महिला एंकरों पर खूबसूरत दिखने का दबाव है पर ये बंद होना चाहिए

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मीडिया में महिलाओं के लिए जगह बनाना आसान नहीं है और आज की तकनीक के साथ कदम ताल मिलाना, ये भी सबसे नहीं होता। वहीं पत्रकारिता की दुनिया में कुछ युवा पत्रकार अपना लोहा मनवा रही हैं। महिला एंकर होने के नाते कैमरे के दबाव को आसानी से सम्भालना और सोशल मीडिया का उपयोग बड़ी खूबसूरती से कर रही हैं। ऐसी ही एक पत्रकार व एंकर हैं भाग्यश्री गुप्ता। भाग्यश्री एक डबिंग आर्टिस्ट भी हैं और इन दिनों सोशल मीडिया से अनजान लोगों को सोशल मीडिया पर लाने की मुहिम में लगी हैं। भाग्यश्री शुभजिता टीम की मेंटर भी हैं तो उनसे कई पहलुओं पर बात हुई, आपके लिए पेश हैं खास अंश – 

प्र. मीडिया में आना कैसे हुआ? अपने बारे में बताइये?

सबसे पहले तो शुभजिता का धन्यवाद करना चाहूंगी , मुझे इसका हिस्सा बनने का मौका दिया और मैं अपने बारे में बोल सकूँ इसके काबिल बनाया।  दसवीं पास करते ही मीडिया जर्नलिज़्म ने अपनी तरफ खींच लिया था तभी यह तय कर लिया था कि मीडिया की पढ़ाई ही आगे करनी है और इसी में बढ़ना है लेकिन ये भी जानती थी की घर में या रिश्तेदार में किसी का मीडिया से दूर दूर तक कोई रिश्ता नहीं था इस वजह से इस फील्ड में आने में थोड़ी कठिनाई ज़रूर होगी। परिवारवाले शायद बहुत साथ न दे लेकिन तय तो कर लिया था। स्नातक की पढ़ाई करते ही सहारा समय के कोलकाता ऑफिस से एक महीने की इंटर्नशिप की। वहाँ से ताज़ा टीवी जो की एकमात्र लोकल हिंदी चैनल था कोलकाता का में काम करने का मौका मिला।

प्र. कोरोना काल में मीडिया पर क्या असर पड़ा है ?

कोरोना काल में मीडिया क्या सभी क्षेत्रो में काफी असर हुआ है। डिजिटल, ट्रेडिशनल सभी में लोगों  को बहुत नुक्सान हुआ है . लोगों की नौकरी चली गयी।  मीडिया हाउसों में कर्मचारी काम छोड़ जाने लगे। कई छोटे मीडिया हाउस बंद होने की कगार पर आ गए।  कई कंपनियों में छटनी के साथ साथ तनख्वाह भी काट के दी गयी और शायद अभी भी दी जा रही है।  लेकिन कोरोना ने लोगों को ज़िन्दगी के बहुत छोटे छोटे मायने समझा दिए। यही एकमात्र पॉजिटिव बात रही।  लोगों को परिवार के साथ समय मिल गया।
प्र. वर्क फ्रॉम होम पर आपके क्या विचार हैं?
देखिये वर्क फ्रॉम होम कई लोगों के लिए बेहद सुविधाजनक रही क्यूंकि लोग पैसे भी बचा पाए और समय भी।  लेकिन कुछ लोगों के लिए ख़ास तौर पर महिलाओं के लिए वर्क फ्रॉम होम उतना बेहतर ऑप्शन नहीं है क्यूंकि उन्हें ऑफिस के साथ साथ घर का काम भी मैनेज करना पड़ता है जिससे उनकी प्रोडक्टिविटी पर असर पड़ता है। हालाँकि ये सभी महिलाओं के लिए लागु नहीं होता।  लेकिन देखा जाये तो घर से काम करने के भी अपने प्रो और कोन है।  लेकिन इससे आपको आराम करने का समय मिल जाता है। समय पर खाने का वक़्त मिलता है।  और आपने कम्फर्ट ज़ोन के मुताबिक़ काम कर सकते हैं।
प्र. डिजिटल मीडिया का उपयोग कमाई के लिये कैसे किया जा सकता है?
डिजिटल मीडिया ने लोगों की लाइफ बहुत आसान कर दी है।  लोग घर बैठे , अपने सुविधा अनुसार काम काम कर पा रहे हैं।  ये जरिया आजकल हर एक फील्ड में है।  डिजिटल ज़माने में आपके पास बहुत सारे ऑप्शन तैयार होते है।  जिनका सही इस्तेमाल कर आप अपने कमाई का जरिया तैयार कर सकते हैं।  सही ज्ञान और अनुभव से आप इसे सही तरीके से इस्तेमाल कर सकते हैं।
प्र. ऐसे लोग, जो डिजिटल तौर पर सक्रिय नहीं हैं, उनको किस तरह से आगे लाया जाय?
इस वक़्त कई लोग अब भी डिजिटल मीडिया से बहुत ज्यादा परिचित  नहीं है जिसका कारण  है ज्ञान का अभाव और सही जानकारी।  लेकिन कोशिश यही होनी चाहिए की जो लोग डिजिटल मीडिया पर सक्रीय नहीं है उन्हें इस प्लेटफार्म पर लाया जाये।  सही इनफार्मेशन और हैंड्स ऑन प्रैक्टिस के साथ ऐसे लोगों को डिजिटल वर्ल्ड में शामिल किया जा सकता है।  अक्सर कुछ लोग ट्रेडिशनल मीडिया में रमे होने के कारण नए प्रयोगों से डरते हैं।  लेकिन उनके इसी डर को ख़त्म करने की ज़रूरत है।
प्र. महिला एंकर पर खूबसूरत दिखने का दबाव इतना अधिक क्यों रहता है ?
महिला एंकर पर खूबसूरत होने का दबाव मीडिया के हर सेक्टर में है।  लोग पुरुष एंकर में शायद इतने प्रतिबन्ध नहीं चाहते लेकिन अगर आप चैनल का चेहरा है और महिला है तो आपको बेहद खूबसूरत और प्रेजेंटेबल दिखने की उम्मीद की जाती है  . लोगों की यह धारणा रहती है की महिला है एंकरिंग करती है तो आपको खूबसूरत दिखना होगा ताकि लोग उस चैनल को ज्यादा देखें।  लेकिन कई बार इससे कई लड़कियों का मनोबल टूटा है जो बेहद काबिल होकर भी लोगों के सामने प्रस्तुत नहीं हो पाती है।  इसलिए ज़रूरी है इस नए आधुनिक समय में इस धारणा को खत्म किया जाए।
प्र. आप क्या सन्देश देना चाहेंगी?
 आखिर में मैं बस इतना ही कहना चाहूंगी की हर परिवार को अपनी घर की बेटी के फैसले में साथ देना चाहिए।  मीडिया में आने के लिए उसे प्रोत्साहित करें।  उसका हौसला बढाएँ।  उसकी काबिलियत पर सवाल ना खड़े कर उसका सहारा बनें। उसकी तरक्की की दुआ ना करें न कि घर बसाने की, और मीडिया में हर किसी को मौका मिलना चाहिए।  सिर्फ जो सालों से बने हुए है उन्हें नयी पीढ़ी को आगे बढ़ने का मौका देना चाहिए।
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