पेप्सिको के लेज वाले भारतीय आलूओं का पंजीकरण रद्द

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एफ एल -2027 आलू के लिए पेप्सिको ने किसानों पर किया था मुकदमा
नयी दिल्ली : पौधे की किस्मों का संरक्षण करने वाले प्राधिकरण पीपीवी एंड एफआर ने शुक्रवार को पेप्सिको इंडिया  को आलू की किस्म ” के लिए मिला पंजीकरण प्रमाणपत्र निरस्त कर दिया। यही वह आलू की किस्म है, जिसे उगाने के लिए कंपनी ने गुजरात के किसानों पर मुकदमा किया था।
गौरतलब है कि दो साल पहले अमेरिका की कंपनी पेप्सिको और गुजरात के किसानों के बीच एक विवाद काफी चर्चा में रहा था। मामला था पेप्सिको के ‘लेज’ वाले आलू किसानों द्वारा उगा लेने का। पेप्सिको ने उस खास आलू पर अपना कॉपीराइट जताते हुए किसानों पर मुकदमा और मोटा जुर्माना ठोंका और बाद में मुंह की खाई। अब कंपनी को एक और झटका लगा है क्योंकि आलू की जिस वेरायटी को वह ‘अपना’ बता रही थी, अब वह उसका अपना नहीं रहा है। भारत ने पेप्सिको से यह अधिकार छीन लिया है। पौधे की किस्मों का संरक्षण करने वाले प्राधिकरण पीपीवी एंड एफआर ने शुक्रवार को पेप्सिको इंडिया को आलू की किस्म ‘एफ एल -2027’ के लिए मिला पंजीकरण प्रमाणपत्र निरस्त कर दिया। यही वह आलू वेरायटी है, जिसे उगाने के लिए कंपनी ने गुजरात के किसानों पर मुकदमा किया था। एफएल – 2027 किस्म का आलू अमेरिका में 2003 में विकसित किया गया था और भारत में इसे एफसी5 के नाम से पहचाना जाता है।
​साल 2019 का वह पूरा विवाद
पेप्सिको ने अप्रैल 2019 में गुजरात के साबरकांठा में 4 छोटे किसानों के खिलाफ पेप्सिको के विशेषाधिकार वाली आलू की किस्म ‘एफएल-2027’ को उगाने और बेचने का आरोप लगाते हुए मुकदमा दायर किया था। पेप्सिको का कहना था कि ये किसान अवैध रूप से आलू की इस किस्‍म को उगा और बेच रहे हैं। कंपनी का दावा था कि आलू की ‘एफएल-2027’ किस्‍म से वह लेज ब्रैंड के चिप्‍स बनाती है और इसे उगाने का एकल अधिकार पेप्सिको के पास है। आलू की इस किस्म का उत्पादन कंपनी के साथ जुड़े हुए किसान ही कर सकते हैं, नहीं। चारों किसानों से पेप्सिको ने 1-1 करोड़ रुपये से ज्यादा के हर्जाने की मांग की थी।
इससे पहले पेप्सिको ने साल 2018 में गुजरात के अरवल्ली जिले के पांच किसानों पर एफएल2027 आलू को बोने के मामले में मोडासा कोर्ट में केस दर्ज किया था। उनसे भी लाखों का हर्जाना मांगा गया था।
जब हुई फजीहत तो वापस लिया मुकदमा
पेप्सिको को किसानों पर मुकदमे को लेकर किसानों और सामाजिक संगठनों के भारी विरोध का सामना करना पड़ा था। किसानों की ओर से यह तक कह दिया गया था कि अगर भारत में किसान आलू उगाना बंद कर दें तो पेप्सिको को भारत छोड़ना पड़ जाएगा। भारी फजीहत होते देख और दबाव के चलते पेप्सिको ने गुजरात सरकार से बातचीत के बाद मई 2019 में मुकदमा वापस लेने का ऐलान किया। इस कदम के तहत कंपनी ने अहमदाबाद कमर्शियल कोर्ट में 4 किसानों और मोडासा कोर्ट में 5 किसानों के खिलाफ मुकदमों को वापस लिया था। साथ ही डीसा कोर्ट में बड़े किसानों और ट्रेडर्स के खिलाफ किए गए दो अन्य मुकदमों को भी वापस ले लिया था।
फरवरी 2016 में कंपनी को मिला था पौध किस्म का प्रमाण पत्र
पेप्सिको को इस विशेष किस्म के आलू के लिए भारत में फरवरी 2016 में पौध किस्म का प्रमाण पत्र दिया गया था। लेकिन अब पीपीवी एंड एफआर ने पेप्सिको के इस प्लांट वेराइटी प्रोटेक्शन प्रमाण पत्र को रद्द कर दिया है। पौध किस्म संरक्षण एवं कृषक अधिकार कानून, 2001 के तहत कोई किसान कहीं का भी कोई बीज बो सकता है और बेच भी सकता है लेकिन विशेषाधिकार प्राप्त किस्मों की कमर्शियल ब्रांडिग नहीं कर सकता है।
​’पीपीवी एंड एफआर’ के फैसले पर पेप्सिको का क्या है कहना
पेप्सिको इंडिया ने इस फैसले पर कहा कि वह पौध किस्मों और किसान अधिकार संरक्षण (पीपीवी और एफआर) प्राधिकरण द्वारा पारित आदेश की समीक्षा कर रही है। पीपीवी एंड एफआर एक सांविधिक निकाय है, जिसकी स्थापना पौधों की किस्मों और किसानों के अधिकार अधिनियम, 2001 के तहत की गई है। प्राधिकरण का यह निर्णय दरअसल कृषि कार्यकर्ता कविता कुरुगांति द्वारा दायर की गई याचिका पर आया है।
याचिकाकर्ता की क्या रही दलील
याचिकर्ता ने अपनी याचिका में कहा था कि पेप्सिको इंडिया को गलत जानकारी के आधार पर पंजीकरण प्रमाण पत्र दिया गया था। कृषि कार्यकर्ता कविता ने यह भी कहा था कि पेप्सिको इंडिया को आलू की किस्म पर दिया गया बौद्धिक संपदा अधिकार (आईपीआर), पंजीकरण के लिए निर्धारित प्रावधानों के अनुसार नहीं था और जनहित के खिलाफ था। पीपीवी एंड एफआर ने भी कृषि कार्यकर्ता की याचिका पर सहमति जताई और कहा कि पंजीकरण आवेदक द्वारा दी गई ‘गलत जानकारी’ पर आधारित था। प्राधिकरण ने अपने 79 पृष्ठ के फैसले में कहा, “एफएल 2027 वाले आलू की किस्म के संबंध में पेप्सिको के पक्ष में रजिस्ट्रार द्वारा एक फरवरी 2016 को दिया गया पंजीकरण प्रमाण पत्र तत्काल प्रभाव से निरस्त किया जाता है।” अपने निर्णय में प्राधिकरण ने रजिस्ट्रार के प्रमाणपत्र जारी करने पर हैरानी जताई है।

 

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