कोरोना संक्रमण से लड़ने में 90.4 प्रतिशत कारगर है नोवावैक्स की वैक्सीन

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तीसरे चरण के ट्रायल के नतीजे आए

वॉशिंगटन : नोवावैक्स वैक्सीन के ट्रायल ब्रिटेन में किए गए हैं। यह अलग-अलग वैरिएंट्स से बचाव करने में भी कारगर रही है। अमेरिका की कंपनी नोवावैक्स की बनाई वैक्सीन के तीसरे फेज के ट्रायल के नतीजे आ गए हैं।कंपनी ने सोमवार को बताया कि कोरोना वायरस के खिलाफ यह काफी असरदार साबित हुई है। वैक्सीन ने माइल्ड, मॉडरेट और सीवर डिजीज में 90.4% अंतिम क्षमता दिखाई है। ये ट्रायल ब्रिटेन में किए गए हैं। बेहतर परिणामों की वजह से जल्द ही इस वैक्सीन को आपातकालीन स्थितियों की मंजूरी मिलने की उम्मीद बढ़ गई है। ये वैक्सीन अलग-अलग वैरिएंट्स से बचाव करने में भी कारगर रही है। दुनिया भर में वैक्सीन की कमी की बीच कंपनी ने ये नतीजे जारी किए हैं।
भारत के लिए कितने काम की खबर
नोवावैक्स और भारत की कंपनी सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया ने साल में कोरोना वैक्सीन के 200 करोड़ खुराक तैयार करने का करार किया है। अगस्त में यह सौदा हुआ था। समझौते के मुताबिक, कम और मध्यम आय वाले देशों और भारत के लिए कम के कम 100 करोड़ खुराक का उत्पादन किया जाएगा। अब ट्रायल के नतीजे आने के बाद कंपनी 2021 की तीसरी तिमाही में अमेरिका, यूके और यूरोप में इमरजेंसी यूज का अप्रूवल मांगेगी। इस वजह से सितंबर से पहले वैक्सीन मिल पाना मुश्किल है।
बच्चों पर भी टीके का ट्रायल कर रही कंपनी
नोवावैक्स अपनी वैक्सीन के बच्चों पर ट्रायल की शुरुआत कर चुकी हैं। कंपनी ने 12-17 साल उम्र के 3,000 बच्चों पर ट्रायल्स शुरू किए हैं। हालांकि, इसे अब तक किसी भी देश में मंजूरी नहीं मिली है। इसमें शामिल हो रहे बच्चों की दो साल तक निगरानी की जाएगी।
अमेरिका पहले ही कर चुका 12 हजार करोड़ की डील
नोवावैक्स ने अमेरिका को 10 करोड़ डोज देने के लिए करार किया है। यह सौदा 1.6 बिलियन डॉलर (करीब 12 हजार करोड़ रु.) का है। इसके साथ ही ब्रिटेन, कनाडा और जापान के साथ भी टीके की सप्लाई के लिए समझौते किए गए हैं।

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