कोविड -19 : लॉकडाउन को लेकर एसोचेम ने दिए आर्थिक गतिविधि सम्बन्धित सुझाव

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कोलकाता : कोविड -19 के कारण हुए लॉकडाउन के परिप्रेक्ष्य में ऐसोचेम कई सुझाव लेकर आया है और इस व्यापार संगठन ने व्यवसाय व उद्योग जगत के चयनित क्षेत्रों को संचालन सम्बन्धी अनुमति देने की सलाह दी है। इन क्षेत्रों में खुदरा क्षेत्र, आवश्यक उत्पादन, बड़े निर्माण सख्त सामाजिक दूरी व बचाव के नियमों का पालन करते हुए इनके संचालन की सलाह दी गयी है। एसोचेम के महासचिव दीपक सूद ने कहा कि बड़े एवं छोटे व्यवसाय अंशधारकों से परामर्श के बाद पाया गया है कि केन्द्र व राज्य सरकारों द्वारा किये गये लॉकडाउन को पूरा समर्थन मिला है। फिर भी, इस वजह से अर्थव्यवस्था औऱ व्यवसाय थम से गये हैं और युद्धस्तर पर किये गये कार्यों के कारण भारत अब तक मुकाबला करने में सक्षम रहा है मगर अर्थव्यवस्था को पुनर्जीवित करने के लिए तैयार रहना होगा।
एसोचेम ने इसे देखते हुए बिजनेस कन्टीन्यूटी रिपोर्ट भी जारी की है। चेम्बर के परामर्श प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अवधारणा के साथ नीति आयोग के तकनीकी परामर्श को ध्यान में रखकर तैयार किये गये हैं। चेम्बर का मानना है कि समूची वैल्यू चेन को प्रतिबद्धता और संसाधनों की जरूरत है। पूरे विश्व में अपनी उपस्थिति बना चुके फर्मास्यूटिकल उद्योग को एपीआई का अन्तराल भरना होगा जिससे वह स्व सक्षम हो सके। चेम्बर का परामर्श है कि प्रवासी श्रमिकों को उनकी दक्षता और क्षमता के अनुसार कार्य चुनने के लिए प्रोत्साहित किया जाना चाहिए जिससे लॉकडाउन के बाद व्यावसायिक गतिविधियाँ आरम्भ हों, तो व्य़वसाय फिर से आरम्भ करने में सुविधा हो। सूद ने संक्रमित इलाकों में लॉकडाउन जारी रखने तथा रैपिड टेस्टिंग का सुझाव दिया है जिससे कोरोना संक्रमण को नियंत्रित किया जा सके।
एसोचेम द्वारा दिये गये सुझाव
सभी राज्यों को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि किसी भी अनदेखी परिस्थिति से निपटने के लिए उनके क्वारिनटाअइन सेन्टर और मेडिकल सुविधाओं के साथ तैयार रहें।
अत्याधिक कोरोना संक्रमित स्थिति सुधरने तक लॉकडाउन ही रहें। समय – समय पर रैपिड टेस्ट से प्रगति निरीक्षण हो।
सरकार द्वारा कर्मियों को बचाव के सभी उपकरण व संसाधन मुहैया करवाने होंगे। सभी कर्मियों और सेवा प्रदाताओं के साथ परिवहन माध्यम की सुविधा हो।
कॉरपोरेट कार्यालयों, पेशेवर सेवाओं को ‘वर्क फ्रॉम होम’ की सुविधा हो और जरूरत पड़ने पर ही कर्मचारी कार्य़ालय से काम करें।
लॉकडाउन के बाद आर्थिक गतिविधियों की शुरुआत अनिवार्य सेवाओं का समर्थन करने वाले उद्योगों को खोलने से हो। इससे प्रवासी मजदूरों को गाँव जाने से रोका जा सकेगा और व्यवसाय को स्थायीत्व मिलेगा।
कारखानों में रहने वाले और इन्फ्रा डेवलेपमेंट साइट्स में काम करने वाले श्रमिकों को काम करने की अनुमति मिलनी चाहिए जिससे दूसरे इलाकों में उनकी आवाजाही रोकी जा सके।
एसएमई को यथासम्भव अनिवार्य़ श्रम संसाधनों के साथ काम करने की अनुमति मिलनी चाहिए और इस दौरान सोशल डिस्टेंसिंग का पूरा ध्यान रखा जाना चाहिए।
अचानक बढ़ने वाली माँग को ध्यान में रखते हुए लॉकडाउन के बाद प्रवासी श्रमिकों को उनकी दक्षता के अनुसार कार्य करने के लिए प्रोत्साहित किया जाना चाहिए।
छोटे व्यवसायियों तथा किराने की दुकानों को शुरू करना चाहिए और इसके लिए सामाजिक दूरी के नियमों का पालन होना चाहिए।
सामाजिक स्तर पर स्कूल और शिक्षण संस्थान बंद रहें और ऑनलाइन पढ़ाई पर ध्यान दिया जाए तथा परीक्षा लेने की भी व्यवस्था हो।
अन्तरराज्यीय स्तर पर वस्तुओं को ले आने – जाने की सुविधा मिले मगर लोगों की आवाजाही पर नियंत्रण हो जब तक कि कोरोना के मामले घटने न लगें।
बड़े समूहों में तब्दील होने वाली तमाम गतिविधियों को स्थिति सुधरने पर ही अनुमति मिले।
अन्तरराष्ट्रीय उड़ानों को कुछ और समय के लिए स्थगित रखा जाये क्योंकि भारत इस समय जोखिम नहीं ले सकता।
कोरोना से निपटने के लिए आवश्यक दवाओं, चिकित्सकीय उपकरणों और सेफ्टी गियर की बढ़ती माँग को देखते हुए इस क्षेत्र में सक्षम बनना भारत के लिए आवश्यक है। जहाँ भारत ने स्वयं को वैश्विक आपूर्तिकर्ता के रूप में स्थापित किया है। कच्चे माल की कमी को देखते हुए उसकी पूर्ति का अन्तराल भरा जाना चाहिए। इसके लिए कई स्तरों पर शोध को प्रोत्साहन देने की जरूरत है।

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