झंडा मंदिर- शिवलिंग की जगह बदलने के लिए खुदाई हुई थी, लेकिन नहीं मिल पाया तल

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यमुनागर जिले में साढ़ौरा-कालाअंब रोड के पास है गांव झंडा। यहां शिवालिक की पहाड़ी पर श्री महालेश्वर शिव मंदिर है। मान्यता है कि इस मंदिर का इतिहास महाभारत काल से जुड़ा है। महाभारत युद्ध के बाद पांडवों ने तपस्या की थी। महाशिवरात्रि पर्व पर मंदिर में बड़ा आयोजन होता है। मंदिर में सुबह के समय चंदन व फूलों ने शिवलिंग का श्रृंगार किया जाता है और दिन के समय विशाल भंडारे का आयोजन किया जाता है। रात्रि के समय चार पहर की पूजा होती है व सारी रात भोले बाबा का जागरण किया जाता है। हर माह कृष्ण पक्ष की चौदस पर मंदिर में कीर्तन का आयोजन किया जाता है।

श्री महाकालेश्वर शिव मंदिर गौशाला समिति के सदस्य रामकुमार बताते हैं कि माना जाता है कि मंदिर महाभारत काल का है। पूर्वज सदियों से इस मंदिर मे माथा टेकते आ रहे हैं। 1985 में तत्कालीन सरपंच के समय में गांव के लोगों ने चाहा कि इस शिवलिंग का यहां से निकालकर गांव में स्थापित करेंगे। शिवलिंग को निकालने का काम शुरू किया गया था। कई फुट गहरी खुदाई के बाद भी शिवलिंग की तली नहीं मिली। खुदाई के दौरान शिवलिंग के चारों ओर गणेश जी, नंदी सहित कई मूर्तियां मिली थी। एक सांप निकला और शिवलिंग से लिपट गया था। उसके बाद ग्रामीणों ने शिवलिंग को यहां से ले जाने की बजाय मंदिर के जीर्णोद्धार का निर्णय लिया था। 2010 में दोबारा से मंदिर भवन का निर्माण शुरू किया गया था।

मान्यता- बर्बरीक ने यहीं से देखा था महाभारत युद्ध – मान्यता है कि जब घटोत्कच और अहिलावती का बेटा बर्बरीक महाभारत युद्ध में भाग लेने चला था तो श्रीकृष्ण ने यहां पर बर्बरीक की परीक्षा ली थी और दान में बर्बरीक का सिर मांग लिया था। जब बर्बरीक ने युद्ध देखने की इच्छा जाहिर की थी तब श्री कृष्ण ने उनके सिर को एक पेड़ पर रख दिया था। मान्यता है कि महाकालेश्वर मंदिर के पास आज भी वहीं बरगद का पेड़ खड़ा है।

युद्ध के बाद सतकुम्भा के पानी में स्नान कर पांडवों ने हत्या का दोष दूर किया था – श्री महाकालेश्वर मंदिर से तीन किलोमीटर की दूरी पर सत कुंभा है। यहां जमीन से पानी की 7 धाराएं निकलती हैं। मान्यता है कि महाभारत युद्ध के बाद पांडवों ने सत कुंभा में स्नान करके ही हत्या के दोष को दूर किया था। शिव मंदिर गौशाला समिति झंडा के प्रधान रमेश चंद (बिट्टू), मान सिंह, रामकुमार, रामकरण, कृपाल, चमन के अनुसार जब पांडव महाभारत के युद्ध के बाद यहां तपस्या के लिए आए थे, तब श्री कृष्ण ने पांडवों को हत्या का दोष दूर करने के लिए 7 कुंभ नहाने को कहा था। यह भी बताया था कि भगवान भोलेनाथ के मंडल में 7 कुंभों का पानी है। पांडवों ने जब भगवान शिव से पानी मांगा तो भगवान शिव ने पानी देने से मना कर दिया था और भगवान शिव वहां से चले गये थे। मान्यता है कि जब पांडव भगवान शिव के पीछे-पीछे चले तो शिव के कमंडल से पानी की कुछ बूंदें यहां गिर गईं थी। यहां से पानी की 7 धाराएं बह निकली थी।

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