भवानीपुर कॉलेज ने मनाया कारगिल दिवस, याद किये गये कैप्टन विक्रम बत्रा

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कोलकाता : भवानीपुर एजुकेशन सोसाइटी कॉलेज की एन सी सी 31 बंगाल बीएन एनसीसी और नम्बर एक (बी) एयर स्क्वेन्ड्रान ने मिलकर ऑन-लाइन ‘कारगिल विजय दिवस’ मनाया। परम वीर चक्र कैप्टन विक्रम बत्रा के पिता गिरधारीलाल बत्रा और लेफ्टिनेंट सूबेदार मेजर योगेन्द्र सिंह यादव इस कार्यक्रम में उपस्थित रहे। योगेन्द्र सिंह यादव को सबसे कम उम्र में परमवीर चक्र मिला। कार्यक्रम के प्रारंभ में कॉलेज के डीन प्रो दिलीप शाह और टीआईसी डॉ शुभब्रत गंगोपाध्याय ने अमर जवान ज्योति पर देश के लिए अपने प्राणों का बलिदान देने वाले सभी शहीदों को नमन किया। प्रो. शाह ने अतिथियों का स्वागत किया। कॉलेज में होने वाले सामाजिक कार्यों की गतिविधियों पर चर्चा की। कारगिल विजय दिवस के अवसर पर कैप्टन विक्रम बत्रा के पिता ने अपने शहीद बेटे की असाधारण प्रतिभा और देश के प्रति उनके जज्बातों और जुनून के विषय में बचपन से कैप्टन तक की यात्रा के विषय में विस्तार से जानकारी दी कि कैसे वीरता से वे अपने दुश्मन के सैनिकों से लड़ते हुए शहीद हुए जो आज के युवाओं के लिए प्रेरणादायी है।कैप्टन विक्रम ‘टाइगर ऑफ ड्रास’ , ‘दि लॉयन ऑफ कारगिल’ और ‘कारगिल हीरो’ के नाम से विख्यात हैं। एक पिता के रूप में वे हमेशा यही चाहते थे कि उनके बच्चे साहसी हों। कारगिल में उनके नाम से बत्रा टावर है। गिरधारी लाल बत्रा की पुस्तक ‘परमवीर विक्रम बत्रा दि शेरशाह ऑफ कारगिल ‘में कैप्टन विक्रम पर फिल्म शेरशाह भी बनी है जो 12 अगस्त को रिलीज़ भी हो रही है।
कैप्टन विक्रम ने अपने पिता से वादा किया था ‘डैडी मैं या तो तिरंगा फहरा कर आऊँगा या फिर तिरंगे में लिपट कर आऊँगा।’ पिता गिरधारीलाल खुश हैं कि उनके बेटे ने दोनों ही वादे निभाए। इस अवसर पर देश भक्ति गीत, कारगिल पर तिरंगे फहराने के पोस्टर प्रतिस्पर्धा भी हुई। 1999 में हुए कारगिल युद्ध के तीन ऑपरेशन विजय, तलवार और सफेद सागर के विषय में एनसीसी जानकारी दी।
कॉलेज की कोऑर्डिनेटर प्रो मीनाक्षी चतुर्वेदी ने 19 वर्ष की छोटी आयु में परमवीर चक्र प्राप्त करने वाले लेफ्टिनेंट सूबेदार मेजर योगेन्द्र सिंह यादव का परिचय दिया और उनकी वीरता की चर्चा की। 17 गोलियों के लगने से घायल और छाती पर भी एक गोली खाने वाले योगेन्द्र सिंह ने दुश्मनों के सामने घुटने नहीं टेके। अंत तक लड़े और देश को विजय दिलाई। ऐसे वीर और जांबाज को सुनने का अवसर मिला। योगेन्द्र सिंह ने अपने वक्तव्य में कारगिल की उस पहाड़ी के विषय में जानकारी दी जहाँ दो रात चलकर पहुँचे और दुश्मन सेना से लड़े, अपने छह साथियों को खोया। फिर भी हौसला न खोते हुए पाँच दुश्मन सैनिकों को अकेले मारा। उस समय आँखों के सामने बस देश की विजय का मिशन होता है। बचपन से देश के लिए कुछ करने वाले योगेंद्र सिंह का सपना इतनी जल्दी पूरा होगा ऐसा उन्होंने नहीं सोचा था जबकि परमवीर चक्र भी मिला। हिन्दुस्तान की मिट्टी में जन्म लेना सार्थक हो गया। हर भारतवासी को माँ भारती को धन्यवाद देना चाहिए। मेजर योगेन्द्र ने कहा कि हमारे अवचेतन मन में जो बात बैठ जाती है उसमें आस्था, विश्वास और स्वाभिमान हो तो व्यक्ति ऐसे असंभव कार्य भी कर जाता है जो उसके शारीरिक सामर्थ्य से अधिक होता है। एनसीसी के कैडट और भवानीपुर कॉलेज के विद्यार्थियों को देश प्रेम के लिए प्रोत्साहित किया। कारगिल युद्ध के दौरान स्त्री योद्धाओं फ्लाइट कमांडो गुंजन सक्सेना और प्रथम हेलीकॉप्टर चलाने वाली श्री विद्या राजन की अनकही कहानी भी सुनी गयी ।
पूजा मिश्रा की देश भक्ति कविता का पाठ कैडट अंजली ने किया। कैडट कैप्टन आदित्य राज और कैडट अरित्रिका दूबे ने एनसीसी बटालियन के सभी कैडट को धन्यवाद दिया, अंत में देश भक्ति गीत की नृत्य प्रस्तुति में तिरंगा फहराया गया । एनसीसी की समन्वयक प्रो. मीनाक्षी चतुर्वेदी ने धन्यवाद ज्ञापन दिया। कार्यक्रम का संचालन कैडट सबिया ने किया। डॉ वसुंधरा मिश्र ने कार्यक्रम की जानकारी दी ।

 

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