बोई पाड़ा को भी है शिक्षण संस्थानों के खुलने का इन्तजार

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कोलकाता : कोविड -19 महामारी के कारण जीवन काफी बदल गया है। खासकर लॉकडाउन के बाद व्यवसायियों को काफी धक्का पहुँचा मगर अब लोग चाहते हैं कि सुरक्षा नियमों का पालन करते हुए अब संस्थान खोले जाएं। सीआईएससीई ने तो बाकायदा मुख्यमंत्रियों को चिट्ठी लिखकर स्कूलों को दोबारा अगले साल खोलने की इजाजत माँगी है मगर बंगाल में राज्य सरकार शिक्षण संस्थानों को फिलहाल खोलने के मूड में नहीं है। वैसे स्कूल खुलने या न खुलने का असर सिर्फ विद्यार्थियों, शिक्षकों या अभिभावकों पर नहीं पड़ रहा बल्कि ऐसा एक और वर्ग है जो शिक्षण संस्थानों के खुलने का इन्तजार बेसब्री से कर रहे हैं। नहीं समझे…हम बात कर रहे हैं किताबों के मोहल्ले यानी कॉलेज स्ट्रीट बोई पाड़ा की। इस समय जहाँ यहाँ दुकानदारों के पास किसी से बात करने की फुरसत नहीं रहती मगर अब ये दुकानदार शिक्षण संस्थानों के खुलने के इन्तजार में हैं। लॉकडाउन के कारण किताबों के कारोबार तो असर पड़ा ही था, उस पर से अम्फान के कारण स्थिति काफी बिगड़ गयी है। एशिया के सबसे बड़े पुस्तक बाजार को इन दोनों स्थितियों के कारण काफी नुकसान उठाना पड़ा। अम्फान के कारण 60 लाख रुपये से अधिक कीमत की पुस्तकें भीगकर नष्ट हो गयीं और व्यवसायी इन भीगी हुई किताबों को बटोरते दिखे।

पब्लिशर्स एंड बुक सेलर्स गिल्ड ने खुद माना कि नुकसान करोड़ों का हुआ है और पुस्तक बाजार की मदद के लिए गिल्ड आगे आया। सोशल मीडिया पर कॉलेज स्ट्रीट बोई पाड़ा को बचाने की मुहिम चली। गिल्ड की ओर से प्रधानमंत्री और सीएम को पत्र लिखा गया और अनुदान भी एकत्रित किया गया मगर पुस्तक विक्रेताओं को बहुत ज्यादा राहत मिली हो, ऐसा लग नहीं रहा। बोई पाड़ा पुस्तक विक्रेताओं के संगठन के वरिष्ठ पदाधिकारी अचिन्त्य दासगुप्ता की मानें तो लॉक डाउन और अम्फान से जो नुकसान हुआ है, उसकी भरपाई आसान नहीं है। पुस्तक बाजार अभी भी नुकसान में है मगर नये स्टॉल की बात हुई, लोग आ रहे हैं मगर स्कूल – कॉलेज खुलने का इन्तजार अभी भी है।
वहीं एक अन्य पुस्तक विक्रेता तपन पालित ने कहा कि अब स्कूल – कॉलेज खुले तब ही स्थिति सामान्य हो सकती है। राज्य सरकार ने आर्थिक सहायता तो दी है मगर अभी भी हालात सही नहीं हैं। पुस्तक विक्रेताओं को बोई पाड़ा के गुलजार होने का इन्तजार है और यही इन्तजार हमें भी है और उम्मीद है कि यह इन्तजार जल्द खत्म होगा।

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