कोलकाता के साहित्य प्रेमियों का अपना अड्डा सेठ सूरजमल जालान पुस्तकालय

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शुभांगी जायसवाल

कोलकाता और साहित्य का गहर रिश्ता है और बात जब हिन्दी की हो, हिन्दी के प्रहरी की हो तो कुछ ऐसे संस्थान हैं जो दशकों से महत्वपूर्ण काम कर रहे हैं। शुभजिता की कोशिश है कि युवाओं को परम्परा, धरोहर, साहित्य से जोड़ा जाये और पत्रकारिता की मूल अवधारणा से अवगत करवाया जाये। इसके लिए हम अपनी स्टोरीज में युवाओं का साथ लेते हैं और इस बार हमारे साथ हैं शुभांगी जायसवाल। शुभांगी कलकत्ता विश्वविद्यालय की छात्रा हैं और कोलकाता के हिन्दी प्रेमियों के कॉफी हाउस यानी सेठ सूरजमल जालान पुस्तकालय यानी राम मंदिर लाइब्रेरी की जानकारी आपके लिए लायी हैं। तो पुस्तकालय की कहानी, शुभांगी की जुबानी –

मेरा नाम शुभांगी जयसवाल है। में कलकत्ता विश्वविद्यालय की छात्रा हूं। कोलकाता के बड़ाबाजार में स्थित सेठ सूरजमल जालान पुस्तकालय व्यक्तिगत रुप में मेरा प्रिय स्थान है में यहां अकसर प्रात: काल के समय में ही पुस्तक लेने जाती हूं। यहाँ के स्टाफ से मुझे काफ़ी मदद मिल जाती है अपने पसंदीदा किताबों को खोजने में वरना इस पुस्तक के खजानों में से अपने एक किसी पसंदीदा किताब को खोजना आसान नहीं है। स्टाफ का व्यवहार भी मददगार हमारे लिए और मुझे आशा है की आगे भी यह पुस्तकालय ऐसे ही कार्य करते रहे। सेठ सूरजमल जालान पुस्तकालय कोलकाता में स्थित प्रसिद्ध पुस्तकालयों में से एक है। क्योंकि कोलकाता एक अहिंदी भाषी प्रदेश है इस कारण यहां हिन्दी किताबों में रुचि रखने वाले की संख्या कम है इस कारण हिन्दी किताबों की पुस्तकालय कम ही हैं पर दिनोदिन हिन्दी की बढ़ती जरूरत ने इस पुस्तकालय को एक हम महतवपूर्ण साधन के रूप म स्वीकार करते है क्योंकि यह पुस्तकालय न सिर्फ पुस्तकों के माध्यम से छात्र-छात्राओं की जरूरत को पूर्ण करता है बल्कि यह कई सारे साहित्यिक कार्यक्रम या संगोष्ठी आयोजित कर हिन्दी के विकास में एक ऐतिहसिक योगदान भी दे रहा है। यह पुस्तकालय केवल कोलकाता की ही नहीं अपितु पूर्वी भारत के हिन्दी एवं संस्कृत साहित्य के श्रेष्ठतम पुस्तकालयों में से एक है।

यह पुस्तकालय सेठ सूरजमल जालान ट्रस्ट द्वारा संचालित है जिसकी स्थापना 75 वर्ष पूर्व 1941 ई. में सूरजमल जालान स्मृति भवन के अंतर्गत की गयी थी। इस पुस्तकालय में कूल 3307 पुस्तकें संग्रहित हैं। जिसमें हिन्दी के आलावा अग्रेजी, राजस्थानी एवं संस्कृत आदि कई सारे पुस्तकें सम्मलित रुप से यहाँ उपलब्ध है। पाठकों के लिए नियमित रूप से यहां प्रतिदिन 75 पत्र- पत्रिकाएं मंगाई जाती है। जिसमे दैनिक समाचार पत्रों की संख्या 23 साप्ताहिक पत्रिकाएं 17 पाक्षिक पत्रिकाये 12 मासिक पत्रिकाएं 20 तथा की संख्या 3 है। यह पत्रिकाएं वाचनालय के पाठकों की उपयोगिता प्रमाणित करती है। तुलसीदास जयंती के अवसर इस पुस्तकालय में प्रति वर्ष सार्वजनिक आयोजन व्यापक स्तर पर जालान पुस्तकालय की सुदीर्घ परम्परा रही है जिसमें देश के प्रतिष्ठित मनीषियों, तुलसी साहित्य के मर्मज्ञों, विद्वानों एवं साहित्यकारों ने अपने ओजस्वी तथ्यपरक व्याख्यान से हमें ज्ञानार्जन किया है। जिसमे से पण्डित सकल नारायण शर्मा, डॉ रामविलास शर्मा, प. श्याम नारयण पांडेय, डॉ हरिवंश राय बच्चन, डॉ. शिवमंगल सिंह सुमन आदि। तुलसी जयंती के अतिरिक्त यहां और भी कई संगोष्ठी – समारोह सफतापूर्वक आयोजित किए जाते है।
जालान पुस्तकालय न सिर्फ साहित्यिक ग्रंथो का भवन है बल्कि इस पुस्तकालय ने कई सारी पुस्तकें भी प्रकाशित की है।
वर्तमान समय मे पुस्तकालय मे कुल 1550 सदस्यों की संख्या में मौजूद है जिसमें से आजीवन 424 तथा साधारण 1123 है। पुस्तकालय के वाचनालय में प्रतिदिन 200 पाठक नियमित आते रहते है। यहां शोध विद्यार्थी और बाल साहित्य से जुड़ी चीज़े भी उपलब्ध है।
हमें आशा है की आने वाले दिनों में यह पुस्तकालय सत्- प्रतिशत शिक्षार्थियों और हिन्दी के विकास में उपयोगी सिद्ध होगा।
पुस्तकालय के अध्यक्ष तुलसी राम जालान, उपाध्यक्ष भरत कुमार जालान का पुस्तक के प्रति स्नेह सत्- साहित्य के प्रति विशेष अभिरुचि तथा पुस्तकालय की कार्यकारिणी समिति एवं पुस्तक निर्वाचन समिति के सदस्यों का मार्ग दर्शन इस साहित्यिक संस्थान को प्रगति की ओर अग्रसर कर रहा है।

 

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