बहुओं पर हुए पहले सर्वे में खुलासा – बहुएँ नहीं तोड़ती संयुक्त परिवार

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75 प्रतिशत बहुओं ने माना- झगड़े से परिवार का प्रेम नहीं घटता
आईआईटी गांधीनगर ने सभी धर्मों के 453 संयुक्त परिवार में बहुओं की भूमिका पर सर्वे किया
अहमदाबाद : देश में संयुक्त परिवार टूट रहे हैं और उसकी मुख्य वजह बहुएं हैं, ऐसी मान्यता पूरी तरह गलत है। आईआईटी गांधीनगर ने अहमदाबाद के 453 संयुक्त परिवारों पर किए गए सर्वे के बाद यह निष्कर्ष निकाला है। सर्वे में 75% बहुओं ने माना कि संयुक्त परिवार में झगड़े होते हैं, लेकिन इस कारण परिवार के सदस्यों का आपसी प्रेम कम नहीं होता। शोधकर्ता और आईआईटी गांधीनगर की असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. तनिष्ठा सामंत ने कहा कि देश में वृद्धाश्रम की बढ़ती संख्या के कारण सर्वेक्षण की यह थीम चुनी गई। इसके लिए इंडियन काउंसिल ऑफ सोशल रिसर्च का भी सहयोग लिया गया। देश में इसके पहले बहुओं की भूमिका पर कोई आधिकारिक सर्वे नहीं हुआ है। इसमें 50% लोगों ने यह भी माना कि परिवार तो संयुक्त ही होना चाहिए।

50 प्रतिशत  ने माना- परिवार संयुक्त ही होना चाहिए

डॉ. सामंत ने कहा कि देश में 86% परिवार संयुक्त रूप से रहते हैं। इसके बावजूद वृद्धाश्रमों का प्रमाण अधिक है। मौजूदा समय के बच्चे भी मानते हैं कि आर्थिक संकट के समय परिवार के बड़े-बुजुर्ग ही मददगार साबित होते हैं। सर्वे में हिंदू, मुस्लिम, सिख, ईसाई और जैन धर्म के संयुक्त परिवार शामिल थे। इसमें तीन पीढ़ियों के संयुक्त परिवार में रह रहे 86% और 2 पीढ़ी के साथ रहने वाले 14% परिवार शामिल किए गए। सर्वे में बातचीत के लिए 40 साल से अधिक उम्र के लोगों को ही जवाब के लिए चुना गया था।

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