वर्जिनिया वूल्फ के व्यक्तित्व और कृतित्व पर चर्चा

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कोलकाता । भवानीपुर एजूकेशन सोसाइटी कॉलेज की लाइब्रेरी नोलेज रिसोर्स में बुक रिडिंग सेशन में बीसवीं सदी की प्रमुख अंग्रेजी लेखिका वर्जिनिया वूल्फ के दो उपन्यासों टू दि लाइट हाउस और श्रीमती डलोवे पर चर्चा की गई। डॉ वसुंधरा मिश्र ने कहा कि वर्जिनिया वूल्फ के उपन्यास पाठकों की भावनाओं को बहुत गहराई तक खोदता है और कई भावनाओं को बाहर लाता है जो सभी को छूता है। सबके भीतर की इन आंतरिक अनुभूतियों को वह अद्भुत ढंग से यथार्थ से जोड़ता है। यह वास्तव में पाठक को कथानक के भीतर डुबो देता है, जो समुद्र की लहरों की तरह तीव्र भावनाओं से दूर हो जाता है
कम्युनिकेशन और सॉफ्ट स्किल ट्रेनर समीक्षा खंडूरी ने बताया कि वर्जीनिया वूल्फ के उपन्यास में एक तरह से कथा के माध्यम से क्या और कैसे को परिभाषित किया गया है।सतही समानता से अधिक उपन्यास उसकी वास्तविक जीवन की कहानी को दर्शाता है, व्याख्यात्मक आधारों का संदर्भ देता है , अवचेतन चिंतन जो कथानक को आगे बढ़ाता है और एक द्विआधारी संदर्भ में पारिवारिक गति का पारभासी अभिप्राय सेक्सवाइज, वूल्फ के सबसे चिह्नित भेद सभी इस पुस्तक में उनकी तेजस्विता में प्रदर्शित होता है। विद्यार्थियों द्वारा दोनों उपन्यासों पर विवेचनात्मक चर्चा की गई। मिसेज़ डलोवे उपन्यास दो कहानियों के माध्यम से व्यक्तिगत अनुभव में समय की प्रकृति को संबोधित करता है, विशेष रूप से पात्र क्लेरिसा की वह एक पार्टी की तैयारी करती है और उसकी मेजबानी करती है और मानसिक रूप से क्षतिग्रस्त युद्ध के अनुभवी सेप्टिमस वॉरेन स्मिथ की। दो पात्रों को एक दूसरे के लिए पन्नी के रूप में देखा जा सकता है। टू द लाइट हाउस जीवन और उसकी वास्तविकता पर सवाल उठाता उपन्यास है। एक ओर जब यह विवाह और समाज में महिलाओं की स्थिति की जांच करता है, तो यह जीवन की कठिन जटिलताओं जैसे अलगाव और उन्मूलन को भी चित्रित करता है। श्री और श्रीमती रामसे, अपने आठ बच्चों के साथ, विभिन्न पड़ोसियों और नौकरों से घिरे हेब्राइड्स के घर में रहते हैं। वर्जीनिया वूल्फ पारिवारिक जीवन में अंतर-संबंधों की विसंगतियों और पेचीदगियों की एक आश्चर्यजनक कहानी बुनती है। बीसवीं शताब्दी में वर्जीनिया वूल्फ के सबसे लोकप्रिय कार्यों में से एक टू द लाइटहाउस है।
कार्यक्रम के प्रारंभ में डीन प्रो दिलीप शाह ने कहा कि लेखक द्वारा रचित पात्रों का चित्रण ही जीवंत होता है तभी लेखिका या लेखक प्रसिद्धि प्राप्त करता है। समीक्षा ने मिसेज़ डलोवे उपन्यास के पात्रों की चर्चा करते हुए कहा कि उपन्यास में लेखिका एक नैरेटर की तरह है। दोनों उपन्यास के कुछ अंशों को विद्यार्थियों ने बहुत ही प्रभावशाली ढंग से पढ़ा। डॉ वसुंधरा मिश्र ने बताया कि दुनिया की सभी भाषाओं में लिखे श्रेष्ठ साहित्य और लेखक के व्यक्तित्व को हमें जानना चाहिए तभी विचार समृद्ध होते हैं। फज़ल करीम ने बुक रिडिंग का महत्व बताया। उज्जवल करमचंदानी ने उपन्यास की महत्वपूर्ण उक्तियों को पढ़ा जो जीवन की महत्वाकांक्षा, सफलता और असफलता को दर्शाता है। नम्रता चौधरी ने उपन्यास के आधार पर जीवन में बदलते हुए संबंधों पर आज के संदर्भ में अपनी बात कही जो प्रासंगिक है। आदित्य मुखर्जी, कशिश शॉ, अनिकेत दास गुप्ता, रूपेश कुमार झा, शेख मोहम्मद जहिरुददीन, यश सिन्हा का सक्रिय योगदान रहा। संयोजक डॉ वसुंधरा मिश्र और समीक्षा ने डीन प्रो दिलीप शाह और पुस्तकालय के अधिकारियों को धन्यवाद दिया जिन्होंने इस कार्यक्रम के लिए सुविधा उपलब्ध कराई।

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