रंगकर्म को ऑडियो-विजुअल रूप में सामने लाने की कोशिश होनी चाहिए – शंभुनाथ

0
112

कोलकाता : सांस्कृतिक पुनर्निर्माण मिशन कोलकाता की ओर से एक वेबिनार का आयोजन किया गया। इस वेबिनार का केंद्रीय विषय उषा गांगुली और उनका व्यक्तित्व था। इस वेबिनार के आमंत्रित वक्ताओं में ओम पारिक, प्रताप जायसवाल, अशोक सिंह, महेश जायसवाल, मंजू श्रीवास्तव, सुशील कांति, कल्पना झा आदि ने अपनी सक्रिय उपस्थिति दर्ज की।
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए भारतीय भाषा परिषद के निदेशक और प्रसिद्ध आलोचक शंभुनाथ ने कहा कि ‘रंगकर्म पूरे जीवन का होम माँगता है साथ ही इस संकट के दौर में रंगकर्म को ऑडियो-विसुअल रूप में सामने लाने की कोशिश होनी चाहिए।
उषा गांगुली और उनके व्यक्तित्व के संदर्भ में ओम पारिक ने अपने विचार रखते हुए कहा कि उषा जी ने मुझे शिक्षित किया। उनके व्यक्तित्व से मेरे व्यक्तित्व का पुनर्निर्माण हुआ। प्रताप जायसवाल ने कहा कि उन्होंने लोक समुदाय के लिए नाटक किया। नाटक उनका सब कुछ था । अशोक सिंह ने कहा कि उषा जी का व्यक्तित्व एक दबंग योद्धा की तरह था क्योंकि ‘रंगकर्मी’ जैसे दल को पूरे उत्साह के साथ आगे बढ़ाने में उनकी जो भूमिका रही उससे इंकार नहीं किया जा सकता। उषा गांगुली के संबंध में महेश जायसवाल ने उनके रंगमंचीय कर्म की सराहना करते हुए कहा कि रंगकर्म कोई पार्ट टाइम जॉब नहीं है, यह निरंतर किये जाते रहने वाला कर्म है।मंजू श्रीवास्तव ने उषा गांगुली को याद करते हुए कहा कि वे हमेशा कहा करती थीं कि नाटक यदि उद्देश्यपूर्ण न हों तो उनका कोई औचित्य नहीं। सुशील कांति ने कहा कि उषा जी का जाना न केवल रंगमंच की क्षति है अपितु एक आदर्श व्यक्तित्व निर्माण की प्रक्रिया के खो जाने जैसा है। उनमें कलाकारों को माँजने का अनोखा अंदाज था। कल्पना झा ने उषा गांगुली से अपने व्यक्तिगत संबंधों को लेकर विस्तृत चर्चा की। कार्यक्रम का शुभारंभ संस्था के महासचिव डॉ राजेश मिश्र के स्वागत भाषण से हुआ। कार्यक्रम का संचालन डॉ अनिता राय और तकनीकि संचालन अनुपमा सिंह ने किया। धन्यवाद ज्ञापन रामनिवास द्विवेदी ने किया।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

3 × 1 =