कोलकाता पुस्तक मेले में पैरोकार की साहित्यिक परिचर्चा

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कोलकाता : पैरोकार की साहित्यिक मासिक परिचर्चा “पाठक वर्ग की जिम्मेदारी” विषय पर कोलकाता पुस्तक मेले में दिल्ली के वाणी प्रकाशन स्टॉल पर शनिवार को आयोजित की गयी। इस परिचर्चा बतौर मुख्य अतिथि प्रो० विजय कुमार भारती ने पाठक के जिम्मेदारी पर बात करते हुए कहा कि पाठक के दो वर्ग है पहला बाज़ारकेन्द्रित पाठक , दूसरा जिम्मेदार पाठक । उन्होंने कहा कि पाठक एक जिम्मेदाराना पद है, जिम्मेदार पाठक पाठ को जीता है , पाठ के समस्या को समझ कर लेख़क द्वारा सुझाये गए मार्ग को भी समझता है। पाठक का दायरा बहुत बड़ा है विद्यार्थी से लेकर लेखक तक सभी क्योंकि एक अच्छा लेखक एक अच्छा पाठक भी होता है।उन्होंने नामवर सिंह और मैनेजर पांडे के मतों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि पढ़ना एक रचनात्मक कार्य है और पाठक वर्ग की समस्या वर्तमान में अत्यंत गंभीर होती जा रही है। वहीं महाराजा श्रीश्चंद्र कॉलेज के सहायक प्रोफेसर डॉ० कार्तिक चौधरी ने पाठक वर्ग की समस्याओं पर चर्चा करते हुए पूर्वाग्रह और विरोधी आलोचको को भी दर्शाया । पाठक के सामने चुनौती भी है क्योकि कई बार पुस्तक की समीक्षा को देख कर किताबें तो पाठक खरीद लेता है लेकिन पढ़ने के बाद ठगा हुआ महसूस करता है ।पाठक को विवेकता से पुस्तकों को पहचानना होगा। श्यामाप्रसाद कॉलेज के असिस्टेंट प्रोफेसर श्रीनिवास यादव ने जिम्मेदार पाठक बनने के पहले पाठक से अच्छे पाठक बनने की प्रेरणा दी। केंद्रीय हिन्दी निदेशालय से आये प्रदीप ठाकुर ने बताया कि आज पाठक उन्मादित हो गए है और स्वविवेक का उनमें लोप हो गया है अतः आज पाठक को सर्वप्रथम बौद्धिक होना होगा।सिटी कॉलेज से आये संदीप प्रसाद जी ने बताया कि तकनीक और प्रिंट माध्यम ने पाठकों की संख्या बढ़ा दी है और आज पाठक वर्ग की जिम्मेदारी से ज्यादा जरूरी लेखक और प्रकाशक वर्ग की है।और अगली पीढ़ी के पाठकों के लिए पढ़ाई का वातावरण बनाने के लिए प्रेरित करना होगा।तो वही श्रीरामपुर गर्ल्स कॉलेज से आयी दीपा कुमारी ने पाठकों को पूर्वाग्रह से बचने की सलाह दी। और दैनिक जागरण के पत्रकार अनवर हुसैन ने पढ़ने की संस्कृति बचाने की बात की और बताया कि तकनीक का पाठकों पर एक गहरा प्रभाव पड़ा है। परिचर्चा में मौजूद विद्यार्थियों में प० ब० विवि शिक्षक प्रशिक्षण संस्थान के विद्यार्थी अजय चौधरी ने पाठकों को समय का सदुपयोग कर वर्तमान समय की चुनौतियों को स्वीकार कर पढ़ने की बात कही। महाराजा श्रीशचंद्र कॉलेज के विद्यार्थी मुकुल ने कहा कि पढ़ेगा इंडिया तभी तो बढ़ेगा । सुशील ने सही पुस्तकों के चुनावों की समस्या को सामने रखा, बिक्रम ने मोटी-मोटी किताबो को पढ़ने में अरुचिकर होने की बात कही तो वही विजय और चंदन ने भी पाठकों को तकनीक के माध्यम से जुड़ने और अपने मस्तिष्क की सीमा बढ़ाने की भी बात कही। इस साहित्यिक परिचर्चा में सभी शिक्षक और विद्यार्थियों ने मिल कर इस विषय पर चर्चा की और निष्कर्ष यह निकला कि पाठक एक जिम्मेदाराना पद है और उसे सभी किताबों को पढ़ने के बाद ही समझ आएगा कि सही किताब कौन सी है।धन्यवाद ज्ञापन वाणी प्रकाशन के चंदन चौधरी ने किया।

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