“नारियां”

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  • प्रीति साव

हम है शक्ति,
हम है बुद्धि,
हम ही है
इस सृष्टि के निर्माता,
हम न हो तो
यह धरती कैसी?
नारी से ही यह संसार सारा।
हम ही है फूलों की कोमलता,
हम ही है प्राकृतिक की सुन्दरता,
हम ही प्रकाश प्रेम का
इस प्रेम से ही धरती उजियाली,
वक्त पड़े तो चट्टानों को तोड़,
खोज लेती है
अपनी मंजिल की राह नारी
वर्तमान में,
बोल उठी है,
खिल चुकी है
हर क्षेत्र में
कदम आगे बढ़ा रही है
नारियां।
बाजारीकरण हो,
शैक्षणिक संस्थान हो,
टेक्नोलॉजी हो
या हो फिर सैनिक,
राजनीतिक,सामाजिक
कोई भी क्षेत्र
आज हर राह में,
हर क्षेत्र में,
बढ़ रही है नारियां,
हर क्षेत्र में अपना परचम
लहरा रही है नारियां,
हर बेड़ियों को तोड़,
आगे बढ़,समाज को
एक नई दिशा दे रही है
नारियां,
खुद शिक्षित हो कर
समाज के लिए
प्रेरणादायक बन रही है
नारियां,
अपने विवेक से
हर अन्याय पर न्याय
दिला रही है नारियां,
विश्व में अपनी
अलग पहचान बना रही है
नारियां।

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