महिलाओं के मेनोपॉज की तरह पुरुषों को होता है एंड्रोपॉज

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हजार में 5 पुरुष सेक्स हार्मोन की कमी से जूझ रहे
पुरुषों में होने वाले एंड्रोपॉज की समस्या महिलाओं से कई मायनों में अलग

महिलाओं में मेनोपॉज पर तो खूब बात होती है लेकिन पुरुषों में एंड्रोपॉज के बारे में कम ही लोग जानते हैं। दरअसल मसला ये है कि एंड्रोपॉज पुरुषों की यौन ताकत से जुड़ा है इसलिए इसपर बात नहीं होती। विशेषज्ञों के मुताबिक, 40 साल की उम्र के बाद हर साल पुरुषों के टेस्टोस्टेरोन में 3% तक की कमी होती जाती है। उम्र के बढ़ने पर इस कमी से सामना होना तो सामान्य बात हो सकती है लेकिन अब गलत लाइफस्टाइल के चलते युवा भी स्पर्म काउंट में कमी से जूझ रहे हैं। वहीं, 60 साल की उम्र के बाद करीब 20% पुरुष एंड्रोपॉज से गुजरते हैं। 70% पुरुषों में इस कमी का पता ही नहीं चलता। ब्रिटिश पब्लिक हेल्थ सिस्टम के अनुमान के मुताबिक करीब एक हजार में से 5 लोग टेस्टोस्टेरोन की कमी से जूझते हैं।

क्या है एंड्रोपॉज और मेनोपॉज में फर्क
पुरुषों में होने वाले एंड्रोपॉज की प्रॉब्लम महिलाओं से कई मायनों में अलग है। महिलाओं में मेनोपॉज के दौरान एस्ट्रोजन हॉर्मोन्स की कमी आने लगती है। वहीं, पुरुषों के शरीर में एक उम्र के बाद टेस्टोस्टेरोन हॉर्मोन्स की कमी होने लगती है। हॉर्मोन्स का घटना उम्र के साथ धीरे-धीरे होता है। महिलाओं में मेनोपॉज 45-55 की उम्र में देखने को मिलता है, जबकि पुरुषों में 50 से 60 साल की उम्र के बीच। हेल्थलाइन के आंकड़ों के अनुसार एडल्ट लाइफ यानी 20 से 30 साल की उम्र के बीच टेस्टोस्टेरोन सबसे ज्यादा होता है, जो उसके बाद हर साल 1 पर्सेंट की दर से कम होने लगता है।
पुरुषों में एंड्रोपॉज की वजह
उम्र के साथ होने वाली इस सामान्य प्रोसेस में टेस्टोस्टेरोन कम होने की कंडीशन को हाइपोगोनाडिज्म कहा जाता है। डायबिटीज, एचआईवी, फेफड़े से जुड़ी बीमारी, बढ़ता मोटापा, ज्यादा धूम्रपान, तनाव और खान-पान की खराब आदतें भी एंड्रोपॉज जल्द शुरु होने की वजह बन सकती हैं। जर्नल ऑफ यूरोलॉजी में प्रकाशित रिसर्च के अनुसार कम फैट वाला खाना खाने से पुरुषों में टेस्टोस्टेरोन की कमी हो सकती है। वहीं, इंग्लैंड की डरहम यूनिवर्सिटी की रिसर्च की मानें तो जिन जगहों पर इन्फेक्शन का खतरा ज्यादा रहता है, वहां युवा लड़कों में आगे चलकर टेस्टोस्टेरोन का लेवल कम होने की आशंका रहती है।

कम टेस्टोस्टेरोन लेवल वाले पुरुषों को कोरोना का खतरा
फूड एंड ड्रग ऐडमिनिस्ट्रेशन के अनुसार पुरुष के शरीर में टेस्टोस्टेरोन की नॉर्मल रेंज 300 से 1 हजार नैनोग्राम प्रति डेसीलीटर होनी चाहिए। लेकिन जब टेस्टोस्टेरोन लेवल 300 से नीचे चला जाता है, तो इसे टेस्टोस्टेरोन लेवल की कमी के रूप में देखा जाता है। न्यू इंग्लैंड रिसर्च इंस्टीट्यूट ने पुरुषों में कम टेस्टोस्टेरोन को लेकर सर्वे किया। इसमें कुल 1,475 पुरुषों को शामिल किया गया था, जिनकी उम्र 35 से 60 के बीच थी। रिसर्च में सामने आया कि कम टेस्टोस्टेरोन के लक्षण वालों में सेक्स की इच्छा कम थी। वॉशिंगटन यूनिवर्सिटी स्कूल ऑफ मेडिसिन की रिसर्च के अनुसार जिन पुरुषों में टेस्टोस्टेरोन लेवल कम होता है उन्हें कोरोना से गंभीर इंफेक्शन का ज्यादा खतरा हो सकता है।
टेस्टोस्टेरोन रिप्लेसमेंट थेरेपी से फायदा
ये समझना जरूरी है कि हर इंसान के शरीर में हार्मोनल बदलाव होते हैं। अगर इस दौरान आप उदासी और अकेलेपन जैसी चीजें महसूस कर रहे हैं तो मदद के लिए डॉक्टर से जरूर बात करें। क्योंकि कुछ बातों का ध्यान रखते हुए इस दौर को थोड़ा आसान और बेहतर बनाया जा सकता है। एंड्रोपॉज के दौरान टेस्टोस्टेरोन रिप्लेसमेंट थेरेपी के जरिये भी इसके लक्षणों में सुधार किया जा सकता है।
टेस्टोस्टेरॉन थेरेपी से कम हो सकता है हार्ट अटैक का खतरा
बोस्टन यूनिवर्सिटी स्कूल ऑफ मेडिसिन के एक्सपर्ट की रिसर्च के अनुसार जो पुरुष टेस्टोस्टोरोन हार्मोन बढ़ाने का इलाज करवाते हैं उनमें दिल की बीमारियों का रिस्क कम हो जाता है। ये स्टडी टेस्टोस्टोरोन थेरेपी का इलाज करवाने वाले 255 पुरुषों के बीच की गई। इस दौरान पांच सालों तक उनकी सेहत पर नजर रखी। रिसर्च में देखा गया कि इन पुरुषों के बैड कोलेस्ट्रॉल का स्तर कम हुआ और गुड कोलेस्ट्रॉल का स्तर बढ़ा, जिससे हाइपरटेंशन और कार्डियोवास्कुलर बीमारी का रिस्क कम हुआ है।
इन बातों का रखें ध्यान

50 साल की उम्र के बाद पुरुष अपनी सेहत को लेकर ज्यादा अलर्ट रहे। में आहार में सप्लीमेंट्स, आयरन और फाइबर वाले फूड शामिल होना चाहिए।
कैल्शियम हड्डियों को मजबूत बनाने और आयरन शरीर में रक्त का प्रवाह बनाए रखता है। इससे ब्लड वेसल्स का वॉल्यूम बनाए रखने में मदद मिलती है।
एंड्रोपॉज में पुरुष तनाव से दूर रहने की कोशिश करें। वरना डिप्रेशन हो सकता हैं।
उम्र के इस पड़ाव में महिलाओं की तरह ही पुरुषों को भी खास देखभाल की जरूरत होती है। इसलिए सेहत भरी खुराक लें।

(साभार – दैनिक भास्कर)

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