‘प्रेमचंद का लेखन राजनीति को मशाल दिखाने का काम करता है’

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भारतीय साहित्य मंच और सांस्कृतिक पुनर्निर्माण मिशन ने मनायी प्रेमचंद जयंती 

भाटपाड़ा में हिन्दी कॉलेज स्थापित करने की माँग उठी

बैरकपुर । भारतीय साहित्य मंच और सांस्कृतिक पुनर्निर्माण मिशन द्वारा प्रेमचंद भवन, भाटपाड़ा में प्रेमचंद जयंती के अवसर पर संगोष्ठी, काव्य पाठ, लोकगीत और नाट्य मंचन का आयोजन किया गया। इस अवसर पर इस वर्ष माध्यमिक और उच्च माध्यमिक में 75% से अधिक नंबर प्राप्त लगभग 800 विद्यार्थियों को सम्मानित किया गया। कार्यक्रम का उद्घाटन हिंदी अकादमी, पश्चिम बंगाल के चेयरमैन विवेक गुप्ता ने किया। उन्होंने कहा कि प्रेमचंद पूरे भारतीय समाज के लेखक है। स्वागत भाषण देते हुए भारतीय साहित्य मंच के अध्यक्ष प्रियांगु पांडेय ने भाटपाड़ा में एक हिंदी कॉलेज के निर्माण का प्रस्ताव रखा। कार्यक्रम का मुख्य केंद्र बिंदु था- भाटपाड़ा में हिंदी कॉलेज के निर्माण हेतु प्रस्ताव रखना। इस अवसर पर हिंदी विश्वविद्यालय, हावड़ा के कुलपति प्रो. दामोदर मिश्र ने कहा कि प्रेमचंद सभी के लिए शिक्षा की बात करते हैं। उनका पूरा लेखन समाज के हर वर्ग के हित से जुड़ा था। उन्होंने जूट बहुल क्षेत्र में हिंदी भाषी विद्यार्थियों की बड़ी संख्या के उच्च शिक्षा के लिए यहां के जनप्रतिनिधियों से आग्रह किया कि इस अंचल में एक हिंदी माध्यम का महाविद्यालय हो। हिंदी अकादमी के सदस्य मनोज कुमार यादव ने कहा कि कोलकाता आसनसोल के बाद यह जूट मिल अंचल हिंदी भाषी बहुल क्षेत्र है। यहां के दर्जनों उच्च माध्यमिक स्कूलों के विद्यार्थियों की उच्च शिक्षा के लिए यहां पर्याप्त अवसर मिलना चाहिए। मैं चाहता हूं कि इस क्षेत्र में एकाधिक हिंदी माध्यम कॉलेजों की स्थापना हो। इसके लिए हम सभी को हिंदी अकादमी और उच्च शिक्षा विभाग से आग्रह करना चाहिए। बैरकपुर लोकसभा के सांसद अर्जुन सिंह ने कॉलेज के प्रस्ताव पर अपनी सहमति दर्ज करते हुए कहा कि हिंदी भाषी क्षेत्र होने के कारण यहां के बच्चों को उच्च शिक्षा प्राप्त करने में काफी दिक्कतें हो रही है। अतः हिंदी कॉलेज का निर्माण होने से इस अंचल समेत आस पास के हिंदी भाषी विद्यार्थियों को उच्च माध्यमिक के बाद पढ़ाई छोड़नी नहीं पड़ेगी और वे अपनी भाषा में ही स्नातक की पढ़ाई कर पाएंगे। प्रेमचंद के बारे में लेखक उदयराज जी ने कहा कि प्रेमचंद ने वंचितों की बात करते हैं। प्रेमचंद का लेखन राजनीति को मशाल दिखाने का काम करता है। इस अवसर पर अष्टभुजा शुक्ल, उमरचंद जायसवाल, रॉवेल पुष्प, डॉ. राजेश मिश्रा, रचना सरन, डॉ. कलावती कुमारी, डॉ. मंटू कुमार, नागेंद्र पंडित, मनीषा गुप्ता, मधु सिंह और सूर्य देव रॉय ने काव्य पाठ किया और डॉ राजेश मिश्रा,पंकज सिंह और राजेश तिवारी ने लोकगीत प्रस्तुत किया। संस्कृति नाट्य मंच की ओर से प्रेमचंद की कहानी ‘पंच परमेश्वर’ और ‘धर्मयुद्ध’ नाटकों का मंचन हुआ। इसमें प्रियांगु पांडेय, राजेश सिंह, निखिता पांडेय, सुनील यादव, विकास मिश्रा, सुशील सिंह, स्वीटी दास, अपराजिता विनय, सूरज शर्मा, मो. हाशिम, गौरव गोंड, विशाल बैठा, निखिल विनय, चंदन भगत, नेहा राय, मो. इज़राइल, हिमांशु राय, श्रुति दास, अंजलि साव, संटु चौधरी, अंकित साव और रवि पंडित ने अभिनय किया। कार्यक्रम का संचालन करते हुए डॉ. संजय जायसवाल ने कॉलेज के प्रस्ताव पर सहमति दर्ज करते हुए कहा कि प्रेमचंद का एक सपना यह था कि सबको शिक्षा का अधिकार मिले। लोकतांत्रिक तरीके से शिक्षा को व्यापक समाज का हिस्सा बनाना होगा। इस अवसर पर डॉ. श्रीकांत द्विवेदी, सिद्धार्थ पासवान,सुमन शर्मा, नवनिता दास, रूपेश कुमार यादव सहित सैकड़ों साहित्यप्रेमी और जनप्रतिनिधि मौजूद थे।

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