दावा : 15 हजार साल पहले थी बिलासपुर में थी इंसानों की बस्ती

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अरपा नदी के किनारे हजारों साल पुराने पत्थर के औजार मिलने का दावा
बिलासपुर : छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में अरपा नदी किनारे पाषाण काल के अवशेष मिले हैं। इनमें पत्थर के औजार हैंडेक्स, क्लिवर, प्वाइंट्स और अन्य चीजें शामिल हैं। इन्हें जशपुर में एंथ्रोपोलॉजी (मानव शास्त्र) के प्रोफेसर डॉ. विनय तिवारी ने इकट्ठा किया है। उनका दावा है कि यह औजार 15 हजार साल से भी ज्यादा पुराने हैं। इसका काम खुदाई, छिलाई, कटाई सहित अन्य काम में होता था। इससे पता चलता है कि अरपा के किनारे पाषाण काल दौरान मानव संस्कृति बसा करती थी।
दावे के पीछे तीन कारण
अरपा नदी का इतिहास समृद्ध रहा है। काफी साल पहले जब यह इलाका जंगल था, तब निश्चित रूप से नदी बहा करती थी। इसके पानी का उपयोग यहां रहने वाले जंगली जानवर के अलावा पाषाण काल के मनुष्य किया करते थे। नदी में मछलियाँ, जंगल में कंद-मूल सहित खाने और शिकार की दूसरी चीजें आसानी से उपलब्ध थीं। जिसके चलते ही यहां इंसानों के बसने के तथ्य में दम लगता है।उपकरण और रॉ मटेरियल का उपलब्ध होना। इन्हीं के जरिए वे शिकार और रोजमर्रा के जीवन की दूसरी चीजें करते होंगे।


भू-गर्भ शास्त्रियों से की चर्चा, जांचेंगे कितना पुराना है औजार
प्रोफसर तिवारी का कहना है कि उन्होंने इसके संदर्भ में रायपुर के जियोलॉजी डिपार्टमेंट के अधिकारियों से बात की है। आने वाले दिनों में यह शोध का विषय होगा कि यह पत्थर और औजार कितने पुराने हैं। उन्होंने बताया कि जो पत्थर मिले हैं, उनमें क्वाडजाइट, सैंडस्टोन है और जेसफर है। कहा कि यह पत्थर पाषाण काल के सबसे प्राचीन समय का है। जिसकी जांच के लिए वे जल्द ही रायपुर के अधिकारियों से मिलकर उन्हें जांच करने की बात कहेंगे।
बिलासपुर के तोरवा निवासी डॉ. विनय तिवारी जशपुर के एक शासकीय कॉलेज में प्रोफेसर हैं। वे साल 2012 से पढ़ा रहे हैं। इससे पहले रायपुर की रविशंकर यूनिवर्सिटी में पढ़ाते थे। उनकी खास रुचि भी इतिहास को जानने में रही है। बिलासपुर आने के दौरान जब भी सुबह टहलने निकलते तो उनकी नजर ऐसे पत्थरों पर पड़ जाती। वे इसे इकट्ठा करते। कहते हैं जिस तरह के पत्थरों के औजार को उन्होंने संग्रहित किया है उसे प्रकृति नहीं बनाती, बल्कि जरूरतमंद लोग बनाते हैं। छत्तीसगढ़ के पुरातत्व विभाग के पुरात्वविद आरके भगत का कहना है कि पत्थर अरपा के किनारे मिले पत्थर इस बात के प्रमाण हैं कि पाषाण काल में मानव संस्कृति यहां रहती थी। ये बेहतरीन उपकरण हैं। यह कितने पुराने हैं, इसकी जाँच करेंगे।

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