बुद्ध से कबीर तक…यात्रा व संगोष्ठी का आयोजन

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वाराणसी से प्रशस्ति तिवारी की रपट
वाराणसी : बुद्ध और कबीर पूर्वांचल के ऐसे प्रतीक रहे हैं जिन्होंने पूरी दुनियां में शांति, प्रेम, सद्भाव और भाईचारे की बातें सिखाई। उसी पूर्वांचल की धरती से साझी संस्कृति और सामाजिक सौहार्द की एक यात्रा पिछले तीन सालों से देश के अलग अलग भागों में होती आ रही है। बुद्ध से कबीर तक ट्रस्ट देश की महान विरासत को संजोकर उन्हें लोगों के बीच पहुँचाने का कार्य कर रहा है। ट्रस्ट की इस साल की पहली यात्रा उत्तर प्रदेश के गोरखपुर क्षेत्र में आयोजित की गई। जिसमें पाँच दिनों तक यह यात्रा, गोरखपुर, कुशीनगर संत कबीर नगर और मगहर में निकाली गयी, जिसमें मुख्य रूप से तमाम शिक्षण संस्थानों व विभिन्न संस्थाओं ने बढ़-चढ़ कर भाग लिया। ट्रस्ट के संरक्षक डॉ विनोद मल्ल, एडीजीपी गुजरात ने इस यात्रा के उद्देश्य को बताते हुए बुद्ध, कबीर और देश के अन्य विचारकों के मार्फ़त वर्तमान परिस्थिति में देश में एकता, प्रेम, शांति और सहिष्णुता को बनाए रखने की बातें लोगों तक पंहुचाई। संस्था और यात्रा के संयोजक शैलेन्द्र कबीर ने बताया कि आज के समय में लोगों के बीच वैमनष्य और द्वेष का अंकुरण तेजी से होता जा रहा है, ऐसे में हमारा कर्तव्य बनता है कि उन्हें अपने देश के गौरवशाली इतिहास से परिचित कराकर बुद्ध, कबीर, विवेकानंद और गांधी जैसे महापुरुषों के विचारों का खासकर युवाओं में प्रत्यारोपण किया जाय और यही कार्य बुद्ध से कबीर तक संस्था अपने यात्राओं और कार्यक्रमों के माध्यम से कर रही है। ट्रस्टी देवयानी इस यात्रा के समापन कार्यक्रम के बारे में बताया कि पाँच दिनों तक चलने वाली इस यात्रा का भव्य समापन समारोह गत 22 फरवरी को दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय के दीक्षा भवन में किया गया जहां पर “संत आंदोलन की सामाजिक प्रासंगिकता: बुद्ध कबीर और नाथ सम्प्रदाय का योगदान” विषय पर एक सेमिनार हुआ जिसके मुख्य वक्ता रचनाकार और लोककर्मी सुभाष चंद्र कुशवाहा थे। इस दौरान बनारस से आईं प्रसिद्ध कत्थक नृत्यांगना प्रशस्ति तिवारी के कबीर पर आधारित नृत्य प्रस्तुति ‘बंदगी’ ने उपस्थित दर्शकों को भावविभोर कर दिया। बुद्ध से कबीर तक बैण्ड के कबीर, गोरख के गीत और सूफी गायन ने लोगों का मन मोह लिया। वर्ष भर चलने वाली बुद्ध से कबीर तक ट्रस्ट के कार्यक्रमों और यात्राओं का सिलसिला ऐसे ही जारी रहेगा।

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