कोविड 19 प्रभाव : 2024 तक 10 ट्रिलियन डॉलर का होगा वैश्विक स्वास्थ्य परिसेवा खर्च

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कोलकाता : एक तरफ समूची दुनिया के लिए कोरोना एक चुनौती बना हुआ है तो दूसरी तरफ यह स्वास्थ्य परिसेवा के कारोबार में उछाल आने का बड़ा कारण बन रहा है। वैश्विक स्वास्थ्य परिसेवा के खर्च को लेकर हाल ही में जारी की गयी एक रिपोर्ट के हवाले से यह दावा किया गया है। सीएजीआर (कम्बाइन्ड पब्लिक एंड प्राइवेट हेल्थ केयर स्पेन्डिंग) नामक इस रिपोर्ट में कहा गया है कि 2020 और 2024 तक तुलनात्मक रूप से 2015 -2019 के दौरान किया गया खर्च में आई तेजी 2.8 प्रतिशत है और 2024 तक यह आँकड़ा 10 ट्रिलियन डॉलर तक पहुँच जाएगा। 2021 में कोविड -19 के खिलाफ लड़ाई तेज होने की उम्मीद है। स्वास्थ्य परिसेवा को मजबूत करने के लिए भारत सरकार ने गहरे बुनियादी आधारभूत व स्थायी सुधार किये हैं। 2021 के केन्द्रीय बजट में स्वास्थ परिसेवा क्षेत्र के लिए 2.23 लाख करोड़ रुपये आवंटित किये गये थे। आरबीएसए के सलाहकारों द्वारा इस रिपोर्ट में ‘हेल्थकेयर इवॉल्यूशन क्यूरेटिव टू प्रीवनेन्टिव’ में उम्मीद की गयी है कि भारत सरकार के स्वास्थ्य परिसेवा और कोरोना से निपटने के लिए उठाये गये कदमों को देखते हुए स्वास्थ्य परिसेवा के निवेश में भी व्यापक सुधार होगा। भारत में केन्द्र और राज्य का जनस्वास्थ्य खर्च वित्त वर्ष 2008 -09 और 2019 -20 में कुल जीडीपी का 1.2 प्रतिशत – 1.6 प्रतिशत रहा। रिपोर्ट के मुताबिक 2026 तक भारत की 26 प्रतिशत आबादी 45 वर्ष से अधिक उम्र की होगी। अनियमितता भरी शहरी जीवन शैली इस तरह के रोग बढ़ने की भी आशंका है।
स्वास्थ्य परिसेवा के गन्तव्य के रूप में भी भारत उभर रहा है क्योंकि यहाँ बजट के अनुकूल कम खर्च में बेहतर चिकित्सा समाधान और मरीजों की देखभाल की सुविधा भी उपलब्ध है। सरल और जटिल, हर तरह के रोग का उपचार है। आरबीएसए एडवाइजर्स के एम डी और सीईओ राजीव शाह इसे शुरुआती दौर मानते हैं मगर वे दीर्घकालीन विकास की सम्भावना भी देखते हैं। आरबीएसए एडवाइजर्स के उपाध्यक्ष यानी वाइस प्रेसिंडेट भाविक शाह के मुताबिक खासकर प्रौद्योगिकी के आने से स्वास्थ्य परिसेवा तथा सुविधाओं के आने से यह क्षेत्र तेजी से बढ़ रहा है। मसलन, आर्टिफिशियल इन्टेलीजेंस,ऑग्यूमेंटेंड रियलिटी. रोबोटिक्स और नैनो टेक्नोलॉजी के कारण लोगों का रुझान बढ़ रहा है। टेलि मेडिसीन, टेलि – कन्सल्टेंशन के क्षेत्र में भारत ने अच्छी प्रगति की है। इसमें आयुष्मान भारत जैसी योजनाएं भी गेम चेंजर का काम कर रही हैं।

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