दिवंगत अभिनेता पुनीत राजकुमार के नेत्रदान से रोशन हुई 4 लोगों की जिंदगी

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 बंगलुरू : दिवंगत अभिनेता पुनीत राजकुमार की आंखों से चार लोगों को रोशनी मिली है। पुनीत अपनी माँ की तरह परोपकार के कामों में शामिल रहते थे। इसी वजह से उन्होंने अपनी आंखें दान करने का संकल्प लिया था। उनके निधन के बाद इसे पूरा किया गया। पुनीत की आंखों को नारायण नेत्रालय​​​ आई हॉस्पिटल को दान कर दिया गया था। पुनीत के पिता अभिनेता राजकुमार ने भी अपनी आंखें दान की थीं।
कन्नड़ फिल्म अभिनेता पुनीत का जिम में वर्कआउट के दौरान दिल का दौरा पड़ने से निधन हो गया था। हार्ट अटैक के तुरंत बाद पुनीत को बेंगलुरु के विक्रम अस्पताल में भर्ती कराया गया, लेकिन उन्हें बचाया नहीं जा सका। पुनीत के निधन के बाद राज्य के सभी थिएटर बंद कर दिए गए और कई इलाकों में धारा 144 लागू की गई थी।
इस तरह दो आंखों से रोशन हुईं आंखें
नारायण नेत्रालय के अध्यक्ष और प्रबंध निदेशक डॉ. भुजंग शेट्टी ने बताया कि उन्होंने कॉर्निया की मुख्य और गहरी परत को अलग किया। हर आंख का इस्तेमाल दो रोगियों के इलाज के लिए किया गया। जिनमें एक महिला और बाकी तीन पुरुष शामिल थे।

पुनीत से चेतन ने भी ली प्रेरणा
कन्नड़ अभिनेता चेतन ने अपने सोशल मीडिया पर पोस्ट लिखा कि जब मैं अस्पताल में अप्पू सर के आखिरी दर्शन के लिए गया था, तब डॉक्टरों की एक टीम ने उनके निधन के 6 घंटे के अंदर ऑपरेशन किया और उनकी आंखें निकालीं। अप्पू सर ने भी डॉ. राजकुमार की तरह अपनी आंखें दान की हैं। अप्पू सर के दिखाए रास्ते पर चलकर और उनकी याद में हम सबको नेत्रदान करने की शपथ लेनी चाहिए। मैं भी अपनी आंखें दान करूंगा।

ऐसा रहा पुनीत का फिल्मी सफर
पुनीत के पिता राजकुमार दक्षिण के आइकन रहे हैं। पुनीत ने अपने कॅरियर की शुरुआत बाल अभिनेता के तौर पर की थी। उन्हें फिल्म बेट्टद हूवु के लिए सर्वश्रेष्ठ बाल अभिनेता का राष्ट्रीय पुरस्कार मिला था। फिल्म ‘अप्पू’ से बतौर शीर्ष अभिनेता अपने कॅरियर की शुरुआत की थी। उन्हें आकाश (2005), आरसु (2007), मिलन (2007) और वंशी (2008) जैसी फिल्मों में दमदार अभिनय के लिए जाना जाता है, जो अभी तक उनकी सबसे बड़ी कॉमर्शियल हिट हैं।पुनीत को आखिरी बार ‘युवरत्ना’ में देखा गया था, जो इस साल की शुरुआत में रिलीज हुई थी। साउथ में उनकी फिल्मों की दीवानगी इस कदर होती थी कि एक बार उनकी 14 फिल्में लगातार कम से कम 100 दिनों तक सिनेमा घरों में बनी रही थीं।

समाज सेवा में भी रहे अव्वल
अपने 46 साल के छोटे से जीवनकाल में पुनीत परोपकार के भी पावर स्टार थे। वे धर्म के खिलाफ कुछ नहीं सुन पाते थे। कोरोना महामारी के दौरान भी पुनीत ने सीएम रिलीफ फंड में 50 लाख रुपए दान किए थे। पुनीत ने 45 स्कूल, 26 अनाथालय, 16 वृद्घाश्रम, 19 गोशाला और 1800 अनाथ लड़कियों की उच्च शिक्षा की जिम्मेदारी उठाई थी। पुनीत के जाने के बाद अभिनेता विशाल ने घोषणा की है कि अनाथ लड़कियों की शिक्षा की जिम्मेदारी वे उठाएंगे।

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