बच्चों को सुनना और समझना जरूरी है

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यह परीक्षाओं का मौसम है और अब तो प्रदर्शनों का मौसम भी चल रहा है। ये जरूरी है कि हम अपनी महत्वाकाँक्षाओं का बोझ बच्चों पर न लादें मगर ये भी जरूरी है कि बच्चों को तैयार करें कि वे अपनी पढ़ाई को गम्भीरता से लें। हमारे यहाँ उल्टा होता है..खासकर बंगाल में परीक्षाओं के दौरान बच्चों का इतना अधिक ख्याल रखा जाता है कि वे अभिभावकों पर पूरी तरह निर्भर हो जाता हैं तो दूसरी तरफ ऐसे अभिभावक भी हैं जिनको पता ही नहीं है कि उनके बच्चे पढ़ते किस कक्षा में हैं…यह दोनों ही परिस्थितियाँ सही नहीं हैं। जरूरी है कि बच्चों को मुखर बनाया जाए मगर ये भी जरूरी है कि मुखरता को उदंडता में न बदलने दिया जाये..सवाल यह है कि क्या हम इन बातों का ख्याल रखते हैं। हममें से कितने हैं जो बच्चों को सुनते हैं और सुन भी लेते हैं तो क्या उनको समझते भी हैं..दरअसल, सुनना और समझना तो जरूरी है मगर उससे भी ज्यादा जरूरी है कि उनको सही और गलत का फर्क समझाया जाए। अधिकतर अभिभावक वक्त के अभाव में अपना फोन बच्चों को थमाकर समझ लेते हैं कि उनकी जिम्मेदारी खत्म हो गयी..क्या तकनीक पर जरूरत से ज्यादा निर्भर होना सही है? सच तो यह है कि मानवीय स्पर्श की जगह कोई मशीन नहीं ले सकती…फोन से होमवर्क हो भी जाए मगर परिवार और दोस्तों का जो सहयोग है..उसकी जगह कोई नहीं ले सकता…खासकर एक साथ होमवर्क करना…परीक्षाओं को जश्न की तरह देखना…हमें एक बार फिर पीछे मुड़कर देखने की जरूरत है…बच्चों को समझने की जरूरत है…।

बहुत से बच्चे ऐसे हैं जो प्रतिभाशाली हैं मगर उनके पास कोई ऐसा शिक्षक नहीं जो उनको राह दिखा सके..इस समस्या को ध्यान में रखकर शुभजिता लायी है…क्लासरूम। क्लासरूम की परिकल्पना स्कूलों में शिक्षकों की कमी और आर्थिक आधार पर वंचित बच्चों को ध्यान में रखकर की गयी है जो प्रतिभाशाली हैं मगर शिक्षा से वंचित हैं,,,बहुत से लोग ऐसे होंगे जो शिक्षक बनने की ख्वाहिश रखते हैं मगर बन नहीं सके। शिक्षा असीम है और अपार है…वह सिर्फ किताबों में ही नहीं है..वह कला में, साहित्य में, इतिहास में…कौशल में..खेल में और न जाने कितनी चीजों में शामिल है।
क्लासरूम में 15 से 30 मिनट की रिकॉर्डेड कक्षा होगी जिसका प्रसारण शुभजिता यूट्यूब पर होगा… और वेबसाइट पर भी होगा…लिखित सामग्री हो तो भी स्वागत। इसके बाद .बच्चों के पास आपके विषय से सम्बन्धित प्रश्न हों तो आप उनके उत्तर देंगे…यानी बच्चों की ही नहीं बल्कि आपकी दुनिया भी बडी हो सकती है. विषय का बन्धन नहीं है…वह गणित से लेकर विज्ञान…या कुछ भी हो सकता है..बोर्ड भी कोई भी हो सकता है। आप हमें अपना वीडियो किसी एक पाठ पर बनाकर भेज सकते हैं और शुभजिता के साथ उसे रिकॉर्ड भी कर सकते हैं….आप शिक्षक हैं,,,,पढ़ा रहे हैं तो अच्छी बात है मगर आप शिक्षक नहीं हैं और आपको विषय औऱ क्षेत्र का ज्ञान है तो आप इस अभियान से जुड़ सकते हैं…युवा शिक्षकों और शोधार्थियों का भी स्वागत है

किताबों को पलटने की जरूरत है…कोलकाता में पुस्तक मेला लगा है…जाइए और बच्चों को लेकर जाइए…बहुत से सवालों के जवाब किताबों से ही मिल जाते हैं और मिल सकते हैं।

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