दोनों आंखों से देख नहीं सकती दिव्या, सामान्य एथलीट्स को हराकर जीता स्वर्ण

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चंडीगढ़ : पीयू कैंपस के एनुअल स्पोर्ट्स फेस्ट में 500 से ज्यादा एथलीट्स ने हिस्सा लिया। पीयू ग्राउंड में जिस एथलीट की जीत ने सबसे ज्यादा तालियां बटोरी, वे थीं दिव्या। दिव्या दोनों आंखों से देख नहीं पाती, लेकिन रेस में उनका मुकाबला कोई नहीं कर पाया। 200 मीटर स्प्रिंट में उन्होंने अपने पार्टनर के साथ हिस्सा लिया और सामान्य एथलीट्स को पछाड़कर स्वर्ण पदक जीता। इसके बाद वे 100 मीटर में भी दौड़ीं और यहां भी रजत पदक जीता। एथलीट रमनदीप कौर ने 100 मीटर स्प्रिंट का स्वर्ण जीता। पंचकूला सेक्टर-20 की रहने वाली दिव्या इससे पहले इंस्टीट्यूट ऑफ ब्लाइंड-26 की स्टूडेंट रही हैं।
बीए-बीएड इंटिग्रेटेड कोर्स सेकंड ईयर की छात्रा दिव्या बचपन से नेत्रहीन नहीं थी। उन्हें सिर्फ रात को नहीं दिखता था। 9वीं क्लास तक की पढ़ाई उन्होंने सामान्य स्कूल से की। लेकिन 14 साल की उम्र में उन्हें दिन भी दिखाई देना बंद हो गया। निराश होने के बाद वे ब्लाइंड इंस्टीट्यूट में पढ़ने आईं। यहां कोच राकेश और आरती ने उन्हें मोटिवेट करते हुए स्पोर्ट्स में लाने का फैसला किया।
दिव्या कहती हैं कि यहां मैडम रेखा और अनुराधा ने उन्हें पढ़ने में निपुण बनाया। 12वीं में दिव्या ने 88.4 प्रतिशत अंक हासिल किए थे। स्पेशल एथलीट दिव्या ने कहा कि माँ अमरजीत कौर ने मेरा सबसे ज्यादा साथ दिया। जब मुझे दिखाई देना पूरी तरह से बंद हो गया तो उन्होंने ही मुझे संभाला। मैं हिम्मत हार गयी थी लेकिन मां को मुझ पर विश्वास था।
दिवाली के समय हुआ पैर में फ्रैक्चर, अब सीधा इवेंट में उतरी
दिव्या ने कहा कि दिवाली के समय मेरे बायें पैर में फ्रैक्चर हो गया था और डॉक्टर ने मुझे आराम करने को कहा। मैं चल भी नहीं सकती थी और कुछ दिन पहले ही मैं ठीक हुई। मुझे प्रतियोगिता में भाग नहीं लेना था लेकिन मुझसे रहा नहीं गया और मैंने भागने का फैसला किया। मुझे खुशी है कि बिना प्रैक्टिस के भी मैं यहाँ पर दो स्वर्ण पदक जीतने में कामयाब रही। मैंने ब्लाइंग नेशनल में भी 2016 में तीन स्वर्ण और दो रजत पदक जीते थे। वहीं 2014 में मुझे एक स्वर्ण मिला था। नेशनल पैरा ओलंपिक गेम्स में मैंने दो स्वर्ण और एक रजत पदक हासिल किया था।
दोस्तों ने करवाई प्रैक्टिस
पदक जीतने के बाद दिव्य एथलीट दिव्या ने कहा कि मेरे दोस्त नवीन और रोहित मुझे एथलेटिक्स की प्रैक्टिस कराते हैं। वे मेरे सहपाठी हैं। कॉलेज शुरू होने से पहले मेरी गेम को परफेक्ट करते हैं। हमारी प्रैक्टिस सुबह 6 बजे शुरू होती है और 8 बजे तक हम फिटनेस से लेकर गेम की प्रैक्टिस करते हैं। यहां भी वे दोनों मेरे साथ थे। रोहित ने मेरे साथ 200 मीटर में हिस्सा लिया जबकि नवीन 100 मीटर इवेंट में मेरे साथ दौड़ा। दिव्या ने कहा कि आगे भी प्रैक्टिस जारी रखूंगी और पैरालंपिक में पदक जीतने का सपना मुझे पूरा करना है।

(साभार – दैनिक भास्कर)

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