बांग्ला सिनेमा का एक युग समाप्त, नहीं रहे वयोवृद्ध अभिनेता सौमित्र चटर्जी

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कोलकाता :   दिग्गज बांग्ला फिल्म अभिनेता सौमित्र चटर्जी (85) का रविवार को कोलकाता के अस्पताल में निधन हो गया। सौमित्र को करीब एक महीने पहले कोरोना संक्रमित होने के बाद अस्पताल में भर्ती कराया गया था। तब से उनकी हालत में उतार-चढ़ाव चल रहा था। शनिवार को अस्पताल ने उनकी हालत बेहद गंभीर बताई थी। बुलेटिन में कहा था कि कोई चमत्कार ही उन्हें बचा सकता है।
सौमित्र को 6 अक्टूबर को अस्पताल लाया गया था। 7 अक्टूबर को उनकी कोरोना रिपोर्ट पॉजिटिव आई। 15 अक्टूबर को वे कोरोना से मुक्त हो गए थे। चटर्जी ने सितंबर के आखिरी हफ्ते में ही एक सीरीज की शूटिंग पूरी की थी। वे परमब्रत चट्टोपाध्याय की फिल्म ‘अभिज्ञान’ की शूटिंग भी कर रहे थे। इसके अलावा वह अपनी बायोपिक और वृत्तचित्र पर भी काम कर रहे थे।
सौमित्र को खासकर ऑस्कर विजेता निर्देशक सत्यजीत रे के साथ कोलेबोरेशन के लिए जाना जाता है। दोनों ने साथ में 14 फिल्मों में काम किया था। ये बांग्ला फिल्में हैं – ‘अपुर संसार’, ‘देवी’, ‘तीन कन्या’, ‘अभिजन’, ‘चारुलता’, ‘कुपुरुष’, ‘अरंयेर दिन रात्रि’, ‘अशनी संकेत’, ‘सोनार केला’, ‘जोय बाबा फेलुनाथ’, ‘हीरक राजार देशे’, ‘घरे बैरे’, ‘गणशत्रु’ और ‘शाखा प्रोशाखा’।
चटर्जी ने अपने करियर में करीब 100 फिल्मों में काम किया है, जिनमें दो हिंदी फिल्में ‘निरुपमा’ और ‘हिंदुस्तानी सिपाही’ भी शामिल हैं। उन्होंने हिंदी में ‘स्त्री का पत्र’ नाम से फिल्म डायरेक्ट भी की है।
राष्ट्रपति-प्रधानमंत्री ने शोक जताया
राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने कहा, ‘सौमित्र चटर्जी के निधन से भारतीय सिनेमा ने एक दिग्गज अभिनेता खो दिया है। अपु ट्रायोलॉजी और सत्यजीत राय की फिल्मों में यादगार अभिनय के लिए याद किया जाएगा।’ 2012 में चटर्जी को मनोरंजन जगत का सबसे बड़ा सम्मान दादा साहब फाल्के सम्मान मिला। तीन बार राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार से नवाजे गए। 2004 में भारत सरकार ने सौमित्र को पद्म भूषण से सम्मानित किया।

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