प्रदूषण कम करने के लिए काई वाले ‘सिटी ट्री’ का चलन बढ़ा

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यह 275 पेड़ों के बराबर ऑक्सीजन देता हैं
लंदन : शहरों में बढ़ रहे प्रदूषण से निपटने के लिए स्मॉग टॉवर लगाए जा रहे हैं, लेकिन इसके परिणाम उतने असरकारी नहीं हैं। इसी को देखते हुए लंदन और बर्लिन में काई (मॉस) की दीवार वाले ऐसे सिटी ट्री का प्रयोग किया गया है, जो शहरों में कम खर्च और जगह में लगाए जा सकते हैं। इनका परिणाम भी बेहतर है। एक सिटी ट्री करीब 275 पेड़ों के बराबर प्रदूषण सोखने में कारगर है। सिटी ट्री प्रदूषित कणों (पार्टिकुलेट मैटर), कार्बन डाईऑक्साइड, नाइट्रोजन ऑक्साइड अवशोषित करता है और ऑक्सीजन का उत्पादन करता है। हाल ही में लंदन में दो सबसे प्रदूषित स्थानों पर सिटी ट्री स्थायी तौर पर लगा दिए गए हैं। अप्रैल 2019 में इन स्थानों पर क्लाइमेट इमरजेंसी घोषित की गई थी। दुनियाभर के प्रदूषित 20 शहर भी इसे आजमा रहे हैं। यही नहीं, जर्मनी के प्रदूषित शहर स्टटगार्ट में ऐसी 100 मीटर दीवार बनाई जा रही है। दुनिया का पहला जैव प्रौद्योगिक प्रदूषण फिल्टर बताया जा रहा सिटी ट्री काई के जरिए काम करता है।
काई की जरूरतें हवा से पूरी हो जाती हैं
काई को आपने अब तक पेड़ के तनों, पुरानी इमारतों या पहाड़ों पर ही देखा होगा। पेड़-पौधे अपनी जरूरतें जड़ों के जरिये पूरी करते हैं, लेकिन काई अपनी सारी जरूरतों को सीधे हवा से पूरी करती है। इसकी इसी खासियत के आधार पर सिटी ट्री का कॉन्सेप्ट तैयार किया गया है। एक सिटी ट्री में काई करीब 13 फीट की ऊंचाई तक लगाई जाती है। सार्वजनिक स्थानों पर इसे स्टील की फ्रेम के साथ लगाया जाता है।
एक सिटी ट्री रोज 250 ग्राम पार्टिकुलेट मैटर सोखता है
इसके आविष्कारकों के मुताबिक, अलग-अलग प्रकार की काई के पौधे प्रदूषण के विभिन्न कारकों से निपटने में सक्षम है। एक सिटी ट्री हर रोज 250 ग्राम पार्टिकुलेट मैटर सोखने की क्षमता रखता है। इस तरह यह एक साल में 90 किग्रा पीएम कण सोख सकता है। यह सालाना 240 मीट्रिक टन कार्बन डाइऑक्साइड वातावरण से हटाता है। इससे आसपास रहने वाले लोगों और वहां से गुजरने वाले लोगों को साफ-स्वच्छ हवा मिलती है।
एक सिटी ट्री 5 मीटर के दायरे में 17 डिग्री तापमान रखता है
सिटी ट्री के हर टावर स्ट्रक्चर में वॉटर टैंक, सोलर पैनल, बैटरी और सेंसर लगे होते हैं। सिटी ट्री आसपास के इलाके में ठंडक भी बनाए रखता है। इसके पांच मीटर के दायरे में तापमान करीब 17 डिग्री रहता है। इससे शहरों की गर्मी कम करने में मदद मिलती है। सिटी ट्री में लगे सोलर सिस्टम के जरिए बारिश के पानी को सहेजा जाता है। वाई-फाई सेंसर से लैस यह सिटी ट्री अपने आप कार्य करता है और इसके रखरखाव की जरूरत नहीं पड़ती।
सिटी ट्री से बच्चों का जीवन छह सप्ताह बढ़ जाएगा
डब्ल्यूएचओ के मुताबिक, खराब वायु गुणवत्ता के कारण दुनियाभर में हर साल 70 लाख लोगों की मौत हो जाती है। दरअसल, ब्रिटेन में हर साल 50,000 लोग प्रदूषण संबंधी बीमारियों के चलते असमय दम तोड़ देते हैं। दो स्थानों पर सिटी ट्री लगाए जाने के बाद उम्मीद की जा रही है कि इन इलाकों में वर्ष 2013 के बाद जन्मे बच्चों का जीवन औसतन छह हफ्ते बढ़ जाएगा।

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