बड़े भाग ते फागुन आयो री”  होली के रंग अर्चना के संग

0
264
कोलकाता :  “अर्चना” संस्था की ओर से अर्चना संस्था में अॉन-लाइन जूम पर कार्यक्रम किया गया। गीत – संगीत – हास्य व्यंग्य  विविध प्रकार की रचनाएं इस कार्यक्रम की विशेषता रही। भोजपुरी , गुजराती, हिंदी, राजस्थानी, ब्रज, अवधी और चुनावी होली के गीत आदि विभिन्न भाषाओं के होली गीतों की प्रस्तुति रही। भारत के विभिन्न लोकगीतों ने कार्यक्रम को रस राग से पूर्ण कर दिया। घघन- घघन बाजे मंजीरे मृदंग (इंदु चांडक), आ गई आज ननदिया झगड़े आधी रात (सुशीला चनानी), चाल चंदा जागिए पर भीनी-भीनी चांदनी मिल रास रींवा जी फागण में – राजस्थानी गीत -( हिम्मत चौरडिया), मेरे कान्हा जै आए पलट के मैं तो खेलूंगीं होरी डटके (विद्या भंडारी), रंगों के मेले हैं, जहां में अकेले हैं ( नौरतन मल भंडारी ), होली का त्योहार है /छाई बाहार है /चुनावों का बाजार है (मीना दूगड़), मोहे पनघट पे नंदलाल छेड़ गयो रे (वसुंधरा मिश्र), चालें छे पिचकारी फागण फोरमतो आवियो (गुजरात से – भारती मेहता और बहू भैरवी ), होली के रसिया न रंग लगाओ (संगीता चौधरी) आदि सदस्याओं ने सभी के मन मोह लिए। हास्य व्यंग्य रचना में वरिष्ठ कवि बनेचंद मालू नेे समाज पर बहुत ही करारा व्यंग्य सुनाया। इस अवसर पर सुशीला चनानी ने रसभरी (भारती मेहता), इंदु चांडक (डाबर हनी), मंगल ग्रह तक जाऊंगी(हिम्मत चौरडिया), एक चतुर नार बड़ी होशियार (वसुंधरा मिश्र), कदम कदम बढाए जा (संगीता चौधरी), बिग बॉस( विद्या भंडारी), जोडी़ क्या बनायी (नौरतन मल भंडारी), देखन में छोटे लगे घाव करे गंभीर (मीना दूगड़), जिन खोजा तिन पाइयां (बने चंद मालू),सिद्ध हस्त कलाकार और प्रिय ज्ञानेश्वरी (सुशीला चनानी) को टाइटल दिए गए। अंत में, वसुंधरा मिश्र ने हास्य व्यंग्य रचना द्वारा मास्क पहन कर होली खेलने की हिदायत दी। कार्यक्रम का संचालन और संयोजन सुशीला चनानी और तकनीकी सहयोग दिया इंदु चांडक ने। वरिष्ठ सदस्या विद्या भंडारी ने धन्यवाद ज्ञापन दिया।

अटैचमेंट क्षेत्र

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

ten − three =