ताजमहल: 370 साल बाद राजस्थान के पत्थरों से चमकेगा चमेली फर्श

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आगरा : दुनिया की सबसे खूबसूरत इमारतों में शुमार ताजमहल के चमेली फर्श के 400 जर्जर पत्थर बदल रहा है। स्मारक के तामीर होने के 370 साल बाद ये पत्थर बदले जाएंगे। इसके लिए राजस्थान के बंशीपहाड़पुर से लाल पत्थर और मकराना से मार्बल मंगाया गया है।
ताजमहल के मूर्त रूप लेने के बाद चमेली फर्श के पत्थर पहली बार बदले जाएंगे। 400 पत्थर पूरी तरह से जर्जर हो चुके हैं। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग ने इन पत्थरों को चिह्नित कर बदले जाने के लिए टेंडर प्रक्रिया पूरी कर ली गई है। पत्थर भी मंगा लिए गए हैं। अब इनको तराशने का काम शुरू होगा।
स्मारक को पत्थरों की कटिंग से निकलने वाले कणों से बचाने के लिए इनको स्मारक के बाहरी क्षेत्र में तराशा जाएगा। ताकि स्मारक को नुकसान न पहुंचे। दरअसल, फर्श के पत्थरों को लगाने से पहले मशीनों के माध्यम से इनकी कटिंग की जाएगी। छैनी और हथौड़े से इनको तराशा जाएगा। इस दौरान पत्थर के काफी बारीक कण फर्श पर हवा के साथ बिखर जाते हैं।
पर्यटकों के पैरों से रगड़ने पर स्मारक के दूसरे पत्थरों को खराब कर सकते हैं। इसलिए लाल पत्थरों को तराशने का काम दशहरा घाट की तरफ स्थित कार्यशाला और मार्बल (सफेद पत्थर) को तराशने का काम गोशाला में होगा। बता दें कि ताजमहल का निर्माण वर्ष 1648 में पूरा हुआ था। तब से चमेली फर्श के पत्थर नहीं बदले गए हैं।
चमेशी फर्श पर जो पत्थर लगे हैं, उनमें फूल-पत्तियों की आकृति बनी हुई है। नये पत्थरों पर भी ऐसी ही आकृतियां उकेरी जाएंगी। ताकि पर्यटक इन बदले गए पत्थर और पहले से फर्श में लगे पत्थरों के बीच अंतर महसूस न कर पाएं।
चमेली फर्श में तांतपुर के लाल पत्थरों का प्रयोग हुआ है। इस बार संरक्षण कार्य के दौरान राजस्थान के बंशी पहाड़पुर से पत्थर मंगाया गया है। दोनों जगह के लाल पत्थरों में मामूली सा अंतर है। वर्तमान में जो पत्थर लगे हैं, उनमें सफेद स्पॉट ज्यादा हैं। नये लाल पत्थरों में कम होंगे।

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