“बस मेरा सम्मान करो”

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-दीपा ओझा

नहीं मांगती कुछ मैं तुमसे
बस मेरा सम्मान करो
सपना सबके जैसा ही
मेरा भी साकार करो
अपने जैसा समझ मुझे भी
मेरा ना तुम अपमान करो
सुनो समाज हितैषियों
गर कुछ ना कर पाओ तो
बस इतना तुम ध्यान करो
केवल मेरा तुम मान करो
बस मेरा सम्मान करो

विनती नहीं
है मेरी ये घोर गर्जना
इसको ना नज़रअंदाज़ करो
सुनो धर्म पुजारियों
कर अधर्म तुम
अब ना धर्म की बात करो
केवल मेरा तुम मान करो
बस मेरा सम्मान करो

तुम धर्म- धर्म चिल्लाते हो
धर्म का मर्म समझ क्या पाते हो
पूज कर शक्ति स्वरूपा जगदम्बा को
निज मिथ्या शक्ति पर
अति अभिमान जताते हो

अबला कह मुझे
खुद को बलवान बताते हो
रख पर्दे में मुझको तुम
सुरक्षा का एहसान जताते हो
रख घर में महंगी वस्तु सा
सुख- सुविधा का गान सुंनाते हो

तो सुनो अब यह कथन सुनो
जागीर नहीं तुम्हारी सम्पत्ति नहीं मैं
लाज- साज सम्मान हूँ कुल की
मुझको तुम शिरोधार्य करो
केवल मेरा तुम मान करो
बस मेरा सम्मान करो

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