जीवन साथी चुनना हो तो अपनी शर्तों पर चुनाव करें लड़कियाँ

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रेखा श्रीवास्तव

आजकल शादियों का मौसम चल रहा है। सोशल साइट्स पर शादियों की तस्वीर शेयर की जा रही है। यूनिवर्सिटी के बच्चों की भी शादियाँ हो रही है। कॉम्प्लेक्स में भी कई दिनों से सजावट, गाना-बजाना चल रहा है। प्रीतिभोज का आयोजन हो रहा है। दो लोगों के साथ-साथ कई परिवारों का एक साथ जुडना ही शादी है। शादी के बाद अगर सब कुछ अच्छा रहा, तो अच्छा ही अच्छा रहता है। लेकिन अगर कहीं कोई गड़बड़ हो जाती है तो सबका जीवन बरबाद हो जाता है, लेकिन सबसे ज्यादा फर्क लड़की पर पड़ता है। वह या तो मानसिक रोगी हो जाती है या फिर नौबत तलाक तक पहुँच जाती है।

अब लड़कियाँ पढ़ लिख रही है, नौकरी कर रही है, व्यवसाय कर रही है, हर क्षेत्र में जा रही है। इसलिए शादी के लिए लड़कियों को बहुत ज्यादा सजग होने की जरूरत है। अब तक शादी के लिए लड़कियों का चयन होता रहा है। पर अब समय आ गया है कि लड़कियों को जहाँ रहना है, वहाँ का माहौल देखे। घर देखें। परिवार देखें। खास तौर पर जिस लड़के से शादी होने वाली है, उसे हर नजरिये से जानें। यह जीवन भर का मामला है, लापरवाही न करें। लड़के की सोच, व्यवहार, बात करने का तरीका, काम करने का तरीका, बड़े-बुजुर्गों के साथ व्यवहार, घर के साथ-साथ बाहर की महिलाओं के साथ बातचीत करने का तरीका, किसी तरह के नशे की आदत तो नहीं, उसके दोस्त कैसे हैं। आस-पास के लोगों के साथ कैसा व्यवहार है। गाली-गलौच तो नहीं करता इत्यादि….इत्यादि।

ये सब तो बहुत जरूरी है। इसके साथ-साथ लड़की के साथ उसकी आदतें मिलती है कि नहीं। यह भी गौर करने की बात है। ऐसा नहीं है कि लड़की और लड़के की पसंद अलग-अलग हो। ऐसी स्थिति में दोनों को तकलीफ होगी। उनका जीवन स्टाइल, फोटो और सेल्फी लेने की आदत मिलती है कि नहीं। लड़के के लिए लड़की की छोटी-मोटी खुशियों का महत्व है कि नहीं। इस सबके अलावा अपना समय, अपनी सोच शेयर करने की आदत है कि नहीं। जीवन जीने के लिए ये सब बहुत जरूरी है। पहले लड़की घर में रहती थी, परिवार में बहुत सदस्य रहते थे। अगर लड़के में कुछ कमी हो तो उसके परिवार वाले उसे समझा देते थे। इसके अलावा घर की बहू को भी संभलने में मदद करते थे। लेकिन आज स्थिति बदल गई है। संयुक्त परिवार की जगह एकल परिवार हो गया है।

लड़की नौकरी कर रही है। उसकी इच्छाएं, सपने है। उन सपनों को पूरा करने के लिए जीवनसाथी की जरूरत पड़ती है। आजकल लड़कियाँ आर्थिक रूप से मजबूत हुई है, तो वह घर में भी मदद करती है। ऐसे में लड़के की भी जिम्मेदारी है कि वह अपनी पत्नी की मानसिक स्थिति को समझें, और उसकी बातों को ध्यान से सुने और उसका समाधान निकाले। उसकी भावनाओं का ख्याल रखें। समाज में लड़की, औरत पर इतने जोक्स, चुटकुले और वीडियो बनाये गये है कि उसका असर घर की चहारदीवारी के अंदर दिख रहा है इसलिए यह भी ध्यान देने की जरूरत है कि कहीं लड़का इस मानसिकता का तो नहीं। इसके साथ-साथ उसकी संपत्ति, आय, उसका खर्च करने का तरीका, भविष्य के लिए योजनाएं, बच्चों की जिम्मेदारी के योग्य है कि नहीं। यानि कुल मिलाकर अब ऐसा समय आ गया है कि शादी-ब्याह के लिए हर तरह से सोच-समझ कर लड़की को कदम उठाना चाहिए। लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि ऐसा करने से लड़कियों की शादी ही नहीं होगी, हताश हो जायेगी।

अभी तक लड़कों ने भी लड़कियों का चुनाव किया है। उसका रूप-रंग, कद, शिक्षा, नौकरी, परिवार, गुण के साथ-साथ नृत्य, गायन, समेत न जाने कितने परीक्षण से लड़कियों को गुजरना पड़ा है। तो क्या ऐसे में लड़कों की शादी नहीं होती थी। होती थी, और अच्छे से होती थी। ठीक इसी तरह लड़कियों की भी होगी, और अच्छे लड़के से होगी।
वैसे समय के साथ-साथ लड़कों ने भी अपने को बहुत बदला है। घर की जिम्मेदारी में सहयोग करते हैं, बच्चों के लालन-पालन में भी बहुत ध्यान दे रहे हैं। पत्नी का ख्याल रख रहे हैं, समय दे रहे हैं, समझ रहे हैं। इसलिए कम ऑन लड़कियों, आगे बढ़ो, तुम्हारी जिंदगी है, तलाश तुम्हें ही करनी होगी।

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