वसीम जाफर ने कहा क्रिकेट को अलविदा

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नयी दिल्ली : वसीम जाफर ने गत शनिवार को खेल के सभी प्रारूपों से संन्यास की घोषणा कर दी। भारतीय टीम के लिए सलामी बल्लेबाजी का मोर्चा संभाल चुके मुंबई के इस खिलाड़ी ने 41 साल की उम्र में क्रिकेट को अलविदा कहा। भारतीय टीम के लिए 2000 में डेब्यू करने वाले जाफर ने 31 टेस्ट में भारतीय टीम का प्रतिनिधित्व करते हुए एक दोहरा शतक, पांच शतक और 11 अर्द्धशतकों के बूते 1944 रन बनाए थे। 2006 में वेस्टइंडीज के खिलाफ सेंट जोंस में उन्होंने अपने करियर की सर्वश्रेष्ठ 212 रन की पारी खेली थी। हालांकि उन्हें सिर्फ दो ही वन-डे में खेलने का मौका मिला। 2008 में आखिरी बार टीम इंडिया के लिए खेलने के बाद वह प्रथम श्रेणी क्रिकेट में सक्रिय हो गए। वहां उन्होंने जमकर बवाल मचाया। अपने पूरे करियर में वसीम जाफर ने 434 मैच (टेस्ट, वन-डे, प्रथम श्रेणी, लिस्ट ए) खेलते हुए 72 शतक और 26, 213 रन बनाए। प्रथम श्रेणी क्रिकेट में दमदार प्रदर्शन से कई रिकॉर्ड अपने नाम करने वाले जाफर का जन्म 16 फरवरी 1978 को मुंबई में हुआ था। दाएं हाथ के इस शानदार बल्लेबाज को घरेलू भारतीय क्रिकेट का भगवान भी कहा जाता है। करीब दो दशक तक खेलने के बाद भी इस खिलाड़ी के भीतर कभी रन बनाने की भूख खत्म नहीं हुई।
1996/97 में मुंबई की ओर से अपना कॅरियर शुरू करने वाले वसीम ने 9 दिसंबर 2019 को घरेलू क्रिकेट का सबसे बड़ा रिकॉर्ड अपने नाम किया था। 41 साल की उम्र में 2019-20 का सीजन खेलते हुए जाफर 150 रणजी मैच खेलने वाले भारत के पहले और इकलौते क्रिकेटर बने थे।
यह कारनामा उन्होंने विदर्भ की ओर से आंध्र के खिलाफ किया था। इस सूची में उनके बाद सबसे ज्यादा रणजी मैच खेलने का रिकॉर्ड देवेंद्र बुंदेला के नाम है, जबकि अमोल मजूमदार 136 मैचों के साथ तीसरे स्थान पर हैं। घरेलू क्रिकेट में रिकॉर्ड 40 शतक जड़ने वाले वसीम साल 2018 में रणजी ट्रॉफी के इतिहास में 11000 रन बनाने वाले पहले क्रिकेटर बने थे। जाफर ने टेस्ट क्रिकेट में साल 2000 में द. अफ्रीका के खिलाफ अपना इंटरनेशनल डेब्यू किया था। टेस्ट क्रिकेट में उन्होंने अपना पहला शतक नागपुर (2006) में लगाया था। वसीम जाफर ने पहला फाइनल 1996-97 सीजन में खेला था। मुंबई के लिए 18 साल खेलने के बाद उन्होंने 2015-16 में विदर्भ की तरफ से खेलना शुरू किया।
फर्स्ट क्लास और लिस्ट ए में खेले कुल 342 मैचों में उन्होंने 23,457 रन बनाए हैं। फर्स्ट क्लास (57) और लिस्ट ए (10) दोनों मिलाकर जाफर ने 67 शतक लगाए हैं। वसीम जाफर घरेलू क्रिकेट के एकमात्र ऐसे खिलाड़ी हैं, जिन्होंने कभी कोई फाइनल मुकाबला नहीं हारा है।
जाफर 1996-97 से 2012-13 के बीच 8 बार रणजी ट्रॉफी जीतने वाली मुंबई टीम का हिस्सा रहे और फिर लगातार दो बार से (2017-18, 2018-19) उन्होंने विदर्भ को खिताब जितवाने में अहम भूमिका निभाई। बीते सीजन भी उनके बल्ले से 11 मैचों में 69.13 की औसत से 4 सेंचुरी के साथ 1037 रन निकले थे। मई 2019 में वसीम जाफर को बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड (बीसीबी) ने मीरपुर स्थित अपनी अकादमी के लिए बल्लेबाजी सलाहकार नियुक्त किया था, उनका कार्यकाल अप्रैल 2020 तक का है। बीसीबी ने उनके साथ एक वर्ष का अनुबंध किया था। शुरुआत में वह अंडर-16 और अंडर-19 आयुवर्ग के क्रिकेटरों को टिप्स देते थे। उसके बाद उन्हें भारत के एनसीए की तर्ज पर हाई परफोर्मेंस यूनिट का दायित्व सौंपा जाना था।

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