खुद पर भरोसा कर बना दिए स्वदेशी उत्पाद, अब चीन से नहीं मंगाने पड़ेंगे बैटरी जिग

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कोरोना ने भारतीयों को काफी कुछ सिखा दिया। सबसे बड़ी सीख तो उद्यमियों को मिली। जनता ने इन उत्पादों पर भरोसा किया। यही कारण है कि भारतीय कंपनियां आत्मनिर्भर बन रही हैं। भिवाड़ी की दो बड़ी कंपनियां इलेक्ट्रिक टू व्हीकल की ओकीनावा और इलेक्ट्रॉनिक्स की भगवती ऑटोमोबाइल ने पूरी तरह स्वदेशी रूप में ढाल लिया है। इन दोनों ही कंपनियों में कोरोना के बाद काम में बढ़ोतरी हुई है। वहीं दूसरी ओर पथरेड़ी में बने प्रदेश के एकमात्र एमएसएमई सेंटर पर अब बैटरी के जिग बनने लगे हैं। पहले ये जिग चीन से आयात किए जाते थे।

ओकीनावा : 150 स्कूटर बना रही, जरुरत 200 की
खुश्खेड़ा में इलेक्ट्रिक स्कूटर की ओकीनावा कंपनी ने 2016 में काम शुरु किया। बढ़ते डीजल-पेट्रोल की कीमतों के बाद यह स्कूटर कंपनी अहम भूमिका निभा रही है। एचआर हैड जितेंद्र यादव के अनुसार वर्तमान में देशभर में 200 से अधिक इलेक्ट्रिक व्हीकल कंपनी बाजार में उतर गई हैं। कंपनी मालिक जितेंद्र शर्मा ने 6 साल पहले काम शुरू किया। पहले प्रतिदिन 100 स्कूटर बनते थे, जो अब बढ़कर 150 तक हो गए हैं। मार्केट में आवश्यकता प्रतिदिन 200 स्कूटर की है। कंपनी में करीब 200 लोग काम करते हैं। फिलहाल कंपनी के देशभर में 350 डीलर हैं। गत वर्ष शुरु हुए प्रदेश के एकमात्र एमएसएमई सेंटर के शिक्षकों ने वह कर दिया जिस पर आज सभी इन पर नाज कर रहे हैं। एमएसएमई के डीजीएम सुमित जैन ने बताया कि अक्टूबर माह में दिल्ली की इलेक्ट्रिक व्हीकल की बैटरी पैक बनाने वाली कंपनी इन्वर्टेज टेक्नोलॉजी के निदेशक आदित्य गाोल सेंटर पर आए थे। उन्होंने बताया कि बैटरी बनाने के काम आने वाला जिग चीन से खरीदना पड़ रहा है।

कंपनी चाहती है कि यह टूल हम हमारे देश में ही तैयार कराएं। सेंटर के शिक्षकों ने करीब 15 दिन तक इस पर गहन जांच की। इसके बाद सेंटर पर नई तकनीक बदौलत इस जिग को तैयार कर दिया। जैन के अनुसार यह जिग देश में पहली बार पथरेड़ी के एमएसएमई सेंटर पर ही बना है। इसके लिए सेंटर के चार शिक्षकों की टीम ने मेहनत की। अभी तक सेंटर पर इन्वर्टेड कंपनी के लिए 20 जिग बनाकर भेजे जा चुके हैं।

(साभार – दैनिक भास्कर)

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