देशराग अमृत – स्वरचित कविता – वही देश भारत है

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सुशील रविदास, गारुलिया मिल हाई स्कूल

आओ भविष्य भारत के,
कराऊँ परिचय भारत से।

जिसके पूर्व में है खाड़ी बंगाल की,
और अरब सागर है पश्चिम में,
वही देश भारत है।

जिसके दक्षिण में है महासागर हिन्द का,
और उत्तर में बसता है हिमालय,
वही देश भारत है।

जहां बहे पवन उनचास,
और मिट्टी होती पांच,
वही देश भारत है।

जहां पानी बदले एक कोस पर,
और तीन कोस पर बदले बोली,
वही देश भारत है।

जहां संगीत में डूबा है काशी,
और लोग डूबे है वतन के प्यार में,
वही देश भारत है।

जहां गुरु बड़ा भगवान से,
और होता आदर उनके नाम से,
वही देश भारत है।

जिसका इतिहास था स्वर्णिम,
और वर्तमान की बात ही क्या,
वही देश भारत है।

जहां के लोग हो निडर,
और भाईचारा जिनका दृढ़,
वही देश भारत है।

जिसकी गोद में खेलती हैं नदियां,
और गीत गाती है चिड़िया,
वही देश भारत है।

जहां पाए जाते धर्म अनेक,
और इंसानियत भी है एक,
वही देश भारत है।

जिस मां के गोद में पलते है भविष्य उसके,
और है तैनात सीमा पर सपूत जिसके,
वही देश भारत है।

हम उसी देश के निवासी हैं,
हम सभी भारतवासी है।

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