बदलते समय की माँग है मोबाइल पत्रकारिता

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सुषमा त्रिपाठी कनुप्रिया
समय के साथ पत्रकारिता बदली है और बदला है काम करने का तरीका भी। एक समय था जब पत्रकारिता का मतलब कागज और कलम था, फिर माइक आया और अब आया है मोबाइल। अगर वीडियो पत्रकारिता की बात की जाए तो बड़े – बड़े कैमरे और माइक के बगैर पत्रकार काम करने के बारे में सोच नहीं पाते थे और अकेले काम कर पाना, यह तो बहुत कठिन था। पत्रकार और कैमरापर्सन के बीच तालमेल का अभाव कई बार काम करने का मजा खत्म कर देता था मगर अब मोबाइल का समय है। इस छोटे से उपकरण ने जहाँ सब कुछ बदला है, वहीं बदल दी है पत्रकारों की दुनिया। आज सोशल मीडिया को मजबूती देने में इस छोटे से उपकरण का बहुत बड़ा योगदान है, वहीं इसने एक साधारण से व्यक्ति में भी खबरों की दुनिया से जोड़ने की लालसा उत्पन्न कर दी है और इस इच्छा को पूरा करने में सहायक भी बना है।
यही कारण है कि मोबाइल पत्रकारिता की माँग तेजी से बढ़ रही है। यह सही है कि मोबाइल लेकर चलने वाले पत्रकारों को अब भी खारिज किया जाता है मगर अब यह विरोध खत्म भी हो रहा है क्योंकि मोबाइल, खबरों की समझ, कुछ अच्छा करने की ललक और मीडिया मिल जाएं तो एक स्वस्थ और सक्रिय पत्रकारिता की मुहिम तेजी से आगे बढ़ सकती है। इस जरूरत को समझते हुए हाल ही में कोलकाता प्रेस क्लब ने आयोजित मोबाइल पत्रकारिता कार्यशाला मोजो। पत्रकारों की दक्षता बढ़ाने के लिए आयोजित इस पत्रकारिता में हमें भी भाग लेने का अवसर मिला और तब लगा कि जो कुछ सीखा, उसे साझा भी किया जाए जिससे इसके बारे में जानकारी और विस्तृत हो और लोगों को लाभ मिले। बांग्लादेश के चटग्राम विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर राजीव नन्दी ने इस कार्यशाला में प्रशिक्षण दिया। इस कार्यशाला के आयोजन में प्रेस क्लब के अध्यक्ष स्नेहाशीष सूर के साथ, सचिव किंशुक प्रामाणिक और वरिष्ठ पदाधिकारी निताई मालाकार का विशेष योगदान रहा।
मोबाइल का अर्थ यहाँ क्या है
मोजो नामक इस मोबाइल पत्रकारिता कार्यशाला में बहुत कुछ नया सीखने को मिला। तो जो जानते हैं मोबाइल पत्रकारिता के बारे में। सबसे पहले तो यह समझना होगा कि यहाँ मोबाइल का मतलब सिर्फ उपकरण भर नहीं बल्कि चलायमान अर्थात चलने – फिरने या चल या मूवेबल प्रवृति से है। मोबाइल भी हमारे साथ भ्रमण ही करता है और इसके जरिए हम कहीं भी, कभी भी बगैर विशेष तैयारी के कुछ बुनियादी उपकरणों की मदद से ही अपना काम शुरू कर सकते हैं। अगर आपके पास, पेन, नोटपैड और मोबाइल है तो यह काम आपके लिए आसान है।
तो हमें क्या चाहिए इसके लिए
सबसे पहले तो आपके पास एक अच्छा मोबाइल होना चाहिए क्योंकि मोबाइल पत्रकारिता की यह संरचनागत आवश्यकता है। एक्शन प्रो कैमरा, गिम्बल, कॉलर माइक, टाई पॉड (अगर लम्बे समय तक कार्यक्रम कवर करना है), ,सेल्फी स्टिक, गोरिल्ला पॉड, मोनोपॉड, ग्रिप, अच्छा हेडफोन, (आजकल गले में जो लटकाने वाले हेडफोन हैं, वह बेहतर हैं), स्टोरेज के लिए मेमोरी कार्ड, मोबाइल माउंट, पावर बैंक, प्रकाश के लिए लाइट। इसे हम जरूरत के अनुसार ही उपयोग करेंगे। खबर शूट करने से पहले अपने फोन का स्टोरेज खाली करना न भूलें। अगर देखा जाए तो कॉलर माइक, पावर बैंक, छोटा टाइपॉड और गिम्बल भी मोबाइल पत्रकारिता की जरूरतें पूरी कर सकता है। यह आपको ऑनलाइन भी मिल सकता है और बाजारों में भी जहाँ छूट के साथ ये उपलब्ध हैं मगर हम आपको कहेंगे कि जो भी खरीदें, गुणवत्ता का ध्यान जरूर रखें।
सामान तो हो गया, अब
सुविधाओं और उपकरणों से तस्वीरें खींची जा सकती हैं मगर आप जब खबरों की दुनिया और खबरों के व्यवसाय में हैं तो मुद्दे की बात यह है कि आपके पास सोच और शोध दोनों होने चाहिए। आप जिस विषय को उठा रहे हैं, उसकी समझ भी होनी चाहिए। विषय का इतिहास और उसकी समसामायिक जानकारी का होना जरूरी है। पत्रकार हैं तो हर हाल में अपने पेशे के प्रति गम्भीर रहिए, आत्मविश्वास हो मगर अहंकार नहीं, अपनी बात को कहने और समझाने का तरीका होना जरूरी है। आँकड़ों की बात कर रहे हैं तो सम्भव हो तो उसे सत्यापित करें यानी सत्यता जाँच लें या फिर सम्भावित या स्त्रोत का नाम बताते हुए अपनी बात कहें।


फुटेज और शॉर्ट्स कितने लें
एक फिल्म भी बनती है तो उसके लिए लम्बे और लम्बी अवधि के शॉर्टस लिए जाते हैं मगर होती वह 3 घंटे की ही है। इसी तरह मोबाइल पत्रकारिता के समय भी आपके पास हर एंगल के फुटेज होने चाहिए..लम्बे और छोटे शॉर्ट्स, कट शॉर्ट्स, स्टोरी के अनुसार फुटेज लें। क्लोजअप शॉर्ट्स लें। वीडियो की अवधि बहुत बड़ी न हो। खबर के लिए 3 से 4 स्टोरी के लिए 5 से 10 या उससे अधिक हो सकता है और यह स्टोरी पर निर्भर करता है। फेसबुक या इन्स्टाग्राम पर 4 मिनट की स्टोरी सही रहती है। जूम की जगह ऑप्टिकल जूम का उपयोग करें। फोकस को लॉक करें जिससे काम करते हुए लैंडस्केप कहीं पोट्रेट में न बदल जाये। मोबाइल को साइलेंट या एरोप्लेन या डू नॉट डिस्टर्ब मोड पर रखना सही होगा। मोड कोई भी एक ही रखें, लैंडस्केप हो तो लैंडस्केप हों, पोट्रेट हो तो पोट्रेट ही रखें।
यह ऐप आपकी सहायता के लिए
वीडियो एडिटिंग – क्विक, काइनमास्टर, एक्शन डायरेक्टर, पावर डायरेक्टर, एडोब प्रीमियर,
फोटोग्राफी ऐप – स्नैप सीड, पिक्सेल साउंड ऐप,
ध्वनि सम्पादन ऐप – रिक फोज 2, वॉयस रिकार्डर प्रो
भेजें
व्हाट्सऐप, फेसबुक, इन्स्टाग्राम,
सहेजें
मेमोरी कार्ड, ड्रॉप बॉक्स,
करना यह है कि लगातार अभ्यास करते रहें। अभ्यास जितना बेहतर होगा, आपके वीडियो भी उतने ही बेहतर होंगे। सम्पादन बहुत अनिवार्य प्रक्रिया है। वीडियो बनाते समय नैतिकता, ईमानदारी, उद्देश्य, प्रभाव इन सबका बहुत ध्यान रखना जरूरी है क्योंकि यही आपको पेशेवर भी बनाएगा और पत्रकार भी।
शीषर्क
शीर्षक छोटा और आकर्षक होना चाहिए।
हैशटेग में प्रासंगिक शब्दों का उपयोग करें।

आज मोबाइल पत्रकारिता का सही उपयोग आपको लोकप्रिय बनाने के साथ ही आर्थिक रूप से सक्षम बना सकता है। सोशल मीडिया माध्यमों पर मॉनेटाइज होने के बाद आपको भुगतान मिलता है, जरूरत सही दिशा में और सही तरीके से अभ्यास के साथ प्रयास करने की है।

 

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