रायपुर के शनिदेव की पूजा करती हैं महिलाएँ

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 महाराष्ट्र के प्रसिद्ध शनि शिंगणापुर में स्थित भगवान शनिदेव की प्रतिमा पर जहां महिलाओं को तेल अर्पित करने से रोके जाने का मामला सुर्खियों में है, वहीं राजधानी रायपुर के शनि मंदिरों में महिलाओं को तेल चढ़ाने से कोई मनाही नहीं है। छोटी उम्र की बालिका से लेकर युवतियां और बुजुर्ग महिलाएं तक शनिदेव की प्रतिमा पर श्रद्धा से तेल अर्पित करती हैं।

शनि मंदिरों में पुरुषों से ज्यादा युवतियां व महिलाओं की लाइन लगी रहती है। तेल अर्पित करने आई महिलाओं का कहना है कि किसी भी भगवान की पूजा-अर्चना करने से महिलाओं को रोकना गलत है। भारतीय संस्कृति में जब नारी को देवी तुल्य माना जाता है तो फिर उन्हें पूजा-अर्चना करने से कैसे रोका जा सकता है?

शनिवार को सुबह से ही शनि मंदिरों में भगवान शनिदेव को तेल अर्पित करने के लिए महिलाओं की कतार लगी रही और बारी-बारी से महिलाओं ने विधिवत पूजा-अर्चना करके शनि प्रतिमा पर तेल अर्पित किया। हालांकि चूड़ी लाइन स्थित प्राचीन शनि मंदिर में गर्भ गृह के भीतर किसी भी भक्त के प्रवेश करने की मनाही है और मुख्य प्रतिमा पर तेल अर्पित नहीं किया जा सकता सिर्फ उनके श्रृंगारित रूप का ही दर्शन किया जा सकता है, लेकिन मंदिर परिसर में ही पत्थर के एक और शनि देवता को विराजित किया गया है जहां कोई भी भक्त तेल अर्पित कर सकता है। दोपहर को मंदिर परिसर में अनेक पुरुष व महिलाएं तेल अर्पित करते नजर आईं।

आजाद चौक मुख्य मार्ग पर स्थित शनि मंदिर में दोपहर को बीच सड़क तक महिलाओं की कतार लगी रही। डीडी नगर से अपनी मां के साथ मंदिर पहुंची अनुपमा ठाकुर ने मंदिर के बाहर से पूजन सामग्री व तेल खरीदा और पुरुषों के पीछे लाइन में लग गई। मंदिर के भीतर प्रवेश करने के बाद उन्होंने पहले अगरबत्ती प्रज्ज्वलित कर पूजा की और फिर पॉलिथिन में रखे तेल को शनिदेव की प्रतिमा पर चढ़ाया।

इसके बाद शनिदेव की परिक्रमा की। उनके पीछे अनेक महिलाओं ने भी पूजा का क्रम जारी रखा। पूजा करने के बाद जब वे मंदिर से बाहर निकली तो पूछने पर बताया कि वे कई साल से निरंतर हर शनिवार को मंदिर आकर तेल अर्पित करती हैं, वे शनि शिंगणापुर जाकर भी दर्शन कर चुकी हैं लेकिन वहां महिलाओं को तेल चढ़ाने नहीं दिया जाता सिर्फ दर्शन करने की ही छूट है, इसलिए निराश हुई थी, मगर अपने शहर में जितनी देर तक चाहो शनिदेव के दर्शन कर तेल अर्पण कर मन्न्त मांगने की छूट है। वे कहती हैं कि महिलाओं को शनिदेव पर तेल अर्पण करने से रोकना गलत है।

कॉलेज में पढ़ने वाली युवती आरती ने भी शनि मंदिर में शनिदेव की प्रतिमा पर तेल अर्पित किया और पूछे जाने पर बताया कि किसी भी भगवान को मानना या न मानना अपनी-अपनी आस्था पर निर्भर करता है। हजारों लोग मन में ख्वाहिशें लेकर शनि सिंगनापुर जाते हैं और वहां यदि तेल अर्पण करने से रोका जाए तो यह महिलाओं के साथ अन्याय है, क्योंकि हमारी संस्कृति में महिलाओं को देवी का दर्जा दिया जाता है।

घर-घर मे पूजा-पाठ ज्यादातर महिलाएं ही करती हैं, जिन्होंने भारतीय संस्कृति को जीवित रखा है। पुरुष वर्ग तो महज हाथ जोड़कर व शीश नवाकर चले जाते हैं, मगर विधिवत पूजा महिलाएं ही करती हैं। ऐसे में महिलाओं के साथ भेदभाव करना उचित नहीं है। मंदिर में अनेक युवतियों व महिलाओं ने भी पूजा के बाद खुशी जाहिर की और कहा कि अच्छा है हमारे शहर में कोई प्रतिबंध नहीं है, वरना लोग मंदिरों में जाना ही बंद कर देंगे।

 

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