देश में बढ़ गये करोड़पति, कोलकाता में हैं 10 हजार करोड़पति : रिपोर्ट

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नयी दिल्ली :  देश में करोड़पति और मध्यमवर्गीय परिवारों में इजाफा हुआ है। हुरुन इंडिया द्वारा जारी वेल्थ रिपोर्ट 2020 के मुताबिक, महामारी के बावजूद देश में 4.12 लाख नए करोड़पति और 6.33 लाख नए मध्यमवर्गीय परिवार बढ़े हैं। नए करोड़पतियों में 3000 परिवार ऐसे थे, जिनकी नेटवर्थ 1000 करोड़ रुपये से ज्यादा थी और वे ‘सुपर रिच’ की श्रेणी में शामिल हो गए। नए मध्यवर्गीय परिवारों की बात करें तो इन परिवारों में 20 लाख रुपए की सालाना औसत बचत दर्ज हुई है।
इसके साथ ही इनके पास अपने मकान और महंगे वाहन भी थे। हालांकि सामान्य मध्यमवर्गीय परिवारों की बात करें तो इनकी संख्या 5.64 करोड़ है। इनकी सालाना कमाई ढाई लाख रुपए है और कुल संपत्ति 7 करोड़ रुपए से कम है। 16,933 करोड़पति के साथ मुंबई सबसे अमीर शहर बन गया है।
रिपोर्ट के मुताबिक देश के संपन्न परिवार दो भाग में बंटे हैं। पहले वो हैं, जिनकी आय कुछ काम करने से अर्जित होती है। साथ ही उनके पास फिक्स डिपॉजिट (एफडी) हैं और रियल एस्टेट तथा शेयर में निवेश से भी उनकी आमदनी बनती है। दूसरे वो हैं जो खानदानी संपन्न परिवार हैं और संपन्नता उन्हें विरासत में मिली हैं। उनके पास रियल एस्टेट तो है ही, जमा-जमाया कारोबार भी उन्हें मिला है, जिससे उनकी आमदनी लगातार बनी रहती है। और तो और परिवार का पुराना पैसा जो बहुत पहले शेयर बाजार में लगाया गया था, वह भी डिविडेंड के जरिए इन परिवारों की आय को बढ़ा देता है।
रिपोर्ट के मुताबिक, मुंबई में 16,933 करोड़पति परिवार हैं, जो देश की जीडीपी में करीब 6.16% का योगदान देते हैं। 16 हजार करोड़पतियों के साथ नई दिल्ली दूसरे और कोलकाता 10 हजार करोड़पतियों के साथ तीसरे स्थान पर है।
रियल एस्टेट और शेयर बाजार निवेश के लिए सबसे अच्छा साधन
हुरुन इंडिया की रिपोर्ट के लिए जिन अमीरों के बीच सर्वे किया गया था, उनमें से 72% ने बताया कि वे 2019 की तुलना में अब व्यक्तिगत और व्यावसायिक जीवन, दोनों में खुश हैं। इनके लिए हमेशा की तरह रियल एस्टेट और शेयर बाजार निवेश के लिए सबसे अच्छा साधन रहा जबकि विदेश प्रवास के लिए स्विटजरलैंड और अमेरिका के बाद यूके सबसे पसंदीदा रहा। साथ ही निवेश के लिए सिंगापुर और यूएई के बाद अमेरिका ही सबकी पसंद बना। विदेश में पढ़ाई के मामले में भी अमेरिका सभी की पहली पसंद बना हुआ है। रुचि की बात है, तो ज्यादातर लोगों का रुझान कलाकृतियों के संग्रह में रहा।

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