जीवन खगोल की एक आकस्मिक घटना है : वैज्ञानिक डॉ देबी प्रसाद दुआरी

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कोलकाता :  भवानीपुर एजूकेशन सोसाइटी कॉलेज में बिरला तारामंडल के डायरेक्टर वैज्ञानिक डॉ देबी प्रसाद दुआरी ने अॉन-लाइन विद्यार्थियों को सौरमंडल के रहस्यों के विषय में जानकारी दी। एस्ट्रॉनमी, फिजिक्स और एस्ट्रोलॉजी, जीटीआर आदि विज्ञान के विविध विषयों पर विद्यार्थियों को अपने वक्तव्य से समृद्ध किया। सप्तर्षि मंडल, सूर्य, चंद्रमा और पृथ्वी,सूर्य ग्रहण, ज्वार भाटा, अंतरिक्ष और काल आदि की विस्तृत चर्चा की। विभिन्न स्लाइड्स के द्वारा डॉ दुआरी ने बताया कि इस ब्रह्मांड में जीवन भी एक आकस्मिक घटना है। सूर्य ग्रहण ब्रह्मांड की एक घटना है जब चंद्रमा, सूर्य और पृथ्वी की स्थिति बनती है। ग्रहण पूर्ण रूप से खगोलिय प्रक्रिया है। इसे अंधविश्वास का रूप देना ठीक नहीं है। जैसे नदी का जल प्रवाहित होता है हवा चलती है वैसे ही ग्रहण की स्थिति भी है। ज्वारभाटा की वजह से भी जीवन है। सूर्य भी जल को आकर्षित करता है जैसे चंद्रमा। गैस आदि विविध पदार्थों से सूर्य बना है। ऐसे ही सौरमंडल में नौ ग्रहों की स्थिति की डॉ दुआरी ने विस्तार से जानकारी दी। मंगल ग्रह पर भी जीवन होने की संभावना पर शोध चल रहा है।शनि ग्रह से पृथ्वी एक बिंदु की तरह दिखाई देती है। रंगों से भरपूर सौरमंडल के विभिन्न रंगों से भरे नासा से लिए प्राकृतिक चित्रों को डॉ देबी प्रसाद ने स्लाइड्स पर दिखाए। सबसे बड़ा 30 मीटर व्यास का टेलीस्कोप का निर्माण भी भारतीयों ने किया जिसमें यूएस ए, जापान, आस्ट्रेलिया और भारत आदि देशों का सहयोग रहा। भारतीयों ने मंगल ग्रह की 200 फोटो ली है जो इस क्षेत्र में शुभ संकेत है।सूर्य जीवन को क्रियाशील और ऊर्जावान बनाए रखता है।डॉ. दुआरी ने बताया कि आने वाले पचास वर्षों में किसी अन्य ग्रह पर भी जीवन जन्म ले सकता है, शोध हो रहे हैं।
भवानीपुर कॉलेज के” मीट टू साइंटिस्ट ” में वरिष्ठ वैज्ञानिक तारामंडल के डायरेक्टर डॉ देबी प्रसाद दुआरी के इस कार्यक्रम में 75 विद्यार्थियों ने भाग लिया। अंत में, विद्यार्थियों के बहुत सी जिज्ञासाओं से भरे प्रश्नों का संतोषजनक उत्तर दिया। प्रो. दिलीप शाह ने धन्यवाद दिया। इस कार्यक्रम में शिक्षक गणों की भी उपस्थिति रही। डॉ. वसुंधरा मिश्र ने इस कार्यक्रम की जानकारी दी ।

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