य हो चुके हैं । उन चिड़ियों की चहचहाट, हवां का साफ हो जाना ,कोयलों की मीठी-मीठी आवाजे सभी खिल उठी हैं , मानो हमारा प्राकृतिक में एक निखार सा आ गया है ।
“महामारियां तो आयी है,
लेकिन प्रकृति में निखार भी लायी है “

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