जिंदगी के पन्ने

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  • श्वेता गुप्ता

जिंदगी के पन्नों को जब पलट कर देखा,
हर पन्ने में एक रिश्ता पाया ।
कुछ पन्नों को पूरा कर पाई ,
तो कुछ रिश्तो को संभाल पाई।
कुछ पन्ने आधे अधूरे से रह गए,
तो कुछ रिश्ते सवालों के सैलाब में डूब गए।

जिंदगी के पन्नों को जब पलट कर देखा,
हर पन्ने में एक रिश्ता पाया।
कुछ रिश्ते हंसा गए,
तो कुछ ने भिगो दिया।
कुछ रिश्तो ने भीगे जख्मों को सुखाया,
तो कूछ ने नये उम्मीद है जगाये।

जिंदगी के पन्नों को जब पलट कर देखा,
हर पन्ने में एक रिश्ता पाया।
कुछ रिश्तो ने बहुत कुछ है सिखाया,
कौन अपना,कौन पराया ये परखाया।
अभी भी बहुत पन्ने हैं बाकी,
बहुत कुछ है बाकी-बाकी।
उम्मीद है, आगे के पन्नों को एक,
नए सिरे से लिखना,
फिर कुछ दिन बाद उन्हीं पन्नों को है पलटना,
बस हर पन्नों को यूं ही भरते जाए,
हर जख्मो से उभरते जाएं।

क्योंकि, यही जिंदगी है मेरे दोस्त।
यही जिंदगी है मेरे दोस्त।

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